दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। मेरा जन्म ग्राम घठुला तहसील नगरी जिला धमतरी में हुआ था, जमीन के कागज पर नाम चढ़ाने के लिए मेरी दादी गांव से 80 किलोमीटर दूर धमतरी तहसीलदार के यहां जाती थी और वहां के तहसीलदार के काम को दादी देखती थी उनको लगता था कि तहसीलदार बहुत बड़ा अधिकारी है। मैं जब भी दादी के पैर छूकर आशीर्वाद लेता था तब दादी मुझे तहसीलदार बनने का आशीर्वाद देती और कहती थी कि मेरा नाती तहसीलदार बनेगा। दादी की वो बाते हमेशा मेरे दिमाग मे रहती थी कि प्रशासनिक क्षेत्र में जाना है। यह सब बातें दुर्ग डिप्टी कलेक्टर जागेश्वर कौशल ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही, इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
डिप्टी कलेक्टर जागेश्वर कौशल का ग्राम घठुला, तहसील नगरी, जिला धमतरी में हुआ था। इन्होंने ग्राम घठुला के शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक शाला से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की। कक्षा नवमीं से हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा इन्होंने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिहावा से पूर्ण करने के बाद स्नातक की डिग्री के लिए साइंस कॉलेज, रायपुर में दाखिला लिया और वर्ष 1998 में बीएससी बायोलॉजी में स्नातक की डिग्री ली। वर्ष 2000 में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण किया।
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इन्होंने पीएससी की तैयारी करने बिलासपुर गए और अपने कठिन परिश्रम और लगन के बदौलत अपने पहले ही प्रयास में छत्तीसगढ़ के प्रथम पीएससी परीक्षा में नायब तहसीलदार के लिए चयनित हुए। जागेश्वर कौशल की पहली पोस्टिंग बतौर नायब तहसीलदार वर्ष 2006 में जिला कांकेर तहसील चारामा में हुई थी, जहां इन्होंने 2012 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2013 की इनका तबादला रायपुर, खरोरा में नायब तहसीलदार के पद पर हुआ। वर्ष 2013 में इनकी पदोन्नति हुई और यह नायब तहसीलदार से तहसीलदार बने और अतिरिक्त तहसीलदार के पद पर खरोरा, धरसींवा और रायपुर में वर्ष 2017 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2017 में इनका तबादला दुर्ग जिला के धमधा तहसीलदार के पद पर हुई जहां पदस्थ रहते हुए इनका पुन: पदोन्नति हुई और यह तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर बने।
प्रमोशन के बाद जुलाई 2018 में इनका तबादला मुख्य निर्वाचन कार्यालय, रायपुर में सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर हुआ। तत्कालीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहू के मार्गदर्शन में इन्होंने लोकसभा और विधानसभा संबंधित कार्यो को किया। अगस्त 2019 में इनका तबादला संचालक, सम्पदा के पद पर हुआ जो कि छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के आधीन रहता है, जहां मार्च 2021 तक अपनी सेवाएं देने के बाद अप्रैल 2021 में इन्हें मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के गृह जिले में डिप्टी कलेक्टर की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है जिसे यह जिम्मेदारी के साथ निभा रहे है। दुर्ग में इन्हें सत्कार अधिकारी, राज्य शासन द्वारा अयोजित होने वाली परीक्षा का प्रभारी,वरिष्ठ लिपिक शाखा, सांख्यिकी लिपिक शाखा की अहम जिम्मेदारी दी गई है।
गाना गाने, क्रिकेट खिलने तथा सामाजिक कार्यो में विशेष रुचि रखने वाले डिप्टी कलेक्टर जागेश्वर कौशल ने बताया कि मेरे पिता जी सेवानिवृत्त प्रधान पाठक है। मैंने बचपन से ही पिताजी को गांव के लोगो की मदद करते देखा है, आज भी गांव के लोग पिताजी के पास आवेदन लिखवाने, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फार्म भरवाने और अन्य जानकारियां लेने आते है। यह सब देखकर पिताजी और दादी के सहयोग, प्रेरणा और आशीर्वाद से आज इस मुकाम पर पहुंचा हूँ, मेरे पिताजी ही मेरे आदर्श है।
अपने पद रहते हुए कार्य करने का उद्देश्य यही रहता है कि शासन ने हमे जो जिम्मेदारी दी है और पद के साथ जो दायित्व जुड़े है उसका निर्वहन पूरी ईमानदारी से करे ताकि उसका लाभ आम लोगो को मिल सके। पब्लिक को हमारे पद से बहुत आशाएं रहती है वो सोचते है कि यह अधिकारी हमारी समस्याओं को दूर करेगा। इसलिए उनकी समस्याओं को दूर करने की पूरी कोशिश करता हू, मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर होता है तब वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करता हूं। गांव के लोगो के साथ जुड़ कर काम करने में बहुत आनंद आता है। मेरा मानना है कि जब कोई राजस्व अधिकारी गांव में जाकर ग्रामीणों के बीच मे उनकी समस्याओं को सुनता है तो उनका निराकरण और बेहतर ढंग से करता है। गांव में जाने से ग्रामीणों से पता चलता है कि गांव के स्कूल, राशन दुकान से राशन, पानी आदि मूलभूत सुविधाएं मिल रही है कि नही, जिसके आधार पर और बेहतर कार्य किये जाते है जिससे कि ग्रामीणों को कोई दिक्कत ना हो सके। सकारात्मक सोच के साथ काम करने से सभी काम आसान हो जाते है। जब मैं चारामा में नायब तहसीलदार पदस्थ था तब गांव में जाकर ग्रामीणों के बीच बैठकर फौती नामांतरण, जमीन के कागज पर नाम चढ़ाना, बंटवारा आदि कार्य किया करता था।














