रायपुर (सारनाथ एक्सप्रेस)। मेरे पिता जी जबलपुर आर्डिनेंस फैक्ट्री में ऑडिटर के पद पर कार्यरत थे। मैं जहां पढ़ाई करता था वही पर छठवीं बटालियन थी, वहां पर अक्सर परेड हुआ करती थी,मेरे दोस्त के पिता जी पुलिस विभाग में थे तो मैं दोस्त के साथ बटालियन में जाया करता था। वहां जाकर मुझे पता चला कि पुलिस में भर्ती होने के लिए पढ़ाई के साथ साथ फिटनेस बहुत जरूरी है, शुरू से ही वर्दी पसंद थी। वही से प्रेरित होकर पुलिस विभाग में आया। यह सब बातें रायपुर ट्रैफिक डीएसपी सतीश ठाकुर ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।डीएसपी सतीश ठाकुर की प्रारंभिक शिक्षा व हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा केन्द्रीय विद्यालय, खमरिया, जबलपुर (मप्र) हुई थी। वर्ष 1997 में इन्होंने जीएस कॉलेज, जबलपुर से आट्र्स में स्नातक किया। वर्ष 1999 में इन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री जीएस कॉलेज, जबलपुर से उत्तीर्ण किया। वर्ष 2000 में इन्होंने रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से (खेल प्रशिक्षण) बीपीएड किया।

पढ़ाई के साथ ही इन्होंने सबइंस्पेक्टर की तैयारी शुरू कर दी थी। वर्ष 2000 में इनका चयन सूबेदार के पद पर हुआ। इन्होंने नौकरी ज्वाइन किया और सागर, इंदौर और भोपाल में ट्रेनिंग करने के पश्चात इनकी पहली पोस्टिंग वर्ष 2001 में बीजापुर में सूबेदार के पद पर हुई जहां इन्होंने वर्ष 2008 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2008 में इनका प्रमोशन हुआ और यह सूबेदार से रक्षित निरीक्षक (आरआई) बनाये गए। रक्षित निरीक्षक के पद पर इन्होंने वर्ष 2008 से 2011 तक कोरबा में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2011 में इनका तबादला कवर्धा रक्षित निरीक्षक के लिए हुआ जहां इन्होंने वर्ष 2016 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2016 में इनका प्रमोशन हुआ और यह रक्षित निरीक्षक से उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) बने। प्रमोशन के साथ ही इनका तबादला ट्रैफिक डीएसपी दुर्ग के लिए हुआ जहां इन्होंने वर्ष 2016 से जून 2018 तक अपनी सेवाएं दी। अगस्त 2018 से सरकार ने इन्हें राजधानी ट्रैफिक डीएसपी की जिम्मेदारी सौंपी है जिसे यह जिम्मेदारी के साथ निभा रहे है।

