भारतीय सिविल सेवा के प्रारंभिक परीक्षा मे बैठने वाले युवा साथियों के लिए कुछ टिप्स… आपके लिए उपयोगी हो सकते है…कुछ अगली कड़ी में भी
सरगुजा। 4 अक्टूबर को देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं (I.C.S) के लिए प्रवेश परीक्षा होने जा रही है।
भारतीय सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा मे बैठने वाले सभी युवा साथियों आप सबको अग्रिम शुभकामनाएं, आप सिविल सर्विस की पहली सीढ़ी पार करने के लिए कई महीनों से अथक परिश्रम कर रहे हैं, उसकी परीक्षा की घड़ी आ गई हैं। यह आपके ज्ञान ,धैर्य व आत्मविश्वास की भी परीक्षा है।बस कुछ बातें ध्यान में रखिएगा,आप सफल होंगे ही ।
“प्रारंभिक परीक्षा में लेशमात्र कोताही या किंचित मात्र कमज़ोरी भी आपके सपने को चकनाचूर कर सकती है।”
उठो,जागो और जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये तब तक रुको मत।
सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया में सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक माना जाता है।परीक्षा को पास करने के लिए, एक उम्मीदवार को उच्च प्रेरणा स्तर बनाए रखना होता है।
कोई भी व्यक्ति केवल खड़े रह कर और पानी को घूरकर नदी पार नहीं कर सकता। इसी तरह, कोई भी सिविल सेवा परीक्षा के सपने देख कर और सफलता की कहानियों को पढ़ने मात्र से ही इसे उत्तीर्ण नहीं कर सकता। व्यक्ति को कदम उठाना होगा और आगे बढ़ना होगा। आपको आलस्य को दूर करना होगा l
किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने के लिये गंभीर एवं विस्तृत अध्ययन के साथ ही महत्वपूर्ण है
परीक्षा के दौरान निर्धारित घंटों में आप क्या करते हैं,और कैसे करते हैं? अतः परीक्षा घंटों में बेहतर समय प्रबंधन, मानसिक एकाग्रता तथा उच्च दिमागी सक्रियता ,साथ ही प्रश्नों की प्रकृति को समझते हुए उन्हें समयानुसार ज़ल्दी हल करने का तरीका भी महत्त्वपूर्ण है।
वर्षों की जी-तोड़ मेहनत और अध्ययन के बावजूद बेहतर समय-प्रबंधन के अभाव में सारी मेहनत धाराशायी हो जाती है और वे परीक्षा में अपना सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन करने से चूक जाते हैं।
कितनी भी अच्छी तैयारी क्यों न कर लें,सफल तभी होंगे जब परीक्षा घंटों में औरों से बेहतर व विशिष्ट प्रदर्शन करेंगे।
परीक्षा के घंटों में आप अपनी एकाग्रता और आत्मविश्वास तभी कायम रख पाएंगे जब आप पहले से ही परीक्षा की रणनीति और परीक्षा के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों से परिचित होंगे-
निस्संदेह परीक्षा कक्ष में परीक्षा घंटों के लिये हर परीक्षार्थी की अपनी रणनीति होती है लेकिन अनुभव की कमी (नए परीक्षार्थी) एवं बार-बार गलती दोहराने की प्रवृत्ति (पुराने परीक्षार्थी) के चलते अधिकांश परीक्षार्थी अच्छी तैयारी के बावजूद परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।
कुछ बातें हैं जिनको अमल में लाने से आपके रणकौशल में इज़ाफा होने की पूरी संभावना है। आपको ज्ञात होना चाहिए कि परीक्षा में कितने प्रश्न पत्र हैं। कौनसा प्रश्नपत्र ज्यादा महत्त्वपूर्ण है? विगत वर्ष के कटऑफ क्या थे। आपको कम-से-कम कितने प्रश्न हल करने हैं? परीक्षा घंटे में क्या और कैसे करना है, इस पर ज़्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है।
पहली और सबसे ज़रूरी बात है परीक्षा अवधि में समय-प्रबंधन की। चूँकि ‘परीक्षा’ निश्चित समय-सीमा में अपने ज्ञान-कौशल के प्रदर्शन का ही दूसरा नाम है,इसलिये समय-प्रबंधन परीक्षा का अनिवार्य पहलू है।
आपको परीक्षा कक्ष में जाने से पूर्व ही यह देख लेना चाहिए की,प्रति प्रश्नों को हल करने के लिए आपके पास कितने सेकेंड का समय है एवं प्रश्न पत्र में पूछे जाने वाले प्रश्नों की जटिलता और गहराई कितनी है।
आपको प्रति प्रश्न प्रदत्त सेकेंड के अंदर ही विकल्पों के सही उत्तर को चुनकर, उसके लिये उत्तर-पत्रक में सही गोले को काला करना होता है। ऐसे में प्रश्न के गलत होने का खतरा तो होता ही है, साथ ही कठिन विकल्पों के कारण प्रश्नों को हल करने में ज़्यादा समय भी लगता है। इस कारण कई दफा छात्र पूरा पेपर तक नहीं पढ़ पाते हैं। इस चुनौती से निपटने का एक तरीका यह है कि सर्वप्रथम वही प्रश्न हल किये जाएँ जो आपकी ज्ञान की सीमा के दायरे में हों। जिन प्रश्नों के उत्तर पता न हों या जिन पर उधेड़बुन हो, उन्हें निशान लगाकर छोड़ देना चाहिये और अगर अंत में समय बचे तो उनका उत्तर देने की कोशिश करनी चाहिये, वरना उन्हें छोड़ देने में ही भलाई है।
दूसरा तरीका यह है कि आपको सभी प्रश्नों को हल करने का लालच छोड़कर अपने अधिकार क्षेत्र वाले प्रश्न मज़बूत पकड़ हो, उनसे संबंधित प्रश्नों पर ही फोकस करें। और समय बचने पर अन्य प्रश्नों पर ध्यान दिया जा सकता है।इस मामले में आपको यह सावधानी ज़रूर बरतनी चाहिये कि वे कम-से-कम इतने प्रश्नों का चुनाव अवश्य कर लें जिनसे सम्मिलित रूप से कटऑफ के दायरे में आ जाएँ। शेष कुछ प्रश्न छूट भी जाए तो बहुत परेशानी वाली बात नहीं है।आमतौर पर परीक्षा भवन में प्रवेश करने से पहले आप यह निश्चय ज़रूर कर ले कि आपको न्यूनतम या अधिकतम कितने प्रश्न हल करने हैं। इस सोच के पीछे प्रारंभिक परीक्षा के विगत वर्षों के कट-ऑफ आँकड़े तथा आगामी परीक्षा के संभावित कट-ऑफ का अनुमान शामिल होता है।अनुमान लगाने के लिए आपको विगत 5 वर्षों में प्रारंभिक परीक्षा की कट-ऑफ में काफी उतार-चढ़ाव देखने चाहिए और उस आधार पर एक राय बनानी चाहिए।
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