रायपुर। बहुत ही परेशानियों में रहकर पढ़ाई किये है। पगडंडियों से होकर 10 किलोमीटर आना फिर 10 किलोमीटर जाना पड़ता था। उस समय और कोई साधन नही था। इतनी परेशानियो के बाद भी मैंने हार नही मानी और लगातार मेहनत करते हुए आज इस मुकाम पर पहुंचा हु तो बड़ी खुशी होती है। यह सब बातें पुलिस अधीक्षक (रेल) जयराम ठाकुर ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया….
एसपी रेल जेआर ठाकुर मूलतः राजनांदगांव जिले से है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम ककईपार तहसील मोहला (राजनांदगांव) के शासकीय स्कूल में हुई थी। इन्होंने हाई स्कूल की परीक्षा गोटाटोला तहसील मोहला के शासकीय स्कूल से पूर्ण की। इन्होंने हायरसेकंडरी की परीक्षा शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मोहला से पूरी की। वर्ष 1985 में इन्होंने दिग्विजय कॉलेज राजनांदगांव से समाजशास्त्र में स्नातक तथा वर्ष 1987 में समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया। पढ़ाई पूर्ण करने के बाद पीएससी की तैयारी करने यह भोपाल गए। वही पर इन्हें सहायक प्राध्यापक की वेकैंसी की जानकारी मिली। इन्होंने फार्म भरा और वर्ष 1988 इनका चयन सहायक प्राध्यापक (समाजशास्त्र) कौन्नौद, देवास (मप्र) के लिए हुआ। इसी वर्ष इनका तबादला शासकीय डीके कॉलेज बलौदाबाजार (तब रायपुर जिला) के लिए हुआ। प्राध्यापक रहते हुए इन्होंने पीएससी की तैयारी जारी रखी और अपने पहले प्रयास में इंटरव्यू तक का सफर तय किया लेकिन इनका चयन नही हो पाया इन्होंने हार नही मानी और दूसरे प्रयास में वर्ष 1996 में डीएसपी के लिए चयनित हो गए। वर्ष 1998 का बैच मिला। सागर (मप्र) और जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिहोर (मप्र) में ट्रेनिंग करने के बाद वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद यह छत्तीसगढ़ आ गए।
इनकी पहली पोस्टिंग घोर नक्सली क्षेत्र बस्तर में जगदलपुर और कोंडागांव में हुई। यहां इन्होंने डेढ़ वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। इनका तबादला एसडीओपी कोंटा (सुकमा) के लिए हुआ जहा इन्होंने डेढ़ वर्ष तक अपनी सेवाएं दी।
वर्ष 2003 में इनको राजधानी में क्राइम डीएसपी और माना सीएसपी की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2004 में इन्हें दल्लीराजहरा (तब दुर्ग जिला) सीएसपी की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2006-08 तक इन्होंने अम्बिकापुर सीएसपी की जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2008-10 तक यह कोरबा सीएसपी रहे। वर्ष 2011 में इनका प्रमोशन कर इन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया। इन्होंने दूसरी बटालियन सकरी (बिलासपुर) में डिप्टी कमान्डेंट के पद अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2011-13 तक इन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जशपुर के पद पर अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2013-16 तक इन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बिलासपुर (ग्रामीण) के पद पर अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2016-18 तक इन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बालोद के पद अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2018 से मार्च 2019 तक इन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बलौदाबाजार के पद पर अपनी सेवाएं दी। मार्च 2019 से मार्च 2020 तक इन्होंने सत्रहवीं बटालियन कवर्धा में कमान्डेंट के पद पर अपनी सेवाएं देने के बाद सरकार ने इन्हें मार्च 2020 में पुलिस अधीक्षक (रेल) की अहम जिम्मेदारी सौंपी है जिन्हें यह जिम्मेदारी के साथ निभा रहे है।
एसपी (रेल) जेआर ठाकुर ने बताया कि जब मैं हॉस्टल में रहकर पढ़ता था तब वहां सीनियर आया करते थे और कार्यक्रमो में बुलाते थे उन सीनियर्स में से कोई टीचर, बैंक, सब-इंजीनियर, पीएससी की तैयारी करने वाले, जॉब वाले आते थे वही हमारा मार्गदर्शन करते थे हमे बताते थे कि कैसे तैयारी करना है बस वही से मैंने अपना लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ा। पीएससी की तैयारियों में जुट गया और आज यहां तक पहुंचा हूँ।
मैं अपना आदर्श अपने टीचर्स को मानता हूं जिन्होंने मुझे अच्छी शिक्षा दी। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. शैलेंद्र जाधव ने मुझे पीएससी की तैयारी के दौरान बड़ी मदद किया। माता-पिता का भी बहुत योगदान रहा।
स्पोर्ट्स और एग्रीकल्चर में मेरी विशेष रुचि रही है। काम करने का उद्देश्य यही रहता है कि जो भी शिकायत आये उस पर उचित कार्यवाही कर पीड़ित को संतुष्ट कर उन्हें न्याय दिलाना ही मुख्य उद्देश्य रहता है।
अभी तक के कार्यकाल के दौरान बड़ी बड़ी घटनाएं हुई जिसको मैंने वरिष्ठ अधिकारियो के मार्गदर्शन में शांतिपूर्ण ढंग से निपटारा किया। जिसमें कोंटा में पदस्थापना के दौरान नक्सली मुठभेड़, कोरबा सीएसपी पदस्थापना के दौरान चिमनी हादसा जिसमे करीब 40 लोग मारे गए थे जो कि मेरे लिए बड़ा चैलेंज था। सभी लोगो के सहयोग से शांतिपूर्ण ढंग से केस को संभाला लॉ एंड ऑर्डर की स्तिथि निर्मित नही हुई। यह एक बड़ी दुर्घटना थी।









