रविवार को आश्विन मास की पूर्णिमा यानि शरद पूर्णिमा है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब रहेगा। इसे रास पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था। इसी दिन मध्य रात में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करके भक्तों के दुख दूर करती हैं।
ज्योतिष के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अमृत की वर्षा करते हैं। श्रीमद् भागवत महापुराण में तो चंद्रमा को औषधि का देवता बताया गया है। चांद की रोशनी को भी स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी माना गया है, इसीलिए शरद पूर्णिमा की रात आसमान के नीचे चावल और दूध से बनी खीर रखी जाती है। इस रात चंद्रमा की किरणें खीर पर पड़ती हैं और औषधीय गुण प्राप्त होते हैं।
हिंदू पंचाग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस साल शरद पूर्णिमा रविवार को मनाई जा रही है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह महत्वपूर्ण तिथि है। ज्योतिषियों के अनुसार पूरे साल में से सिर्फ शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन आसमान से अमृत वर्षा होती है।
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजने की परंपरा चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन से सर्दियों की शुरुआत हो जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन चंद्रमा धरती के सबसे करीब होता है। चंद्रमा की दूधिया रोशनी धरती को नहलाती है। इन दूधिया रोशनी के बीच पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है।
शुभ मुहूर्त :
- पंचांग के अनुसार इस साल शरद पूर्णिमा तिथि शनिवार रात 3:31 बजे से शुरू होकर रविवार रात 2 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा। यह पूर्णिमा तिथि धनदायक पूर्णिमा मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन आकाश से अमृत वर्षा होती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इसी दिन से सर्दियों का आरंभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सबसे खास माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन चंद्र पूजा भी की जाती है।
पूजा -विधि-
- इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का बहुत अधिक महत्व होता है। आप नहाने के पानी में गंगा जल डालकर स्नान भी कर सकते हैं। नहाते समय सभी पावन नदियों का ध्यान कर लें।
- नहाने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
- अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
- सभी देवी- देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें।
- पूर्णिमा के पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना का विशेष महत्व होता है।
- इस दिन विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना भी करें।
- भगवान विष्णु को भोग लगाएं। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को भी शामिल करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
- इस पावन दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अधिक से अधिक ध्यान करें।
- पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व होता है।
- चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा की पूजा अवश्य करें।
- चंद्रमा को अर्घ्य देने से दोषों से मुक्ति मिलती है।
- इस दिन जरूरतमंद लोगों की मदद करें।
- अगर आपके घर के आसपास गाय है तो गाय को भोजन जरूर कराएं। गाय को भोजन कराने से कई तरह के दोषों से मुक्ति मिल जाती है।
साभार: हिंदुस्तान
















