दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। मैं शुरू से डॉक्टर बनना चाहता था इसलिए कक्षा बारहवीं में बायोलॉजी सब्जेक्ट लेकर पढ़ा और एक साल ड्रॉप कर पीएमटी की कोचिंग के लिए दुर्ग में आकर तैयारी किया। उसी वर्ष मेरी दीदी की शादी हुई और मेरे जीजाजी का वर्ष 2003 सीजीपीएससी में नायब तहसीलदार के पद पर चयन हुआ, जिसके बारे में जानकर मेरा रुझान पीएससी के तरफ हुआ और मैंने स्नातक करने का निर्णय किया। यह सब बातें छत्तीसगढ़ के वीवीआईपी जिला के एसडीओपी पाटन (अनुविभागीय अधिकारी पुलिस) के पद पर पदस्थ देवांश सिंह राठौर ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया…
एसडीओपी देवांश सिंह राठौर का जन्म बिचारपुर, लोरमी (जिला मुंगेली) में हुआ था। इनकी पहली और दूसरी कक्षा तक की शिक्षा शासकीय प्राथमिक विद्यालय, घुमका जिला राजनांदगांव में हुई थी। कक्षा तीसरी से आठवीं तक की शिक्षा इन्होंने ज्ञानोदय शिशु मंदिर सिमगा (अभी जिला बलौदा बाजार) उस समय जिला रायपुर में हुई थी। उस समय कक्षा आठवीं की परीक्षा बोर्ड परीक्षा हुआ करती थी, जिसमें इन्होंने पूरे ब्लॉक में टॉप किया था। कक्षा नवमीं से बारहवीं तक की शिक्षा इन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर, देवेंद्र नगर रायपुर से पूरी कर डॉक्टर बनने की इच्छा लिए हुए पीएमटी परीक्षा की तैयारी के लिए दुर्ग आए ,लेकिन इसी दौरान अपने जीजा जी के संपर्क में आने के कारण इनका रुझान पीएससी की तरफ हो गया।
पीएससी की परीक्षा में भाग लेने के लिए इन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए वर्ष 2010 में दुर्गा कॉलेज, रायपुर से बीए 77% अंक हासिल किये , जिसके लिए इन्हे गोल्ड मेडल से पुरस्कृत किया गया। इस दौरान दुर्गा महाविद्यालय में छात्र राजनीति से जुड़कर सचिव के पद पर भी रहे l वर्ष 2012 में इन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान प्राप्त कर एमए हिंदी में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया। इसी दौरान हिंदी से नेट और सेट भी क्लियर किए।
पढ़ाई के साथ साथ सीजी पीएसी की तैयारी शुरू की और वर्ष 2012 में व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षा में इनका चयन सहायक ग्रामीण विस्तार अधिकारी के पद पर हुआ। इनकी पोस्टिंग जनपद पंचायत, भाटापारा में हुई जहाँ इन्होंने वर्ष 2014 तक अपनी सेवाएं दी। इस पद पर रहते हुए इन्होंने पीएससी की तैयारी जारी रखी और ड्यूटी करते हुए रोजाना ट्रेन से बिलासपुर आकर कोचिंग भी की। वर्ष 2013 में सब इंस्पेक्टर की भर्ती में हिस्सा लिए और प्री और मेंस क्लीयर करने के बाद फिजिकल में रुक गए। इसी वर्ष एसएससी परीक्षा के जरिए पैरा मिलिट्री फोर्स के लिए इंटरव्यू कॉल आया पर ये वहाँ जॉब के लिए नहीं गए। पुनः व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षा में फूड इस्पेक्टर के लिए इनका चयन हुआ और इन्हे कांकेर में पोस्टिंग मिली। लेबर इंस्पेक्टर में इन्होंने टॉप करते हुए राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया जिसमें 2014 में इन्हें सुकमा में पोस्टिंग मिली। 2011 पीएससी का रिजल्ट 2014 में आया जिसमें को- आपरेटिव इंस्पेक्टर के पद पर इनका चयन हुआ और इन्हें कोंडागांव पोस्टिंग मिली।
वर्ष 2012 के पीएससी का रिजल्ट 2015 में आया और 71 वाँ रैंक होने के कारण इन्हें महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी का पद मिला, इन्होंने मई 2015 से फरवरी 2016 तक किरंदुल परियोजना में अपनी सेवाएं दी। किरंदुल परियोजना में पदस्थापना के दौरान “लक्ष्य कोचिंग” जो की कलेक्टर द्वारा आदिवासी और स्थानीय छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए चलाया जाता है, उसमें अपनी ड्यूटी के साथ साथ इन्होंने वहाँ के छात्रों को पढ़ाया और उस कोचिंग के करीब बीस छात्र शिक्षाकर्मी, पटवारी और पीएससी के पद पर चयनित हुए। इसी दौरान इनका चयन कमर्शियल टैक्स इंस्पेक्टर के पद पर हुआ, जहाँ इन्हें रायपुर सर्कल पोस्टिंग मिली। वर्ष 2013 पीएससी का रिजल्ट 2015 में आया और राज्य में 17वाँ रैंक आने से इन्हें उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) का पहला पद मिला।
