पटना (ए)। बिहार के कटिहार के रहने वाले शुभम कुमार ने संघ लोक सेवा आोयग (यूपीएससी) की सिविल सर्विसेज परीक्षा 2020 में टॉप रैंक हासिल किया है। इससे पहले बिहार के आलोक रंजन झा ने वर्ष 2001 में यूपीएससी में टॉप किया था। जागृति अवस्थी और अंकिता जैन ने क्रमश: दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया है।
इस बार बिहार के काफी छात्रों ने टॉप रैंक में अपनी जगह बनाई है। जमुई जिले के प्रवीण कुमार को 7 वीं, समस्तीपुर के सत्यम गांधी को 10वीं रैंक, किशनगंज के अनिल बसाक को 45 वीं, पूर्णियां के आशीष मिश्रा को 52 वीं रैंक मिली है। शुभम, प्रवीण, अनिल और आशीष चारों आईआईटियन हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुभम की इस शानदार सफलता पर ट्वीट करकेबधाई दी है।
यूपीएससी टॉपर शुभम कटिहार जिले के कदवा प्रखंड के कुम्हरी गांव के रहने वाले हैं। कदवा से पूर्णिया के विद्या विहार स्कूल और बाद में आईआईटी कंपीट कर पुणे में उन्होंने आईएएस की तैयारी की। उनके पिता देवानंद सिंह पूर्णिया में उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में शाखा प्रबंधक हैं। पिछले वर्ष भी शुभम ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन उन्हें 290 रैंक मिली थी। इससे वह संतुष्ट नहीं हुए और दोबारा परीक्षा में शामिल होकर सर्वोच्च स्थान हासिल कर बिहार का नाम देश भर में रोशन किया।
मध्य प्रदेश कैडर चाहते हैं शुभम
रिजल्ट आने के बाद शुभम ने कहा कि पिछले कुछ सालों में बिहार में काफी बदलाव हुए हैं। हर क्षेत्र में काम हो रहा है, लेकिन मेरी पहली पंसद मध्य प्रदेश कैडर है। शुभम के पिता देवानंद सिंह ने कहा कि जब मैं बैंक से ड्यूटी कर सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था, उसी दौरान उसका फोन आया। शुभम ने कहा-मैंने यूपीएससी टॉप किया है तो मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ। मैंने दुबारा पूछा- कौन सा रैंक है तो उसने कहा कि मैंने टॉप किया है। यह सुन मैं भावुक हो गया, उधर फोन पर शुभम भी रुआंसा हो गया। शुभम के दादा-दादी की ख्वाहिश आज पूरी हुई है। शुभम ने दिन-रात मेहनत की है। मैंने उसे इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए अपना सबकुछ झोंक दिया। आज उसी का यह परिणाम है।
उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के रीजनल मैनेजर रामनाथ मिश्रा बताते हैं कि शुभम आईआईटी उत्तीर्ण होने के बाद आईएएस की तैयारी शुरू की थी। देवानंद सिंह ने कहा कि शुभम की कड़ी मेहनत ने उसे सफल बनाया है। उन्होंने कहा कि टॉपर बनना निश्चित रूप से गौरव की बात है। शुभम की मां पूनम देवी गृहिणी हैं। रिजल्ट आने के बाद से उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
19 साल बाद बिहार से टॉपर
इससे पहले वर्ष 2001 में आलोक रंजन झा टॉपर बने थे, जबकि 1997 में गया के सुनील कुमार बरनवाल ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया था। 1987 में आमिर सुबहानी ने टॉप किया था, जो अभी बिहार के विकास आयुक्त हैं। अभी तक बिहार के चार मेधावियों ने यूपीएससी में शीर्ष स्थान हासिल किया है। बता दें कि सिविल सर्विसेज परीक्षाओं का आयोजन प्रति वर्ष यूपीएससी तीन चरणों में करता है, जिनमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार शामिल हैं। इन परीक्षाओं के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) सहित कई अन्य सेवाओं के लिए उम्मीदवारों का चयन होता है।
