कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों को अपनी रिपोर्ट व्यवस्थित और तथ्यात्मक तरीके से तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें वर्तमान में संचालित योजनाओं, उनके क्रियान्वयन की स्थिति, निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले हुई प्रगति तथा नागरिकों को प्राप्त हो रहे लाभों की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा भविष्य में किए जाने वाले कार्यों और सुधारों से संबंधित प्रस्ताव भी प्रस्तुत करने होंगे…
नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अब प्रशासनिक सुधारों और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को और गति देने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री द्वारा राज्य और केंद्र सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे करने के अवसर पर जन विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताने के बाद सरकार का जोर सुशासन, कार्यक्षमता और सुधारों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने पर है। इसी कड़ी में 27 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव ने सभी मंत्रालयों के सचिवों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, संचालित योजनाओं की प्रगति और आम जनता को मिल रहे लाभों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। प्रत्येक मंत्रालय को अपनी उपलब्धियों के साथ भविष्य की प्रस्तावित योजनाओं और कार्ययोजनाओं का ब्योरा प्रस्तुत करना होगा। बैठक के दौरान प्राप्त जानकारी के आधार पर समग्र रिपोर्ट तैयार कर प्रधानमंत्री के समक्ष रखी जाएगी। इसके बाद उच्चस्तरीय विचार-विमर्श के जरिए महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए जाने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों को अपनी रिपोर्ट व्यवस्थित और तथ्यात्मक तरीके से तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें वर्तमान में संचालित योजनाओं, उनके क्रियान्वयन की स्थिति, निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले हुई प्रगति तथा नागरिकों को प्राप्त हो रहे लाभों की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा भविष्य में किए जाने वाले कार्यों और सुधारों से संबंधित प्रस्ताव भी प्रस्तुत करने होंगे।
27 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव मंत्रालयों के सचिवों से क्रमवार जानकारी लेकर उनकी कार्यक्षमता और योजनाओं के परिणामों की समीक्षा करेंगे। इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकार विभिन्न विभागों की उपलब्धियों के साथ उन क्षेत्रों की भी पहचान करना चाहती है, जहां सुधार और तेजी से काम करने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र पर काम करने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।
इसी दृष्टिकोण के तहत ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबार करने में सुगमता और ईज ऑफ लिविंग यानी जीवन को सरल बनाने की दिशा में नए कदम उठाए जा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य इन सुविधाओं को महानगरों तक सीमित रखने के बजाय छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना है, ताकि आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं और सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
केंद्र सरकार का एक प्रमुख लक्ष्य जनहित से जुड़ी योजनाओं का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना है। इसके लिए योजनाओं को सैचुरेशन मोड में लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका आशय है कि कोई भी पात्र व्यक्ति केवल जानकारी के अभाव, प्रक्रिया की जटिलता या प्रशासनिक बाधाओं के कारण सरकारी सहायता से वंचित न रहे।
इसी उद्देश्य से पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े विभागों के शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों के माध्यम से लोगों को योजनाओं की जानकारी देने, उनकी समस्याओं का समाधान करने और पात्र नागरिकों को लाभ उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
27 अक्टूबर की समीक्षा बैठक को केंद्र सरकार की आगामी कार्ययोजना के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्रालयों से प्राप्त रिपोर्ट और प्रधानमंत्री के साथ होने वाले विचार-विमर्श के आधार पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने, योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं।
सरकार की कोशिश है कि नीतिगत सुधारों का असर सीधे जनता तक पहुंचे और सरकारी योजनाओं के परिणाम अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दें। ऐसे में आने वाली समीक्षा बैठक के बाद ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को और गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
















