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02 IPS अधिकारियो पर बड़ी कार्यवाही: भ्रष्टाचार के आरोप में सरकार ने किया सस्पेंड; किए गए कई आईपीएस के तबादले

 

2 आईपीएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, निलंबित होने वाले अधिकारियों में पूर्णिया एसपी दयाशंकर और आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार शामिल हैं। इन गंभीर आरोपों के चलते कार्रवाई हुई है…

पटना (ए)। भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्णिया के एसपी रहे दयाशंकर और आईपीएस आदित्य कुमार के निलंबन के बाद पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया गया है । राज्य में तैनात 13 आईपीएस पदाधिकारियों को इधर-से-उधर किया गया है या अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसका नोटिफिकेशन जारी हो गया है।सरकार के अवर सचिव गिरीश मोहन ठाकुर के हस्ताक्षर से जारी पत्र के अनुसार 2012 बैच के IPS ऑफिसर आमीर जावेद को पूर्णिया का एसपी बनाया गया है। आमीर जावेद जमालपुर के रेल एसपी थे। रेल एसपी कटिहार, संजय भारती, 2014 आईपीएस को जमालपुर रेल एसपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

इसके अलावा वैशाली के एएसपी शुभांक मिश्रा, 2019 आईपीएस को एसडीपीओ फारबिसगंज-अररिया बनाया गया है। रोहतास के एएसपी के रामदास, 2019 बैच आईपीएस को एसडीपीओ शेरघाटी, गया बनाया गया है। एएसपी गया स्वीटी सहरावत, आईपीएस 2020 बैच को एसडीपीओ सदर औरंगाबाद, एएसपी मुजफ्फरपुर सरथ आरएस, 2020 बैच आईपीएस को एसडीपीओ चकिया- मोतिहारी, एएसपी दरभंगा विक्रम सिहाग, आईपीएस 2020 को एसडीपीओ रजौली- नवादा बनाया गया है।

आईजी स्तर के कई पदाधिकारियों का भी तबादला हुआ है। कुछ को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। सहायक आईजी (क्यू) पटना, निलेश कुमार को विशेष सशस्त्र पुलिस-5, BSAP-5 का समादेष्टा बनाया गया है। गया के आईजी विनय कुमार, आईपीएस 2004 को आईजी मुख्यालय बनाया गया है। उन्हें आईजी विशेष ससस्त्र पुलिस का अतिरिक्त दिया गया है।

विशेष सचिव, गृह विभाग, विकास वैभव, आईपीएस 2003 को आईजी सह अपर समादेष्टा गृह रक्षा वाहिनी और अग्निशमन सेवा बनाया गया है। आईजी मुख्यालय गणेश कुमार, 2000 बैच को आईजी तकनीकी सेवाएं एवं वायरलेस बनाया गया है। उन्हें आईजी आधुनिकीकरण का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। केएस अनुपम, आईपीएस 1998 को आईजी आधुनिकीकरण से हटाकर गृह विभाग का विशेष सचिव बनाया गया है। इसके अलावा आईजी विशेष सशस्त्र पुलिस एमआर नायक आईपीएस 1998 को मगध क्षेत्र का आईजी बनाया गया है।

आय से अधिक संपत्ति का आरोप: 2014 बैच के आईपीएसअ अधिकारी पूर्णिया एसपी दयाशंकर पर भ्रष्टाचार का आरोप हैं। आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से संपत्तियां अर्जित की। शुरूआती जांच में एसपी दयाशंकर के पास उनकी घोषित आय से 71 लाख रुपये ज्यादा पाए गए। एसपी दयाशंकर पर आरोप है कि उन्होंने जूनियर पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर अवैध वसूली की। 11 अक्टूबर को दयाशंकर के साथ-साथ सदर थानाध्यक्ष संजय सिंह, एसपी के रीडर नीरज कुमार सिंह और सिपाही सावन कुमार के ठिकानों पर भी छापेमारी हुई।

शराब माफिया से सांठगांठ का आरोप: कार्रवाई की जद में आए दूसरे आईपीएस अधिकारी गया के पूर्व एसपी आदित्य कुमार के खिलाफ जालसाजी का आरोप है। आदित्य कुमार 2011 बैच के आइपीएस हैं। उनपर शराब माफिया से सांठ गांठ के आरोप में विभागीय कार्रवाई चल रही थी। आरोप है कि जांच से बचने के लिए अधिकारी आदित्य कुमार अपने दोस्त से डीजीपी को फोन करवाकर धमकी दिलवाई। आरोप है कि आदित्य कुमार का दोस्त अभिषेक अग्रवाल ने खुद को हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बताकर डीजीपी को कई बाक फोन किया। उसने डीजीपी बिहार एसके सिंघल को फोन कर आदित्य कुमार के खिलाफ चल रही डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी को रोकने का दवाब बनाया।

निलंबित रहने के दौरान दयाशंकर और आदित्य कुमार को आइजी केंद्रीय क्षेत्र मुख्यालय में रिपोर्टिंग करनी होगी। इस दौरान उन्हें गुजारा भत्ता दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक दोनों अधिकारियों को शो कॉज नोटिस यानी कारण बताओ नोटिस दिया देकर जवाब मांगा जाएगा और जवाब के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

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