आश्विन मास की शुक्ल पक्ष नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. इस दिन भक्त मां दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी रूप की आराधना करते हैं और कन्या पूजन के साथ नवरात्र का पारण करते हैं…
नईदिल्ली (ए)। 01 अक्टूबर यानी आज शारदीय नवरात्र की महानवमी है और यह नवरात्र का आखिरी दिन है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. यह दिन अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है. भक्त इस दिन कन्या पूजन करके शारदीय नवरात्र का पारण करते हैं. तो चलिए जानते हैं कि आज शारदीय नवरात्र पर कितने से कितने बजे तक कन्या पूजन का मुहूर्त रहेगा और साथ ही हवन का मुहूर्त कितने बजे रहेगा।
आश्विन मास की नवमी तिथि की शुरुआत 30 अक्टूबर यानी कल शाम 6 बजकर 06 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 1 अक्टूबर यानी आज शाम 7 बजकर 01 मिनट पर होगा. महानवमी पर देवी दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी रूप की पूजा-अर्चना की जाती है।
महानवमी की पूजा के बाद हवन करना भी शुभ माना जाता है, जो आज सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 40 मिनट तक करने का सबसे अच्छा मौका मिलेगा. इस समय हवन और कन्या पूजन करने से विशेष लाभ मिलता है।
आश्विन मास की महानवमी का पहला कन्या पूजन मुहूर्त आज सुबह 5 बजकर 01 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. इसके बाद, दूसरा मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से लेकर 2 बजकर 57 मिनट पर रहेगा।
महानवमी पर कन्याओं को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें और उनका स्वागत करें. कन्याओं को आरामदायक स्थान पर बिठाकर उनके पैरों को दूध से धोएं और उनके माथे पर अक्षत, फूल या कुमकुम लगाएं. कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा और उपहार दें. कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और मां भगवती की कृपा प्राप्त करें।
मां सिद्धिदात्री की पूजा में घी का दीपक जलाएं और उन्हें फूल अर्पित करें. मां सिद्धिदात्री को विभिन्न भोग जैसे मिश्री, गुड़, हरी सौंफ, केला, दही, देसी घी और पान का पत्ता अर्पित करें. इसके बाद देवी मां से प्रार्थना करें कि वे सभी ग्रहों को शांत करें और सुख-शांति प्रदान करें।
महानवमी 2025 हवन का समय
महानवमी पर हवन सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 40 मिनट तक करने का सबसे अच्छा माना जाता है।
नवरात्रि में महा नवमी का दिन विशेष महत्व रखता है। यह नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन होता है, जिसे देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री को समर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवी सभी बुरी शक्तियों का नाश करती हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। महा नवमी पर हवन, शस्त्र पूजन और कन्या पूजन करने की परंपरा है, जो न केवल आध्यात्मिक पुण्य प्रदान करती है बल्कि घर में सुख, समृद्धि और शांति भी लाती है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे महा नवमी से जुड़े हर सवाल का जवाब देंगें, जैसे महा नवमी कब मनाई जाती है, इसका महत्व, पूजा विधि, मंत्र, भोग और शुभ मुहूर्त। आइए इस बारे में जानें-
महा नवमी कब मनाई जाती है?
महा नवमी नवरात्रि का नौवां दिन है और आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है। यह दिन हिंदू पंचांग के नौवें स्वरूप देवी दुर्गा, मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। महा नवमी को नवरात्रि के अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन के रूप में मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
महा नवमी का क्या महत्व है?
महा नवमी का गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन देवी दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा और हवन के लिए समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी सभी बुरी शक्तियों का नाश करती हैं और अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।
महा नवमी 2025 की तिथि और दिन क्या है?
2025 में, महा नवमी 30 सितंबर से शुरू होकर 1 अक्टूबर तक चलेगी। इस दिन, शुभ मुहूर्त में शाम 6:06 बजे पूजा और हवन शुरू हो जाते हैं।
महा नवमी किस देवी को समर्पित है?
महा नवमी देवी सिद्धिदात्री को समर्पित है। वे देवी दुर्गा के नौ शक्तिशाली रूपों में से एक हैं और सभी विपत्तियों और बुरी शक्तियों का नाश करने वाली मानी जाती हैं।
महा नवमी पर कौन सी पूजा की जाती है?
इस दिन, सुबह स्नान-ध्यान के बाद, देवी सिद्धिदात्री का हवन और पूजन किया जाता है। नौ कन्याओं का पूजन और उन्हें भोजन व दक्षिणा देना भी अनिवार्य है। पूजा के दौरान फल, नारियल, लाल फूल और दुपट्टा चढ़ाया जाता है।
महा नवमी और दुर्गा पूजा के बीच क्या संबंध है?
