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12.66 करोड़ रुपये के पेवर ब्लॉक कार्यों में संगठित भ्रष्टाचार, आयुक्त राजीव पाण्डेय की भूमिका संदेहास्पद: पार्षद संतोष मौर्या

भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई की परियोजना शाखा में 12.66 करोड़ रुपये के पेवर ब्लॉक कार्यों में संगठित भ्रष्टाचार का खुलासा जांच से बचने के लिए फाइलें छुपाई जा रहीं, भिलाई निगम आयुक्त राजीव पाण्डेय की भूमिका संदेहास्पद है, वो अपने कर्मचारियों को बचा रहे है। भिलाई निगम का परियोजना शाखा से 6.40 लाख रुपए की फाइल गायब है। सूचना का अधिकारी की जानकारी भी निगम द्वारा नहीं दी जा रही है। उक्त बाते सोमवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में भिलाई निगम पार्षद संतोष मौर्या ने कही।

पार्षद मौर्या ने बताया कि नगर पालिका निगम भिलाई की परियोजना शाखा की कार्यशैली लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। अब उपलब्ध तथ्यों, दस्तावेजों एवं शपथ पत्र के आधार पर यह स्पष्ट होता जा रहा है कि परियोजना शाखा के अंतर्गत कराए गए पेवर ब्लॉक कार्यों में करोड़ों रुपये का सुनियोजित भ्रष्टाचार किया गया है।

पिछले 23 महीनों की अवधि में परियोजना शाखा के माध्यम से लगभग 12 करोड़ 66 लाख रुपये के पेवर ब्लॉक कार्य स्वीकृत एवं भुगतान किए गए, जिनमें भारी वित्तीय अनियमितताएं, नियमों की खुली अवहेलना और भ्रष्ट आचरण सामने आए हैं।

सामान्य सभा में शपथ पत्र के साथ सीधा आरोप: भाजपा पार्षद संतोष मौर्य द्वारा दिनांक 17 अक्टूबर 2025 को आयोजित नगर निगम की सामान्य सभा में विधिवत शपथ पत्र प्रस्तुत कर परियोजना शाखा के कार्यों पर सीधा और स्पष्ट आरोप लगाया गया।

श्री मौर्य ने अपने शपथ पत्र में यह स्पष्ट कहा कि परियोजना शाखा अंतर्गत कराए गए अधिकांश पेवर ब्लॉक कार्य स्वीकृत प्राक्कलनों के अनुरूप नहीं हैं। कार्यों में गुणवत्ता, मात्रा, स्थल एवं भुगतान सभी स्तरों पर गंभीर अनियमितता की गई है।

पार्षद ने मांग की है कि इन कार्यों की जांच दुर्ग कलेक्टर की प्रत्यक्ष निगरानी में, नगर निगम से अन्य विभागों के अधिकारियों की संयुक्त समिति से कराई जाए।

पार्षदी दांव पर लगाकर जांच की मांग: भाजपा पार्षद संतोष मौर्य ने यह भी स्पष्ट किया कि “यदि मेरे द्वारा लगाए गए आरोप जांच में असत्य पाए जाते हैं. तो मेरी पार्षदी तत्काल प्रभाव से शून्य कर दी जाए।” यह वक्तव्य अपने आप में यह दर्शाता है कि श्री मौर्य अपने आरोपों को लेकर कितने आश्वस्त और प्रतिबद्ध हैं।

33 कार्यों में भारी अनियमितता वास्तविकता छुपाने का प्रयास: श्री मौर्य का आरोप है कि परियोजना शाखा अंतर्गत कम से कम 33 ऐसे कार्यदेश हैं, जिनमें गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और जिनकी जांच की मांग लगातार की जा रही है, किंतु विभाग द्वारा जानबूझकर जानकारी छुपाई जा रही है। जिन स्थानों के लिए कार्य स्वीकृत हुए थे, उन स्थानों पर कार्य किया ही नहीं गया। राज्य शासन से जिन शर्तों एवं प्राक्कलनों के आधार पर स्वीकृति ली गई, उनके अनुरूप कार्य नहीं करवाए गए। जिन स्थानों पर कार्य हुआ, वहाँ कार्य की मात्रा, गुणवत्ता और भुगतान में भारी अंतर पाया गया।

संबंधित फाइलों एवं दस्तावेजों को दबाने और गायब करने का प्रयास किया जा रहा है। यह सब इस बात की ओर इशारा करता है कि घोटाले को उजागर होने से बचाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं।

सूचना का अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन: परियोजना शाखा की अपारदर्शिता और भ्रष्ट मंशा इस तथ्य से और स्पष्ट हो जाती है कि नगर निगम के पार्षद महेश शर्मा द्वारा दिनांक 9 जून 2025 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई. किंतु आज दिनांक तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। भाजपा पार्षद संतोष मौर्य ‌द्वारा दिनांक 7 नवंबर 2025 को पुनः विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया गया। विभाग ‌द्वारा 22 जनवरी 2026 को मात्र 13 फाइलों की अधूरी, अस्पष्ट और भ्रमित करने वाली जानकारी उपलब्ध कराई गई। इन 13 फाइलों की अनुमानित लागत लगभग 6 करोड़ 40 लाख रुपये है।