चकाई के प्रवीण को सातवां रैंक
यूपीएससी में सातवीं रैंक लाने वाले प्रवीण कुमार जमुई जिले के चकाई के रहने वाले हैं। आईआईटी कानपुर से पासआउट प्रवीण 2018 में भारतीय रेल सेवा के लिए चुने गए थे। अभी वडोदरा में उनकी ट्रेनिंग चल रही है। प्रवीण ने हिन्दुस्तान से कहा, “समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहता था। जमीनी स्तर पर जाकर बेहतर काम करने के लिए आईएएस बनने की ख्वाहिश थी। यही वजह रही कि सिविल सेवा में आने के लिए मेहनत की। किस्मत अच्छी रही कि रैंकिंग भी शानदार आ गयी। संतुष्टि है कि मेहनत को किस्मत का साथ मिला।”
प्रवीण के पिता सीताराम वर्णवाल दवा की दुकान चलाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रवीण बचपन से मेधावी थी। जसीडीह के रामकृष्ण मिशन से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। मैट्रिक और इंटर सीबीएसई से करने के बाद आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की। सिविल सेवा में दूसरे प्रयास में सफलता मिली है। प्रवीण की सफलता से मां वीणा वर्णवाल, बड़े भाई धनंजय वर्णवाल, बहन दीक्षा वर्णवाल, चाचा रामेश्वर लाल वर्णवाल गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
आर्थिक दुश्वारियों को मात दे सफल हुए अनिल
किशनगंज शहर के नेपालगढ़ कॉलोनी निवासी अनिल बसाक को 45वीं रैंक मिली है। अनिल का यह तीसरा प्रयास था। दूसरे प्रयास में 616वीं रैंक मिली थी। अनिल के पिता बिनोद बसाक कपड़े की फेरी लगाकर गांव-गांव बेचते थे। अनिल चार भाइयों में दूसरे नंबर पर हैं। अनिल के पिता की माली हालत ऐसी नहीं थी कि वे देश के प्रतिष्ठित यूपीएससी जैसे परीक्षा में शामिल होते। आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद भी अनिल बसाक ने हार नहीं मानी।
अनिल बसाक ने बताया कि उनके पिता, सुभाष वर्मा सर व जयशंकर सर ने यूपीएससी की तैयारी के लिए प्रेरित किया। अनिल ने आठवीं तक की पढ़ाई किशनगंज शहर के ओरियेंटल पब्लिक स्कूल से, वर्ष 2011 में अररिया पब्लिक स्कूल से मैट्रिक, 12वीं बाल मंदिर सीनियर सेकेंड्री स्कूल किशनगंज से पूरी की। अनिल ने दूरभाष पर बताया कि वे दूसरे प्रयास में सफल हुए थे, लेकिन और भी बेहतर रैंक के लिए उन्होंने इस वर्ष भी प्रयास किया और सफल हुए। सच्ची लगन व ईमानदारी से किये गये प्रयास से हर हाल में सफलता मिलती है।
आशीष को दूसरे प्रयास में मिली सफलता
52 वें स्थान पर रहने वाले आशीष कुमार मिश्रा ने यूपीएससी की परीक्षा में दूसरी बार में सफलता हासिल की है। पहले प्रयास में इंटरव्यू के बाद उनका सिलेक्शन नहीं हुआ था। आशीष कुमार मिश्रा ने डॉन बॉस्को स्कूल के बाद ब्राइट कैरियर और उसके बाद मिल्लिया कान्वेंट से 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद बीएचयू से आईआईटी की डिग्री हासिल की है। आशीष कुमार मिश्रा की सफलता की खबर मिलते ही उनके परिजनों के साथ साथ आसपास के मोहल्ले में भी खुशी की लहर छा गई है। सभी लोग आशीष की पढ़ाई के प्रति लगनशीलता की प्रशंसा कर रहे हैं।