नक्सली क्षेत्र में पदस्थापना के दौरान इन्होंने कई लैंड माइंस बरामद किए,कई मुठभेड़ में शामिल हुए। ट्रैफिक डीएसपी सतीश ठाकुर ने ट्रैफिक में रहकर बहुत से अनोखे प्रयोग किये जो कि सफल रहा और इसकी सराहना राज्यभर में की गई। इन्होंने यातायात के नियमो के प्रति लोगो को जागरूक करने हेतु कई प्रयोग किये जिसमे यह खुद यमराज बनकर राजधानी के सड़को पर उतरे और वाहन चालकों को जागरूक किया। कोरोना काल मे ट्रैफिक के जवानों की सुरक्षा के लिए इन्होंने अभिनव प्रयोग करते हुए ट्रैफिक पुलिस द्वारा उपयोग किये जाने वाले प्लस्टिक के डंडे को ही सेनेटाइजर मशीन बना दिया जिससे कि ट्रैफिक जवान किसी के सम्पर्क में आने के बाद मौके पर ही अपने हाथ को सेनेटाइज कर सके। राजधानी की व्यस्त और तंग गलियों को सेनेटाइज करना एक बड़ा चैलेंज था जिसे ट्रैफिक डीएसपी ने अपने अनुभव प्रयोग से कबाड़ के चीजो से अपनी निगरानी में ड्रोन तैयार करवाया और उसमें पांच लीटर का सेनेटाइजर बॉक्स लगाया और राजधानी की सभी व्यस्त बाजारों, ऊंची मकानों और तंग गलियों को सेनेटाइज करवाया। इसकी प्रशंसा प्रदेशस्तर पर हुई थी। दुर्ग जिला में पदस्थ रहते हुए इन्होंने प्रदेश में पहली बार बॉडी वॉन कैमरा और कैशलेश ट्रांजेक्शन की शुरुआत की थी। दुर्ग जिले के सड़क दुर्घटनाओं के 5 साल के आंकड़े एकत्र कर उन स्थानों में इंजीनियरिंग सुधार के साथ लोगों को जागरुक कर यातायात दुर्घटना में 20 प्रतिशत की कमी लाई थी जो कि पूरे प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ था। रायपुर में पदस्थापना के बाद इन्होंने ट्रैफिक पर 2 किताब लिखी है जिसका नाम स्मार्ट सिटी स्मार्ट ट्रैफिक, यातायात निर्देशिका है।

ट्रैफिक डीएसपी सतीश ठाकुर ने बताया कि ट्रैफिक विभाग में पिछले 12 वर्षों से लगातार काम कर रहा हूं। मेरा यही प्रयास रहता है कि सड़क दुर्घटना में कमी लाया जाए ताकि किसी की जान न जाये। लोगो को जागरूक करता हु की दुर्घटना होने से क्या क्या नुकसान होता है। पुलिस विभाग में हमे 17-18 घंटे काम करना पड़ता है इसके लिए हमे खुद को और अपने स्टॉफ को मोटीवेट करता हूं। समय मिलने पर व्यायाम करने और अपने परिवार को समय देने के लिए सलाह देता हूं। लोगो को और स्टॉफ को भी नशा छोडऩे के लिए जागरूक करता हु जिससे कई लोगो ने नशा छोड़ दिया जिसका परिणाम यह हुआ कि उनके घर मे अब खुशी का माहौल है। अच्छी और स्मार्ट पुलिसिंग होगी तो लोगो मे पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ेगी, सभी को अनुशासन में रहना चाहिए। स्वयं का और अपने परिवार का ख्याल रखने के लिए स्टॉफ और लोगो को मोटिवेट करता हूँ। मैं खुद भी फिट रहने के लिए पिछले 25 वर्षों से नियमित व्यायाम करते आ रहा हूं। तबला बजाने और नियमित व्यायाम करने में विशेष रुचि रखने वाले डीएसपी सतीश ठाकुर अपने पिताजी को अपना आदर्श मानने है। इनके पिताजी खिलाड़ी भी रहे है और आज भी वह खेलते है तथा तबला बजाते हैं। उन्ही को देखकर यह प्रेरित हुए। इनके बड़े भाई भेल- भोपाल में पदस्त है तथा बहन डोंगरगांव में शिक्षा विभाग में एडीओ के पद पर पदस्त है। इन्हें शुरू से ही खेलों से लगाव रहा, इन्होंने स्कूल के दिनों पर कई पुरस्कार जीते। हैंडबॉल और पॉवर लिफ्टिंग में नेशनल खेल चुके है। डीएसपी सतीश ठाकुर ने कहा कि मेरा मानना है कि किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए लक्ष्य निर्धारित कर उसके लिए सार्थक प्रयास करना बेहद जरूरी है। लक्ष्य को हासिल करने में हमारे द्वारा लिया गया निर्णय भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारे द्वारा लिया गया निर्णय हमारे भविष्य के लिए मजबूत नींव के रूप में काम करता है।









