भिलाई। “मेघ श्रंखला झर-झर आए, वन महोत्सव धरा मनाए”
इस वाक्य को चरित्रार्थ करने 08 जुलाई 2022 को ‘शकुन्तला विद्यालय के ‘हरित आभा’ प्रांगण में पर्यावरण महोत्सव मनाया गया। प्रार्थना सभा में गायत्रीमंत्र के पश्चात वनदेव को श्रद्धानमित होते हुए शीर्ष प्रभारी के साथ अन्य प्रभारीगण ने अष्टगंधा, अपराजिता, नीबू आदि औषधीय वृक्षों का रोपण किया।
तत्पश्चात मुख्य अतिथि शकुन्तला ग्रुप्स ऑफ स्कूल्स के
डायरेक्टर संजय ओझा और शाला प्राचार्य विपिन कुमार को ‘वृक्षपात्र’ अर्पित कर अभिनंदन किया गया। इसीक्रम में विद्यालय के प्रतिभाशाली छात्रों हर्ष साव, अंकित चौबे, मयंक ओझा, फिरदौस सदब को प्रतिस्पर्धा में उच्च स्थान प्राप्त करने के लिए ‘पौधे’ देकर सम्मानित किया गया।
शाला के विद्यालयों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसमें कौटिल तिवारी, रितिका यादव, राम और फातमा ने ‘रंग-रंग के देतु फल फूल, पेड़ काटकर करें न भूल’ का प्रेरणादायी संदेश दिया। छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों ने वन-प्रकृति की विविध पोशाकों से वनवाटिका प्रस्तुत की। उत्सव को सुरीला रूप कक्षा 3 से 8वी की छात्राओं के समूह गीत – हरी-हरी
वसुन्धरा से मिला। युग यादव और शिवानी भगत ने पर्यावरण सरंक्षण से जुड़ी अभिव्यक्ति दी।
अंशिका शुल्का ने कापल देवांगन ने भरतनाट्यम और ओडीसी
नृत्स भंगिमाओं से सभी का मनमोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम की पूर्णता के बाद गु्रप ऑफ स्कूल्स के डायरेक्टर संजय ओझा ने पर्यावरण महोत्सव की बधाई देते हुए इस उत्सव का महत्व समझाया । उन्होने कहा-‘बड़े करेगें जब यह काम, बच्चे देगें इस पर ध्यान’ इस चैत्सन्य श्रृंखला से सबको जोड़ा। साथ ही बच्चों में प्रकृति व पेड़ संरक्षण को प्रेरित करने हेतु पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार की घोषणा की।
वन संरक्षण के उत्सव में मुख्य अतिथि के साथ विद्यालय के एडवाइजर गजेन्द्र भोई, प्राचार्या आरती मेहरा (शकुन्तला विद्यालय क्र-2), मैनेजर ममता ओझा (शारदा विद्यालय रिसाली सेक्टर), उपप्राचार्या जी. रंजना कुमार, अनिता नायर, हेड मिस्ट्रेस अर्चना मेश्राम, सीनियर मिस्ट्रेस बलजीत कौर, प्रभारी एवं समस्त शिक्षक शिक्षिकायें भी वन महोत्सव में पौधो के रोपण में भागीदार बने।
छात्रा खुशबू राजपूत और साबिया ने मंच संचालन किया। आभार प्रदर्शन की भूमिका रजनी तिवारी ने निभाई। कक्षा 12वीं के अंकित चौबे ने प्रकृति संरक्षण के लिए शपथ ग्रहण कराई। राष्ट्रगान के साथ यह हरित उत्सव पूर्ण हुआ।















