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वानखेड़े स्टेडियम में सचिन तेंदुलकर की प्रतिमा का अनावरण: सचिन ने कहा- वानखेड़े की मेरी पहली यात्रा 1983 में हुई थी जब वेस्टइंडीज की टीम यहां आई थी

सचिन तेंदुलकर के जीवन के 50 वर्षों को समर्पित यह प्रतिमा एमसीए (मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन) द्वारा स्टेडियम में सचिन तेंदुलकर स्टैंड के पास स्थापित की गई है…

मुंबई (ए)। वानखेड़े स्टेडियम में महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की प्रतिमा का अनावरण बुधवार (एक नवंबर) को किया गया। कार्यक्रम में तेंदुलकर के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, बीसीसीआई सचिव जय शाह, बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, एनसीपी प्रमुख और पूर्व बीसीसीआई और आईसीसी प्रमुख शरद पवार, एमसीए अध्यक्ष अमोल काले ने कार्यक्रम में भाग लिया।

सचिन तेंदुलकर के जीवन के 50 वर्षों को समर्पित यह प्रतिमा एमसीए (मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन) द्वारा स्टेडियम में सचिन तेंदुलकर स्टैंड के पास स्थापित की गई है। सचिन ने कार्यक्रम से पहले स्टेडियम में मौजूद एक दिव्यांग प्रशंसक को ऑटोग्राफ भी दिया। उनकी यह प्रतिमा अहमदनगर के रहने वाले प्रमोद कांबले द्वारा तैयार की गई थी।

सचिन ने वानखेड़े की यात्रा के बारे में बताया कार्यक्रम के दौरान सचिन ने कहा, ”वानखेड़े की मेरी पहली यात्रा 1983 में हुई थी जब वेस्टइंडीज की टीम यहां आई थी। मेरे सभी बांद्रा के मित्र और सभी ने बड़े लोगों के साथ मिलकर वानखेड़े जाने का फैसला किया। मैं नॉर्थ स्टैंड पर गया, हर कोई जानता है कि नॉर्थ स्टैंड है। हम 25 लोग थे और ट्रेन में साइमन ने कहा, अच्छा मैनेज किया ना? मैंने पूछा क्या हुआ? किसी ने कहा कि हमारे पास 24 टिकट हैं और सचिन को चुप चाप घुसाना।”

गावस्कर की सीट पर बैठ गए थे सचिन तेंदुलकर ने आगे बताया, ”मुझे सुनील गावस्कर ने वानखेड़े स्टेडियम में ड्रेसिंग रूम देखने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन 14 साल के बच्चे के लिए ये बड़ी बात थी। जब मैं 15 साल से कम उम्र का था तब मैं मुंबई के लिए खेलने गया। जब मैं मुंबई के ड्रेसिंग रूम में गया तो वहां सभी बड़े खिलाड़ी थे। मुझे नहीं पता था कि कहां बैठना है। मैंने एक सीट खाली देखी, मैं गया और अपना किटबैग लेकर वहां बैठ गया। बाद में किसी ने कहा, ये एसएमजी (सुनील मनोहर गावस्कर) की सीट है।”

 

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