दुर्ग। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के द्वारा प्रतिवर्ष बाल वैज्ञानिक तैयार करने हेतु देशभर में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। जिसका उद्देश्य देश के कोने कोने में जाकर विज्ञान प्रतिभाओं की खोज करना एवं बच्चों में वैज्ञानिक चेतना का अंकुरण कर उन्हें स्थानीय परिवेश में तार्किक वैज्ञानिक खोज की दिशा में आगे बढ़ाना है। छत्तीसगढ़ राज्य में यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के माध्यम से राज्य समन्वयक डॉ. जे .के. रॉय (साइंटिस्ट) के निर्देशन में प्रत्येक जिले में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। जिसके तहत विज्ञान शिक्षकों हेतु वर्कशॉप का आयोजन किया गया । इस कार्यशाला में विभिन्न शासकीय व अशासकीय विद्यालयों के 179 विज्ञान शिक्षक प्रशिक्षित हुए।
जिला शिक्षा अधिकारी अभय सिंह जायसवाल के अनुसार- विद्यार्थियों को बाल वैज्ञानिक के रूप में तैयार कर विश्व के मानव कल्याण हेतु उन्हें प्रेरित करना तथा उनमें वैज्ञानिक चेतना का अंकुरण कर उन्हें स्थानीय परिवेश में तार्किक वैज्ञानिक खोज की दिशा में आगे बढ़ाना इस अभिनव कार्यक्रम का एकमात्र उद्देश्य है।
जिला समन्वयक सपना सोनी के अनुसार- देश के लिए भावी वैज्ञानिक तैयार करने में विज्ञान शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विज्ञान शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थी अपने आस पास निहित समस्याओं का चुनाव कर वैज्ञानिक विधि के प्रयोग द्वारा समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं ।कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक चेतना जागृत कर बाल वैज्ञानिक का निर्माण करना है ।इस पर विद्यार्थी लघु शोध कार्य करते हैं, जिससे वे वैज्ञानिक विधि के प्रयोग से समाज में निहित समस्याओं के समाधान ढूंढते हैं।
इस कार्यक्रम में एक्सपर्ट रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ. कुसुमांजलि देशमुख, असिस्टेंट प्रोफेसर, भौतिक शास्त्र, वी. वाय. टी. शासकीय स्वशासी पोस्ट ग्रेजुएट महाविद्यालय ने विज्ञान शिक्षकों को अभिप्रेरित किया। उन्होंने जिले के विज्ञान शिक्षकों को विभिन्न सबथीम के तहत प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने हेतु आइडियाज दिया। डाटा कलेक्शन और इंटरप्रिटेशन हेतु विभिन्न टूल्स के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दिया। साथ ही उनके आइडियाज को मानक गाइडलाइंस के अनुरूप बेहतर प्रोजेक्ट विद्यार्थियों के माध्यम से प्रस्तुत करने हेतु अभिप्रेरित किया।
यह प्रतियोगिता दो वर्गों में आयोजित किया जाएगा
पहला जूनियर वर्ग (आयु सीमा 10 से 14 वर्ष) व दूसरा सीनियर वर्ग (आयु सीमा 14 से 17 वर्ष )आयु की गणना 31 दिसंबर 2023की स्थिति में किया जाता है। वर्ष 2023 के लिए इस प्रतियोगिता का मुख्य विषय है। स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पारितंत्र को समझना है।
उप विषय हैं- अपने पारितंत्र को जानना ; स्वास्थ्य ,पोषण और कल्याण को बढ़ावा देना; पारितंत्र और स्वास्थ्य के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक प्रथाएं; आत्मनिर्भरता के लिए पारितंत्र आधारित दृष्टिकोण; पारितंत्र और स्वास्थ्य के लिए तकनीकी नवाचार।
प्रोजेक्ट निर्माण में वैज्ञानिक विधि से समस्याओं के समाधान में वे इन चरणों का प्रयोग करेंगे- परियोजना, शीर्षक, प्रस्तावना, समस्या चुनने का कारण, परिकल्पना, उद्देश्य, कार्य योजना ,कार्य विधि, सर्वेक्षण /प्रयोग /अवलोकन, निष्कर्ष या परिणाम ,भविष्य की योजना।
जिला स्तरीय प्रतियोगिता माह अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन जिला शिक्षा अधिकारी अभय सिंह जायसवाल के मार्गदर्शन में किया गया साथ ही सहायक संचालक डॉक्टर बी.रघु, सीमा नायक, अमित घोष, विकास खंड शिक्षा अधिकारी गोविंद साव, विपिन, अजरा परवीन रिसोर्स पर्सन, चंचल टिकरिया, भारती बिष्ट, नवीन, अजय शर्मा, मीनाक्षी वर्मा, प्रतिभा शर्मा, अलका व्योहार, नीलिमा सोनी, संगीता दास आदि का योगदान रहा।















