गणेश चतुर्थी, हिंदू धर्म के सबसे खुशहाल त्योहारों में से एक हैं. इस साल गणेशोत्सव 27 अगस्त से शुरू होकर पूरे दस दिनों तक मनाया जाएगा. ये त्योहार विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता भगवान गणेश के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है. त्योहार की शुरुआत घरों और पंडालों में गणपति की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने से होती है…
नईदिल्ली (ए)। वैसे तो रोजाना ही भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन भादों माह प्रभु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था, जिसकी खुशी में देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दौरान भक्तजन घरों, दफ्तरों, दुकानों और मंदिरों में गणपति जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक उनकी विधिनुसार उपासना करते हैं। इसके अलावा प्रभु की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए मोदक, मोतीचूर लड्डू, खीर और मालपुआ जैस भोग लगाए जाते हैं, जिसे बेहद शुभ माना जाता है। इस वर्ष 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। इस दिन गणपति जी की मूर्ति की स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, आइए विस्तार से जानते हैं।
गणेश चतुर्थी तिथि 2025: इस बार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर होगा। इसका समापन 27 अगस्त की दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर हो रहा है। उदया तिथि के मुताबिक गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा।
गणेशोत्सव के दौरान गणपति बप्पा को चढ़ाए जाने वाले कुछ खास भोग
मोतीचूर के लड्डू: सुनहरे-सुनहरे दिखने वाले मोतीचूर के लड्डू गणेश जी की पसंदीदा मिठाइयों में से एक हैं. चीनी की चाशनी में डूबे बेसन के छोटे-छोटे दानों से बने ये गोल-गोल लड्डू खुशी, संपूर्णता और समृद्धि का प्रतीक हैं।
पायसम: पायसम एक मशहूर साउथ इंडियन मिठाई है जो दूध, चावल और गुड़ या चीनी से बनाई जाती है. इसमें इलायची और ढेर सारे ड्राई फ्रूट्स डालकर इसका स्वाद बढ़ाया जाता है।
केले का शीरा: ये व्यंजन सूजी, पके केले, दूध और ड्राई फ्रूट्स से बनाया जाता है. केले का शीरा अक्सर मंदिरों में प्रसाद के रूप में भी परोसा जाता है. इसका सिंपल लेकिन भरपूर स्वाद इसे गणेशोत्सव के लिए भोग के रूप में खास बनाता है।
नारियल के चावल: इस व्यंजन में चावल को नारियल के दूध में पकाया जाता है और हल्के मसालों के साथ परोसा जाता है. नारियल के चावल अपनी शुद्धता और सुगंध के लिए जाना जाता है. साउथ इंडियन रीति-रिवाजों में इसे शुभ माना जाता है और ये भगवान गणेश को अर्पित किया जाने वाला एक अद्भुत प्रसाद है।
रवा पोंगल: रवा पोंगल भी गणेश चतुर्थी के पर्व पर भोग के रूप में बनाया जाता है. ये सूजी, मूंग दाल, घी और काजू से बना एक हल्का, मसालेदार व्यंजन है।
