महा नवमी दुर्गा पूजा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। नवरात्रि के दौरान, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और महा नवमी पर हवन, पूजा और कन्या पूजन करने से नवरात्रि का पूरा पुण्य प्राप्त होता है।
महा नवमी पर कन्या पूजन क्यों किया जाता है?
कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। इसलिए, महा नवमी पर नौ कन्याओं का पूजन करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पूजा घर में सुख-शांति, समृद्धि और पति की दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।
महा नवमी पर कौन से मंत्रों का जाप किया जाता है?
हवन और पूजा में मंत्रों के जाप का विशेष महत्व है। महा नवमी पर जपे जाने वाले प्रमुख मंत्र हैं:
- ॐ देवी सिद्धिदात्र्ये नमः
- ॐ गणेशाय नमः स्वाहा
- नवग्रह मंत्र: ॐ राहवे नमः स्वाहा
- महाकालिका मंत्र: ॐ महाकालिकायै नमः स्वाहा
- हवन के दौरान हनुमान मंत्र और ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि के मंत्रों का जाप किया जाता है।
महा नवमी का विजयादशमी से क्या संबंध है?
विजयादशमी या दशहरा महा नवमी के अगले दिन मनाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। महा नवमी पर देवी की पूजा और हवन से बुराई का नाश होता है और विजयादशमी पर रावण यानी बुराई के विनाश का उत्सव मनाया जाता है।
महा नवमी पर क्या-क्या प्रसाद चढ़ाया जाता है?
देवी सिद्धिदात्री को फल, खीर, हलवा, पूरी, नारियल और मिठाई का विशेष भोग लगाया जाता है। भक्त फल, मीठे व्यंजन और मौसमी फल भी चढ़ा सकते हैं। श्रृंगार की वस्तुओं और फूलों का भी विशेष महत्व है।
महा नवमी पर शस्त्र पूजा क्यों की जाती है?
शस्त्र पूजा देवी दुर्गा की शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है। इस दिन शस्त्र पूजा करके बुरी शक्तियों पर विजय पाने और अपनी रक्षा करने का संकल्प लिया जाता है।
महा नवमी पर व्रत रखने के क्या नियम हैं?
भक्त सुबह से लेकर पूजा समाप्त होने तक निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं। यह व्रत अपने पति की दीर्घायु और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
महा नवमी किस देवी की शक्ति का प्रतीक है?
मां सिद्धिदात्री शक्ति, बल और बुरी शक्तियों का नाश करने वाली देवी का प्रतीक हैं। उनके स्वरूप में सभी प्रकार की विपत्तियों से रक्षा करने की शक्ति है।
महा नवमी का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
यह दिन भक्ति, धर्मपरायणता, आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक प्रगति का प्रतीक है। भक्त इस दिन अपने जीवन में मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए देवी की पूजा करते हैं।
महा नवमी पर कौन सी विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं?
- हवन और पूजा
- नौ कन्याओं का पूजन
- शस्त्र पूजन
- कलश स्थापना और विसर्जन
- दुर्गा चालीसा का पाठ
महा नवमी और रामायण के बीच क्या संबंध है?
रामायण में, देवी दुर्गा की पूजा करने से राम के कष्ट दूर हुए थे। इसी कारण, भक्त इस दिन देवी की पूजा करते हैं और मानते हैं कि उनका आशीर्वाद उनके कष्टों का निवारण करेगा।
महा नवमी पर कलश विसर्जन कब किया जाता है?
पूजा और हवन के बाद कलश विसर्जन किया जाता है। यह दिन के शुभ समय पर किया जाना चाहिए। यह शुद्धि और समृद्धि का प्रतीक है।
महा नवमी की पूजा के लिए किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
- पूजा के लिए आवश्यक सामग्री-
- फल, नारियल और लाल फूल
- दीपक और कलश
- पूजा के बर्तन और श्रृंगार सामग्री
- दुर्गा चालीसा और हवन सामग्री
महा नवमी का संदेश क्या है?
सत्य और धर्म की विजय, दुष्ट शक्तियों के विनाश और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने का संदेश।
महा नवमी और दशहरा में क्या अंतर है?
- महा नवमी: नवरात्रि का अंतिम दिन, देवी सिद्धिदात्री की पूजा और हवन का दिन।
- विजयादशमी/दशहरा: बुराई पर अच्छाई की विजय, रावण वध और दुष्ट शक्तियों के विनाश का उत्सव।
















