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33 महीने में बनकर तैयार हो गया काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, आज पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण, जाने इसकी खासियत और 10 अनोखी बातें

जिस काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का आज पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण, उसकी क्या हैं खासियतें…

नईदिल्ली (ए)। यूपी के वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण के लिए आज पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में रहेंगे. पीएम की इस ड्रीम प्रोजेक्ट से वाराणसी में टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. मिली जानकारी के अनुसार आज पीएम मोदी अपनी इस महत्वकांक्षी योजना का लोकार्पण आचार्यों द्वारा तय किए शुभ मुहूर्त पर करेंगे. आइए जानते है काशी कॉरिडोर की खासियतें।

बीते 241 सालों के ​इतिहास में काशी विश्वनाथ मंदिर का तीसरी बार रेनोवेट किया गया है. इस पवित्र मंदिर को मुगलों ने कई बार नेस्तनाबूद करने की कोशिश की थी. मुगलों द्वारा किए गए हमलों ने काशी विश्वनाथ मंदिर को काफी क्षति पहुंचाई है. सबसे पहले इस मंदिर को सन् 1780 में महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा रेनोवेट करवाया गया था. इसके बाद सन् 1853 में महाराजा रणजीत सिंह इस मंदिर के कई स्थानों पर स्वर्ण जड़वाए थे. इसके बाद साल 2019 में पीएम मोदी की परियोजना के तहत इस मंदिर में भव्य कॉरिडोर का निर्माण कार्य शुरू हुआ।

दो भागों में बांटा गया है कॉरिडोर:- बता दें कि ये कॉरिडोर दो भागों में बांटा गया है. मुख्य परिसर को बनाने में लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है. कॉरिडोर में चार बड़े-बड़े गेट है जिसके चारो तरफ प्रदक्षिणा पथ बना है. इस पथ पर संगमरमर के 22 शिलालेख लगाए गए हैं, इनमें आदि शंकराचार्य की स्तुतियां, अन्नपूर्णा स्त्रोत, काशी विश्वानाथ की स्तुतियां और भगवान शंकर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों का उल्लेख किया गया है।

काशी विश्वनाथ गलियारे के एंट्री गेट की संरचनाएं पारंपरिक शिल्प कौशल का उपयोग कर बनाई गई है जो हमारी संस्कृति और इतिहास को दर्शाता है. काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट की माने तो इस मंदिर को ‘स्वर्ण मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है।

भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी आज आध्यात्म का एक नया अध्याय लिखने जा रही है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण करने बनारस की धरती पर आ रहे हैं. काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के अवसर पर 14 दिसंबर तक प्रदेश के लोग दीपक जलाकर अपने घरों में भगवान शिव का आह्वान करेंगे. आइए इस मौके पर जानते हैं काशी विश्वनाथ के बारे में ये 10 अनोखी बातें…

  1. बारह ज्योतिर्लिंगों में एक काशी विश्वनाथ मंदिर के स्पर्श मात्र से राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है. ऐसी मान्यता है कि एक बार मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
  2. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दो हिस्सों में बंटा हुआ है. दाहिने भाग में शक्ति के रूप में मां दुर्गा विराजमान हैं, तो दूसरी ओर भगवान शिव वाम रूप रूप में विराजमान हैं. यही कारण है कि काशी को मुक्ति का एकमात्र धाम कहा जाता है.
  3. जब मुर्तियों का श्रृंगार किया जाता है उस समय सारी मूर्तियां पश्चिम मुखी होती हैं. इस ज्योतिर्लिंग में शिव और शक्ति दोनों साथ ही विराजते हैं, ऐसा चमत्कार दुनिया में सिर्फ काशी में ही देखने को मिला है, और कहीं नहीं
  4. विश्वनाथ दरबार में गर्भ गृह का शिखर है. इसमें ऊपर की ओर गुंबद श्री यंत्र से मंडित है. तांत्रिक सिद्धि के लिए ये एक श्रेष्ठ स्थान है. इसे श्री यंत्र-तंत्र साधना के लिए उत्तम माना जाता है.
  5. बाबा विश्वनाथ के दरबार में तंत्र की दृष्टि से चार मुख्य द्वार हैं- पहला शांति द्वार, दूसरा कला द्वार, तीसरा प्रतिष्ठा द्वार, और चौथा निवृत्ति द्वार है. इन चारों द्वारों का तंत्र में अहम स्थान है. काशी के अलावा ऐसी कोई जगह नहीं, जहां शिवशक्ति एक साथ विराजमान हों और साथ में तंत्र द्वार भी मौजूद हो.
  6. बाबा विश्वनाथ काशी में गुरु और राजा के रूप में विराजमान हैं. दिनभर गुरु रूप में भोलेनाथ काशी में भ्रमण करते हैं. रात नौ बजे जब बाबा का श्रृंगार और आरती की जाती है तो वह राज वेश में होते हैं. यही कारण है कि शिव को राजराजेश्वर के नाम से भी जाना जाता है.
  7. काशी विश्वनाथ मंदिर के ऊपर एक सोने का छत्र लगा हुआ है. ऐसा मान्यता है कि इस छत्र के दर्शन से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और घर में सुख समृद्धि आती है.
  8. गंगा किनारे स्थापित इस मंदिर की स्थापना 1490 में हुई थी. ऐसी पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव गंगा के किनारे इस नगरी में निवास करते हैं. उनके त्रिशूल की नोक पर काशी बसी है.
  9. काशी विश्वनाथ मंदिर दुनिया के प्रसिद्ध हिन्दू मंदिरों में से एक है और इस मंदिर की मुख्य मूर्ति को विश्वनाथ नाम दिया गया है, जिसका अर्थ ब्रह्माण्ड के शासक होता है.
  10. ऐसी मान्यता है कि जब औरंगजेब इस मंदिर को ध्वस्त करने आया था, तब मंदिर में मौजूद लोगों ने यहां के शिवलिंग की रक्षा करने के लिए उसे मंदिर के पास ही बने एक कुएं में छिपा दिया था. वह कुआं आज भी मंदिर के आस-पास ही कहीं मौजूद है.

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