आज शारदीय नवरात्रि पहला दिन है. मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ है, जो उन्नतिदायक है. कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6 बजे से लेकर शाम तक है, लेकिन इसमें अभिजीत मुहूर्त विशेष है. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करते हैं. आइए जानते हैं नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना सहित सभी शुभ मुहूर्त…
नईदिल्ली (ए)। आज शारदीय नवरात्रि का पहला दिन है. आज 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ है. मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ है, जो लोगों की उन्नति और समृद्धि का प्रतीक है. मां दुर्गा अपने सभी भक्तों पर कृपा बरसाएंगी और उन्नति प्रदान करेंगी. शारदीय नवरात्रि आज से लेकर महा नवमी 1 अक्टूबर तक है. उसके बाद 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ इसका समापन होगा।
आज नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा का आह्वान करते हैं. उसके बाद मां शिलपुत्री की पूजा करते हैं. शैलपुत्री मां दुर्गा की पहली स्वरूप हैं. नवरात्रि का पहला दिन शुक्ल योग और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में पड़ा है।
शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होती है. प्रतिपदा तिथि आज सोमवार को प्रात:काल से लेकर रात 01:19 एएम तक है. वहीं उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र दिन में 11:25 ए एम तक है, उसके बाद हस्त नक्षत्र है. ‘मूलेन आवहेति देवि’ के आधार पर देखें तो आज मातारानी का आगमन गज यानि हाथी पर हुआ है।
कलश स्थापन मुहूर्त
आज कलश स्थापन के लिए मुहूर्त सुबह 06:00 बजे से शाम तक है. इस बीच में आप कभी भी कलश स्थापन कर सकते हैं. हालांकि कलश स्थापन के लिए विशेष मुहूर्त यानि अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:36 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक है।
आज कलशस्थापना के लिए कई विशेष मुहूर्त भी बताए गए हैं. जिसमें पहला मुहूर्त आज सुबह 6 बजकर 09 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 06 मिनट तक रहेगा और दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जिसकी शुरुआत सुबह 11 बजकर 49 मिनट से होगी और समापन दोपहर 12 बजकर 38 मिनट पर होगा।
कलशस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
शारदीय नवरात्र की कलशस्थापना के लिए कुछ विशेष और महत्वपूर्ण सामग्री बताई गई है. जिसमें विशेष है लकड़ी की चौकी, 7 प्रकार के अनाज, कलश, मिट्टी का बर्तन जिसमें मुंह हो, मिट्टी, गंगाजल, कलावा, सुपारी, लौंग, आम के पत्ते, अक्षत (साबुत चावल), नारियल, लाल कपड़ा और मां दुर्गा के पुष्प।
घटस्थापना के लिए सबसे पहले मिट्टी को एक चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और फिर उसमें धान बोएं. इसके बाद कलश में जल भरें और उसकी गर्दन में कलावा बांधें. कलश के जल में एक का सिक्का भी डालें. फिर, आम के पत्तों को कलश के ऊपर रखें और नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें. इसके बाद, नारियल पर भी कलावा लपेटें. फिर, जहां कलश स्थापना की गई है वहां अखंड दीप जलाएं और मां दुर्गा की उपासना करें।
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की ये रहेगी सवारी
हर बार नवरात्र में देवी अलग-अलग वाहन पर आती हैं, और उस वाहन के हिसाब से अगले छह महीने की स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है. इस बार मां दुर्गा हाथी पर विराजमान होंगी. हाथी धन, समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक होता है. हाथी बृहस्पति देव का वाहन है, जो ज्ञान और समृद्धि देता है।
इसलिए, इस बार अगर आप मां की पूजा करेंगे, तो आपको धन और ज्ञान दोनों की प्राप्ति होगी. यह आने वाला समय लोगों के लिए खुशहाली और समृद्धि लेकर आने वाला है. हाथी पर देवी का आगमन हमारे लिए बहुत शुभ है. इससे जीवन में धैर्य, आनंद और सुख-शांति बढ़ेगी।
शारदीय नवरात्रि पहले दिन के सभी मुहूर्त
1. ब्रह्म मुहूर्त: प्रात:काल 04:35 बजे से 05:22 बजे तक
2. अभिजीत मुहूर्त: 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
3. निशिता मुहूर्त: रात 11:50 बजे से 12:38 बजे तक
निशिता मुहूर्त में देवी की पूजा मंत्रों की सिद्ध्यिों के लिए करते हैं।
आज जाप के लिए मंत्र
आज आप पूजा के समय मां भगवती का ध्यान करें. उसके बाद जयंती मंगला काली भद्र काली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते का जप करें।
शारदीय नवरात्र का महत्व
दुनिया की सारी शक्ति महिलाएं या नारी रूप में ही है, इसलिए नवरात्र में देवी की पूजा होती है. देवी खुद ही शक्ति की मूरत हैं, इसलिए नवरात्र को शक्ति की नवरात्र भी कहते हैं. नवरात्र के नौ दिन नौ अलग-अलग रूपों में मां दुर्गा की पूजा होती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है. हर एक रूप से हमें अलग- अलग आशीर्वाद और वरदान मिलता है।
साथ ही जो ग्रहों की बाधाएं होती हैं, वे भी दूर होती हैं. साथ ही, नवरात्र के पहले दिन हम मां शैलपुत्री की पूजा करते हैं. शैलपुत्री का मतलब है पहाड़ की बेटी, जो हिमालय की पुत्री हैं. इन्हें पार्वती भी कहा जाता है. इनकी पूजा से अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही अगर जीवन में कोई सूर्य से जुड़ी परेशानी है तो वो भी दूर हो सकती है।
