वर्ष 2016 से 2017 तक चंदखुरी में ट्रेनिंग के बाद 2017 से 2018 तक प्रोबेशनर डीएसपी ट्रेनिंग जिला जांजगीर चांपा मिला और वहाँ इन्होंने शिवरीनारायण, डभरा और बलौदा थाना प्रभारी के पद पर अपनी सेवाएं दी। अक्टूबर 2018 में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इनकी पहली पोस्टिंग डीआरजी डीएसपी नक्सल अभियान, दंतेवाड़ा के पद पर हुई। यहां पदस्थ रहते हुए इन्होंने लोन वर्राटू (घर वापसी) अभियान के तहत करीब 100 से अधिक नक्सलियों को आत्म समर्पण कराने में अहम भूमिका निभाई, वहीं कई नक्सली आपरेशन में नक्सली मारे जिसमें 5 से 8 लाख रुपए तक के इनामी नक्सली शामिल थे। नक्सली क्षेत्र पोटाली, बोदली और चिकपाल के अंदरुनी क्षेत्रों में कैंप लगाने, जगरगुड़ा, कमारगुड़ा में सीआरपीएफ के साथ कैंप लगाए l वर्ष 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में इनका सराहनीय योगदान रहा।
वर्ष 2019 में इनका तबदला एसडीओपी किरुंदुल के पद पर हुआ, जहाँ अगस्त 2021 तक अपनी सेवाएं दी। बदलेम एडका ( बदलता मन) अभियान अंतर्गत धुर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान, शासकीय योजनाओं के बारे में सभी विभागों से समन्वय स्थापित कर ग्रामीणों को अवगत कराने एवं शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने में उल्लेखनीय योगदान रहा l कोरोना काल में आदिवासी ग्रामीणों को घर घर तक राशन पहुंचाने, घर में रहने की अपील करने तथा फ्लैग मार्च निकालकर लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। अगस्त 2021 में इन्हे सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए वीवीआईपी जिला और मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र पाटन का एसडीओपी पद पर पदस्थ किया। जिसे यह जिम्मेदारी के साथ निभा रहे हैं। “पुलिस जन चौपाल” के माध्यम से ग्रामीणों और पुलिस के मध्य समन्वय स्थापित करने एवं स्थानीय स्तर पर समस्या का निराकरण करने, ग्रामीणों को साइबर फ्रॉड, यातायात नियम , कानूनी ज्ञान के प्रति जागरूक करने एवं जनता की पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाने का एक सफल कार्यक्रम करवाया जा रहा है l
इन्हें चार बार (दो बार गणतंत्र दिवस और दो बार स्वतंत्रता दिवस) पर राजधानी में आयोजित परेड के परेड टवाइसी की जिम्मेदारी दी गई जिसे इन्होंने बखूबी निभाया l साथ ही पूर्व राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद जी के छत्तीसगढ़ आगमन पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देने की जिम्मेदारी दी गई। उपराष्ट्रपति बैंकैया नायडू जी के छत्तीसगढ़ आगमन पर भी इन्होंने ही गार्ड ऑफ ऑनर दिया। वर्ष 2018- 19 में माना, रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय शहीद दिवस परेड में कमांडर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इनके पिताजी शासकीय कॉलेज, कुरूद में इतिहास के प्रोफेसर हैं। माताजी गृहणी है। इनकी बड़ी बहन बिलासपुर में लेक्चरर हिंदी थीं, जीजा जी डिप्टी कलेक्टर हैं। बड़े भैया बिलासपुर में इंस्पेक्टर हैं l इनकी धर्मपत्नी उप पुलिस अधीक्षक आई यू सी ए डब्लू के पद पर दुर्ग में पदस्थ हैं l तथा इनका एक पुत्र 1 वर्ष का है।
मूवी देखने, हिस्टोरिकल प्लेस घूमने में विशेष रुचि रखने और स्वामी विवेकानंद व अपने पिताजी को अपना आदर्श मानने वाले एसडीओपी देवांश सिंह राठौर ने कार्य करने के उद्देश्य को लेकर कहा की कार्य करने का उद्देश्य अधिक से अधिक जनसेवा करना है ताकि जो भी फरियाद लेकर आएं वो निराश ना हो सके। जब लोगों की समस्या होती है तभी वो आकर मिलते हैं। मेरा प्रयास रहता है कि उन्हें समय सीमा में और नियमानुसार कार्यवाही कर सकूँ ताकि वो संतुष्ट हो सकें। मेरे कार्यालय से अगर कोई फरियादी हंसते हुए संतुष्ट होकर बाहर निकलता है तो उससे बड़ी कोई खुशी नहीं होती। उन्हें संतुष्ट करने के बाद एक अलग ही सुकून मिलता है।
जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहें हैं उनसे यही कहना चाहूंगा कि हार नहीं मानें , लगातार प्रयास करते रहें सफलता जरूर मिलेगी। हार से घबराएँ नहीं बल्कि हार से सीख लें और हार को जीत में बदलें। जीवन का लक्ष्य तय कर उस दिशा में सार्थक प्रयास करें।