इसके विपरीत अभी भी 20 फाइले जानबूझकर छुपाई जा रही हैं, जिनकी अनुमानित कार्यदेश लागत लगभग 6 करोड़ 40 लाख रुपये है। यह स्थिति यह सिद्ध करती है कि नगर निगम प्रशासन सूचना के अधिकार कानून का भी खुला उल्लंघन कर रहा है, ताकि भ्रष्टाचार सामने न आ सके।

आयुक्त की भूमिका पर गंभीर सवाल: पार्षद श्री मौर्या ने नगर निगम आयुक्त राजीव कुमार पांडे की भूमिका पर सवाल उठाए हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में आयुक्त की भूमिका अत्यंत संदेहास्पद प्रतीत होती है। परियोजना शाखा को लेकर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ‌द्वारा लगातार शिकायते की गई, परंतु निगम आयुक्त ‌द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। भाजपा पार्षदों का स्पष्ट आरोप है कि निगम आयुक्त निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं कर रहे हैं। पार्षदों ‌द्वारा की गई शिकायतों को हंसी-मुस्कान में टाल देना आयुक्त की नियमित कार्यशैली बन चुकी है।

पार्षद श्री मौर्या ने बताया कि पेवर ब्लॉक कार्यों में भ्रष्टाचार को लेकर लगभग पांच बार लिखित पत्राचार किया गया, किंतु आज तक एक भी पत्र का उत्तर नहीं दिया गया। गंभीर आरोपों के बावजूद परियोजना शाखा में पदस्थ किसी भी अधिकारी को नोटिस तक जारी नहीं किया गया।

जांच समिति बनाने में भी जानबूझ कर देरी: पार्षद संतोष मौर्य द्वारा यह मांग की गई थी कि पूरे मामले की जांच दुर्ग कलेक्टर की निगरानी में उच्च स्तरीय समिति बनाकर कराई जाए। इसके बावजूद आयुक्त ‌द्वारा आज दिनांक तक कलेक्टर कार्यालय को एक भी पत्र प्रेषित नहीं किया गया।यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि दोषी अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

पूर्व की जांच रिपोर्ट भी दबाई गई: यह पहला अवसर नहीं है जब नगर निगम में जांच रिपोर्ट को दबाया गया हो। सामान्य सभा में सफाई कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच समिति का गठन किया गया था। समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बावजूद लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। यह सब दर्शाता है कि नगर निगम प्रशासन में पारदर्शिता समाप्त हो चुकी है।

परियोजना शाखा का दुरुपयोग: परियोजना शाखा का गठन बड़े और विशेष योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु किया गया था, किंतु 1 जनवरी 2022 से आज तक परियोजना शाखा द्वारा कोई भी बड़ी जनहितकारी योजना धरातल पर नहीं उतारी गई। उद्‌द्यान, वाहन, निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं, जबकि इनके लिए निगम में अलग-अलग विभाग पहले से मौजूद हैं। ₹50,000 से लेकर ₹5 करोड़ तक की निविदाएं परियोजना शाखा से जारी की जा रही हैं। पसंदीदा इंजीनियरों की नियुक्ति कर, पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए निविदा शर्तें बनाई जा रही हैं।

पिछले दो वर्षों में न तो आम जनता को कोई लाभ मिला, न ही भाजपा पार्षदों के वार्डों में कोई उल्लेखनीय विकास कार्य हुआ। यदि किसी को लाभ हुआ है, तो वह ठेकेदार अधिकारी गठजोड़ है।

पार्षदों ने भिलाई निगम महापौर पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, उन्होंने कहा कि निगम को चलाना महापौर नीरज पाल का काम है, पर वो भी इस भ्रष्टाचार में संलिप्त है, उनकी भी भूमिका संदिग्ध है। आयुक्त और महापौर दोनों मिलकर निगम को लूटने का काम कर रहे है। महापौर शहर के भ्रष्टाचार का ज्ञाता है। इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों को की जा रही है। एसआईआर चल रहा है, निगम आयुक्त नोडल अधिकारी है, एसआईआर के बाद कार्यवाही होगी। राज्य सरकार तक इसकी शिकायत की जा चुकी है।

पार्षद संतोष मौर्य सहित सभी भाजपा पार्षदों की मांग है कि-

1. परियोजना शाखा अंतर्गत सभी 33 कार्यों की कलेक्टर की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

2. छुपाई गई सभी फाइलों को तत्काल सार्वजनिक किया जाए।

3. दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

4. नगर निगम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

यदि शीघ्र न्यायसंगत कार्रवाई नहीं की गई, तो भाजपा पार्षद आंदोलन, न्यायालय एवं अन्य संवैधानिक विकल्प अपनाने को विवश होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।

पत्रकारवार्ता में दुर्ग जिला प्रभारी विधायक रामजी भारती, पार्षद महेश वर्मा, विनोद सिंह, दया सिंह, पीयूष मिश्रा, भोजराम सिन्हा, वीणा चंद्राकर, जालंधर सिंह, सांसद प्रतिनिधि प्रमोद सिंह, श्याम सुंदर राव, प्रेमलाल साहू, रामउपकर तिवारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, भाजपा नेता मौजूद रहे।

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