रायपुर। एंटी करप्शन ब्यूरो में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 05/2025, धारा 409, 120बी भा.द.वि. एवं धारा 13 (1) ए सहपठित धारा 13(2), 7 (सी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (यथासंशोधित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018) के प्रकरण में आरोपी (1) अभिषेक कौशल, डायरेक्टर, रिकार्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रायवेट लिमिटेड, पंचकुला (2) राकेश जैन, प्रोप्राईटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज रायपुर (3) प्रिंस जैन (शशांक चोपड़ा का जीजा), लाईजनर, रिकार्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रायवेट लिमिटेड (4) कुंजल शर्मा, डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नवी मुम्बई के मार्केटिंग हेड के विरूद्ध दिनांक 16.04.2026 को पूरक चालान माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
राज्य के आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने हेतु जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं उप स्वास्थ्य केन्द्रों में ‘हमर लैब योजना अंतर्गत क्रय किए जाने वाले मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट्स की निविदा प्रक्रिया में पुल टेण्डरिंग के माध्यम से मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा निविदा प्राप्त की गई।
विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि प्रिंस कोचर शशांक चोपड़ा का सगा जीजा है और रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. के लिये लायजनिंग का काम करता है। रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. एवं श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने भविष्य में सीजीएमएससीएल में अपना सप्लाई चैन मजबूत करने के उद्देश्य से मोक्षित कॉर्पोरेशन को सहयोग किया। तीनों फर्मों के द्वारा अपनी अर्हता सुनिश्चित करने के लिये टेण्डर की शर्तों के अनुसार वास्तविक क्षमता से पृथक उत्पादक क्षमता, सर्विस, मेंटेनेन्स एवं इंस्टॉलेशन के फर्जी दस्तावेजों को तैयार कर निविदा में उपयोग किया गया, जिसके लिये प्रिंस कोचर द्वारा समन्वय कार्य किया गया।
विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से कुछ फर्मों द्वारा आपसी समन्वय और कार्टलाइजेशन किया गया। टेंडर में यही तीन फर्मे शॉर्टलिस्ट हुई थीं, जिनके वित्तीय दर खोले गए। तीनों पात्र फर्मों द्वारा भरे गए टेंडर में उत्पाद, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स का विवरण समान पैटर्न में भरा गया। जिन उत्पादों का नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट रूप से अंकित नहीं था, उन्हें भी तीनों फर्मों द्वारा समान रूप से दर्शाया गया। दर भी समान पैटर्न में कोट किए गए, जिसमें सबसे कम दर मोक्षित द्वारा, उसके पश्चात आर.एम.एस. तथा श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा कोट की गई।
विवेचना में यह भी पाया गया कि मेडिकल उपकरणों के रिएजेंट्स एवं कन्ज्यूमेबल्स के लिये डायसिस कंपनी ने निश्चित एम.आर.पी. तय किया था। आरोपी कुंजल शर्मा द्वारा मोक्षित कार्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर षडयंत्रपूर्वक रिएजेंट्स एवं कन्ज्यूमेबल्स के तय एम.आर.पी. से कहीं अधिक दर CGMSC को डायसिस कंपनी की ओर से प्रेषित किया गया, जिसके कारण निविदा में CGMSC ने मोक्षित कार्पोरेशन के मनमाने दर को मान्य कर लिया।
फलस्वरूप मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा CGMSC को वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति कर शासकीय राशि का दुरुपयोग करते हुए शासन को 550 करोड़ रूपये की आर्थिक क्षति पहुँचायी गई।
प्रकरण में अब तक 10 आरोपियों के विरूद्ध चालान प्रस्तुत किया जा चुका है। जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब योजना में शासकीय राशि के दुरुपयोग से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर आगे भी संबंधितों के विरुद्ध कठोर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
















