वर्ष 1992 में उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी कि जब भी भगवान राम का भव्य और दिव्य राम मंदिर बनेगा, तब वह अपनी चोटी में राम रथ बांधकर पैदल ही अयोध्या जाएंगे। की गई प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए वह अयोध्या जा रहे हैं…
दमोह (ए)। साल 1992 में की गई अनोखी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश के जनपद दमोह के बटियागढ़ गांव के संत सिर की चोटी से राम रथ खींचते अयोध्या के लिए पैदल निकल पड़े हैं। 170 किमी की दूरी तय कर संत बद्री बाबा रविवार को महोबा पहुंचे। जहां हिंदू संगठनों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। शहर के बजरं चौक स्थित हनुमान मंदिर में रथ लेकर जा रहे संत ने पूजा-अर्चना की।
प्रतिदिन दाल-रोटी खाकर चलते 50 से 55 किमी
चोटी में रथ बांधकर अयोध्या जा रहे बद्री बाबा मध्यप्रदेश के बटियागढ़ गांव में स्थित हनुमान मंदिर में रहकर पूजा-अर्चना करते हैं। वह बचपन से ही गुरु के सानिध्य में मंदिर की कुटिया में रहते हैं। सिर की चोटी से राम रथ बांधकर वह प्रतिदिन 50 से 55 किमी का सफर तय कर रहे हैं। दिन में एक बार वह सादा भोजन में दाल-रोटी खाकर चल रहे हैं। उनका कहना है कि 500 साल बाद रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। इससे अच्छा पल और कुछ नहीं हो सकता।
चोटी में रथ बांधकर अयोध्या जा रहे बद्री बाबा मध्यप्रदेश के बटियागढ़ गांव में स्थित हनुमान मंदिर में रहकर पूजा-अर्चना करते हैं। वह बचपन से ही गुरु के सानिध्य में मंदिर की कुटिया में रहते हैं। सिर की चोटी से राम रथ बांधकर वह प्रतिदिन 50 से 55 किमी का सफर तय कर रहे हैं। दिन में एक बार वह सादा भोजन में दाल-रोटी खाकर चल रहे हैं। उनका कहना है कि 500 साल बाद रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। इससे अच्छा पल और कुछ नहीं हो सकता।















