BREAKING

दुर्ग-भिलाईफीचर्डसाक्षात्कार

सुयोग्य महिला परिवार की शोभा तथा घर की लक्ष्मी है: ऋतु विश्वकर्मा

दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। महिला उस वृक्ष की भांति है जो विषम परिस्थितियों में भी खड़े रहते हुए राहगीरों को छाया प्रदान करता है। महिलाओ की कोमलता एवं सहनशिलता को कई बार उसकी निर्बलता मान लिया जाता है जबकि अब महिलाये अबला नही सबला है। वर्तमान समय मे महिलाएं एक सुयोग्य गृहणी होने के साथ-साथ खेल, राजनीति, न्याय, कानून, सेना आदि सभी क्षेत्रों में पुरुषों की सहायक है। आज की महिलाएं जागृत और सक्रिय हो गई है, वह अपने अंदर मौजूद प्रकृति शक्तियों को जानने लगी है। जिससे समाज मे महिलाओं की प्रतिष्ठा बढ़ने लगी है। सुयोग्य महिला परिवार की शोभा तथा घर की लक्ष्मी होती है। यह सब बातें पीएचडी अध्यनरत गृहणी ऋतु विश्वकर्मा ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक का सफर हमसे साझा किया।
ऋतु विश्वकर्मा की प्रारंभिक व हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा कोरबा में पूरी हुई है। इन्होंने सेठ मोहनलाल-हरगोविंददास विज्ञान एवं गृहविज्ञान महाविद्यालय, जबलपुर से बीएससी (बायोकेमिस्ट्री) में स्नातक तथा ऑर्गेनिक केमेस्ट्री में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया। इन्होंने शासकीय शिक्षा महाविद्यालय, रायपुर से बीएड तथा भारती महाविद्यालय, दुर्ग से एमएड की डिग्री हासिल किया। वर्तमान मे यह पीएचडी (शिक्षा संकाय) में अध्यनरत है। इनके पिता बालकृष्ण विश्वकर्मा (सेवा निवृत्त) मप्र विद्युत मंडल में कार्यपालन अभियंता के पद पर रहे। इनकी माता प्रभा विश्वकर्मा गृहणी है। इनके पति अतुल विश्वकर्मा प्रशासनिक अधिकारी है। इनका एक पुत्र प्रज्ञान्स विश्वकर्मा है।
पेंटिंग और मोटिवेशनल किताब पढ़ने में विशेष रुचि रखने वाली ऋतु विश्वकर्मा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानती है।
महिला दिवस पर इन्होंने कहा कि महिला दिवस पर पुरुषों से महिलाओं की तुलना की आवश्यकता ही क्यों,जब महिलाओ की अपरिमित शक्ति, शौर्य, साहस व कार्यकुशलता व पुरुषार्थ की परिचय वर्तमान 21वीं सदी को प्राप्त हो चुका है। वर्तमान युग मे महिलाओं की क्षमता व योग्यताओं के समग्र स्वरूप को खुले मस्तिष्क से स्वीकारा जाने लगा है।

Related Posts