कवर्धा। कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री को जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड एवं स्केल तथा उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदोन्नत किये जाने संबंध में- संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों एवं नियमों का उल्लघन एवं भेदभाव किये जाने के संबंध में पत्र लिखा है।
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने पत्र में लिखा है कि….मैं भारतीय पुलिस सेवा (2012 बैच) का अधिकारी हूँ। वर्तमान में पुलिस अधीक्षक कबीरधाम के पद पर कार्यरत हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर मेरी पदोन्नति के संबंध में संनिष्ठता प्रमाणित करते हुए दिनांक 10/10/2024, 31/12/2024, 26/05/2025 एवं 31/07/2025 के माध्यम से मेरी पदोन्नति की अनुशंसा की गई है, किंतु मेरे विरूद्ध लोकायुक्त संगठन भोपाल मे जाँच विवेचना स्तर पर लंबित होने के कारण उक्त पदोन्नतियाँ नहीं दी गई है जबकि उक्त प्रस्ताव में अन्य अधिकारियों 01. डॉ. आनंद छाबड़ा (भापुसे) के विरूद्ध अपराध क्र.-06/24 (महादेव सट्टा ऐप) भ्र.नि.अधि. 1988 यथासंशोधित 2018 की धारा 17 (क) के अधीन प्रकरण विवेचना में है। 02. प्रशांत अग्रवाल (भापुसे) के विरूद्ध भी विवेचना स्तर पर अपराध क्रं-06/24 (महादेव सट्टा ऐप्प) भ्र.नि.अधि. 1988 यथासंशोधित 2018 की धारा 17 (क) के अधीन प्रकरण विवेचना में है। 03. अभिषेक पल्लव (भापुसे) के भी उक्त अपराध कायम होकर विवेचनाधीन है तथा 04. रजनेश सिंह (भापुसे) पर अपराध क्रं-06/19 एवं 07/19 कायम है। जिसमें आज तक न्यायालय से कोई अंतिम रिपोर्ट स्वीकृत नही है, फिर भी उक्त अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है जबकि मेरे विरूद्ध प्रकरण लंबित होने के आधार पर पदोन्नति नहीं दी गई है, जो कि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद-16 के तहत् अवसर की समानता का खुला उल्लंघन है।
भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा पदोन्नति हेतु जारी नियम दिनांक- 15/01/1999 के कंडिका-11 के अनुसार
11 (A) के अनुसार निलंबन के दौरान
11 (B) के अनुसार अधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र जारी किया जा चुका हो और विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो।
11 (C) के अनुसार अधिकारी के विरूद्ध न्यायालय में आपराधिक प्रकरण लंबित हो।
उपरोक्त तीन बिंदुओं के आधार पर ही किसी भी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी को पदोन्नति/प्रवर श्रेणी वेतनमान के लिए अपात्र किया जा सकता है। किन्तु मेरे प्रकरण में उक्त कंडिकाएं लागू नहीं है, फिर भी जान-बूझकर बद्नियति एवं पूर्वाग्रहों के चलते मुझे न तो वरिष्ठ वेतनमान दिया जा रहा है और न ही उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है, जो कि मेरे मौलिक अधिकारों का स्पष्टतः हनन है। मेरे समान स्थिति वाले अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है, जबकि मेरे साथ भेदभाव किया गया है।
इस वर्ष पुलिस मुख्यालय द्वारा भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग के पदोन्नति हेतु प्रेषित पत्र क्रमांक- ए-2/जी-1187/2025, दिनांक 29.12.2025 के परिशिष्ट-“अ’ सरल क्रमांक 19 द्वारा मेरी संनिष्ठा प्रमाणित की गई है एवं मध्य प्रदेश लोकायुक्त भोपाल में प्रकरण विवेचना स्तर पर लंबित लेख किया गया है। इसी प्रकार परिशिष्ट-“अ” के सरल क्रमांक 4. डॉ. आनंद छाबड़ा (भापुसे) के विरूद्ध एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 6/2024 (महादेव सट्टा एप्प) के प्रकरण में सीबीआई को दिनांक 27/12/2024 को स्थानांतरित की गई है। क्रमांक 6. प्रशांत कुमार अग्रवाल (बाधुसे) एवं क्रमांक 20. अभिषेक पल्ल्व (भापुसे) के विरूद्ध एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 06/2024 (महादेव सट्टा एप्प) के प्रकरण में सीबीआई को दिनांक 27/12/2024 को स्थानांतरित की गई है, जो वर्तमान में विवेचनाधीन है।
इसी प्रकार सरल क्रमांक 12. रजनेश सिंह (भापुसे) के विरूद्ध ईओडब्ल्यू रायपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 06/2019 व 07/2019 (फोन टैपिंग प्रकरण) में माननीय न्यायालय में दिनांक 04/07/2024 को अंतिम रिपोर्ट पेश किया गया है, जो न्यायालय में स्वीकृति हेतु विचाराधीन है। उक्त प्रकरण में भी रजनेश सिंह (भापुसे) को समस्त प्रयोजन हेतु परिणामी लाभ दिया गया है, जबकि उनकी वरिष्ठ वेतनमान के समय विभाग द्वारा संनिष्ठता प्रमाणित नहीं की गई है।
महादेव सट्टा एप्प में एसीबी/ईओडब्ल्यू में आनंद छाबड़ा (भापुसे), प्रशांत अग्रवाल (भापुसे), एवं अभिषेक पल्लव (भापुसे) के विरूद्ध अपराध क्रमांक 06/2024 (महादेव सट्टा एप्प) प्रकरण दर्ज होने तथा विवेचना सर्वोच्च जाँच संस्था सीबीआई को स्थानांतरित होने के बाद भी उपरोक्त अधिकारियों को पदोन्नति दी गई है, जबकि मेरे विरूद्ध खात्मा होने एवं विवेचना स्तर पर जाँच लंबित होने के आधार पर (JAG) वेतनमान नहीं दिया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि मेरे साथ दोहरी नीति अपनाते हुए मुझे जान-बूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है।
अतः कृपया भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा पदोन्नति हेतु जारी नियम दिनांक 15/01/1999 की कंडिका 11 नियम के प्रकाश में विचार करते हुए मुझे समस्त वेतनमान प्रदान किये जाने हेतु सादर निवेदन है, ताकि मुझे न्याय मिल सके तथा एक जैसे प्रकरणों में समानता के अधिकार की रक्षा हो सके।

















