दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। जून माह के इस अंक में हम आपको एक ऐसे अधिकारी के अब तक के सफर के बारे में बता रहे है जो कि अपने काम को सेवाभाव से करते आए हैं। 35 वर्ष तक अपनी सेवाएं देने के बाद 30 जून 2020 को रिटायर्ड हुए। दुर्ग जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक के पद पर पदस्थ अनिल श्रीवास्तव से उनके अब तक के सफर पर सारनाथ एक्सप्रेस के संपादक ने विशेष बातचीत की। उनके अब तक के सफर को उन्हीं की जुबांनी पढ़े…।मेरी जन्मस्थली रायपुर में है वहां के सेंट पॉल स्कूल से मेरी प्रारम्भिक एवं हायरसेकंडरी तक की शिक्षा संपन्न हुुई। स्नातक की पढ़ाई के लिए मैंने साइंस कॉलेज रायपुर में एडमिशन लिया। वर्ष 1979 में मैंने बीएससी में स्नातक पूर्ण किया। वर्ष 1981 में इन्होंने मैंने स्नाकोत्तर एमए (इकोनॉमिक्स) से पूर्ण करने के साथ ही शासकीय नौकरी के लिए तैयारियां शुरू कर दी थी। रायपुर के पुलिस लाइन के पास ही मेरा निवास है। जिसके कारण पुलिस की नौकरी और खेल से मुझे शुरू से ही लगाव रहा। स्नातक के बाद मैंने पीएससी की तैयारियां शुरू की जिसके बाद दो बार पीएससी क्लीयर करने के बाद एक बार मेन्स व एक बार इंटरव्यू तक गया। लेकिन मेरा सलेक्शन नही हो पाया। मैंने शासकीय नौकरी की तैयारी जारी रखी और वर्ष 1984-85 में मेरा चयन उद्योग निरीक्षक के लिए हुआ। मेरी पहली पोस्टिंग उद्योग निरीक्षण बालोद (उस वक्त दुर्ग जिला) के पद पर हुआ। करीब तीन वर्षों तक वहां सेवा देने के बाद वर्ष 1987-88 में मेरा तबादला रायपुर जिला एवं व्यापार केंद्र में हुआ। वर्ष 1993 में मेरा प्रमोशन हुआ। मुझे उद्योग निरीक्षण से प्रबंधक प्रमोट कर मध्य प्रदेश हस्तशिल्प विकास निगम रायपुर में कार्यालय प्रमुख बनाया गया। मध्यप्रदेश हस्तशिल्प में पदस्थ रहते हुए मैंने एवं मेरी टीम ने रायपुर व नागपुर में हैंड क्राफ्ट, हैंडलूम के कार्यो में विशेष रूप से नई चीजें लोगो के समक्ष रखी। जिसको एक्स एमडी आईएएस अधिकारी के मार्गदर्शन में किया गया था। जिसमें ड्रेगन कारपरेट, बस्तर क्राफ्ट जैसे हस्तशिल्प को लोगो ने देखा और बारीकी से जाना। जिसके कारण इसकी बिक्री को बढ़ावा मिला। मध्यप्रदेश हस्तशिल्प में करीब तीन वर्षो तक मैंने अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1996 में मेरा तबादला जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र जगदलपुर (दंतेवाड़ा) में हुआ। वर्ष 2001 में मुझे पुन: रायपुर जिला व्यापार एवं उद्योग में पदस्थ किया गया जहां मैंने करीब पांच वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2006-07 में मुझे सीएसआईडीसी में प्रबंधक के पद पर पदस्थ किया गया जहां मैंने दो वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2009 में मुझे राजनंदगांव जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में प्रभारी महाप्रबंधक के पद पर पदस्थ किया गया। वर्ष 2010-11 में मेरा प्रमोशन हुआ और मुझे महाप्रबंधक बना कर रायपुर मुख्यालय में पोस्टिंग दी गई। चार वर्षों तक मुख्यालय में पदस्थ रहने के बाद वर्ष 2015-16 में मेरा स्थानांतरण दुर्ग जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में हुआ। अगस्त 2019 से दुर्ग जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में बतौर मुख्य महाप्रबंधक के पद पर पदस्थ रहते हुए 30 जून को सेवानिवृत्त हुआ। वर्ष 1990 में पुलिस (आर्थिक अपराध शाखा) द्वारा किये गए कई शेयर धारकों के यहां पड़े छापो में जिसके कई मामलों में मैंने विटनेश (सरकारी गवाह) की अहम भूमिका निभाई जिसमे पुलिस को बड़ी सफलता भी मिली। तत्कालीन रायपुर पुलिस अधीक्षक ने मुझे प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।मुझे शुरू से ही खेलो में क्रिकेट, हॉकी से विशेष रुचि रही साथ ही संगीत सुनना, समाजसेवा में भी मेरा लगाव रहा है और मैं समाजसेवा भी करते आ रहा हूं साथ ही सामाजिक संस्था से भी जुड़ा हूं। मेरे पिता स्वर्गीय कृपाशंकर श्रीवास्तव दुर्गा महाविद्यालय के अर्थशास्त्र के हेड प्रोफेसर व वाइस चांसलर भी रहे है। मैं जहां भी पदस्थ रहा वहां पूरी ईमानदारी व जिम्मेदारी के साथ किया। हमेशा सेवाभाव से काम किया। जहां जहां पदस्थ रहा वहां उद्योग व व्यापार के लिए कुछ नया काम किया ताकि लोगो को याद रहे कि कोई अधिकारी था जो हमारे हित मे नया काम किया था। जिससे उस क्षेत्र का विकास हो सके। दुर्ग में भी जब से पदस्थ हुआं यहां की नई बिल्डिंग के लिए लगातार उच्च अधिकारियों से सम्पर्क में रहा और उनके संज्ञान में ला-ला कर आज जिला एवं व्यापार उद्योग केन्द्र दुर्ग की नई बिल्डिंग नवनिर्मित हो रही है।मैं जहां-जहां पदस्थ रहा वहां के उच्च अधिकारियों ने मेरे निष्ठापूर्ण कार्य को हमेशा सराहा। जनता, उद्योगपति और उच्च अधिकारियों से भी मेरे मधुर व्यवहार रहे और उन्होंने हमेशा मेरी प्रशंसा की। विपरित परिस्थितियों में भी मैंने बेहतर काम करके दिखाया। 35 वर्षों तक सेवा देने के बाद मैं रिटायर्ड हो रहा हूं लेकिन उद्योग से संबंधित मार्गदर्शन और समाजसेवा हमेशा करते रहूंगा।









