आज लोकसभा में वक्फ (संधोधन) विधेयक पेश किया गया। इसको लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में आरोप-प्रत्यारोप अपने चरम पर है। इसी बीच सरकार की ओर से पक्ष रखने आए अमित शाह ने अपने भाषण में राजद प्रमुख लालू यादव का जिक्र किया। आईए जानते है कि शाह ने लालू यादव का जिक्र क्यों किया…?
नईदिल्ली (ए)। वक्फ संधोधन विधेयक को लेकर सियासत में जबरदस्त गर्माहट देखने को मिल रही है। कारण है कि आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश होने जा रहा है। इसको लेकर सदन में पक्ष और विपक्ष में जुबानी मुठभेड़ जारी है। इसी बीच केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखने आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में अपने दलीले से विपक्ष पर जमकर हमला बोला। हालांकि शाह के भाषण में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव का जिक्र चर्चा का विषय रहा। जहां उन्होंने कहा कि इन्होंने तो लालू जी की इच्छा पूरी नहीं की, लेकिन हमने लालू जी की इच्छा पूरी की है।
अपने भाषण में अमित शाह ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक विपक्ष पूछता है कि आय का क्या उद्देश्य है। उन्होंने आगे कहा कि आज आरजेडी के सारे सदस्य बोले- 2013 का जब संशोधन आया, तब लालू जी ने क्या कहा कि ये कहा कि सारी जमीनें हड़प ली गई हैं। पटना में ही डाकबंगले की जितनी प्रॉपर्टी थी, सब पर बड़ी बिल्डिंग बन गई है।
अमित शाह ने कहा कि लालू जी ने कहा था कि इस तरह की काफी लूट खपेट हुई है। हम समर्थन करते हैं लेकिन चाहते हैं कि एक कड़ा कानून लाइए और ये जो चोरी करने वाले लोग है उनको जेल हो। साथ ही शाह ने आगे विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने तो लालू जी कि इच्छा पूरी नहीं की आज नरेंद्र मोदी जी ने उनकी इच्छा पूरी की है।
सबको स्वीकारना पड़ेगा कानून- शाह
इसके साथ ही अमित शाह ने कहा कि यहां एक सदस्य ने तो कह दिया कि अल्पसंख्यक इस कानून को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि संसद का कानून है, सबको स्वीकार करना पड़ेगा। ‘स्वीकार नहीं करेंगे’ इसका मतलब क्या है? कैसे बोल सकते हैं आप? आप कानून को स्वीकार नहीं करेंगे? यह कानून भारत सरकार का है, हर एक इससे बंधा होगा और इसे स्वीकार करना पड़ेगा।
साथ ही अपने भाषण में गृह मंत्री ने कहा कि वक्फ में धार्मिक क्रियाकलाप चलाने के लिए गैर मुस्लिम को नहीं रखा जा रहा है। लेकिन विपक्ष इसके जरिये डराकर अपना वोट बैंक सुरक्षित करने का काम कर रहा है। वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद में गैर मुस्लिम रखने की बात है जिसका काम ये देखना है कि काम ठीक से हो रहा है या नहीं। इस सदन के माध्यम से पूरे देश के मुस्लिम भाइयों को कहना चाहता हूं कि आपके वक्फ में एक भी गैर मुस्लिम नहीं शामिल होगा।
लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक को लेकर फैलाए जा रहे भ्रमों को लेकर विपक्ष पर करारा हमला बोला। अमित शाह ने सभी तरह के भ्रम पर कहा कि यह बिल वक्फ की संपत्ति के रख-रखाव के लिए है न कि वक्फ की जमीन पर कब्जा करने के लिए है। उन्होंने कहा कि इससे बेरोजगार मुसलमानों को फायदा होगा। वक्फ की आय बढ़ेगी।
विपक्ष द्वारा लोगों भ्रमित किए जाने अमित शाह ने कहा कि, यहां एक सदस्य ने तो कह दिया कि अल्पसंख्यक इस कानून को स्वीकार नहीं करेंगे। …क्या धमकाना चाहते हो भाई? संसद का कानून है, सबको स्वीकार करना पड़ेगा। ‘स्वीकार नहीं करेंगे’ इसका मतलब क्या है? कैसे बोल सकते हैं आप? आप कानून को स्वीकार नहीं करेंगे? यह कानून भारत सरकार का है, हर एक इससे बंधा होगा और इसे स्वीकार करना पड़ेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस दौरान कहा- वक्फ शब्द का अर्थ अल्लाह के नाम पर संपत्ति का दान है, वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड 1995 से है, लेकिन वोट बैंक के लिए विपक्ष वक्फ बिल का विरोध कर रहा है। गृह मंत्री ने साफ-साफ कहा कि, वक्फ बोर्ड में एक भी गैर मुस्लिम नहीं आएगा। गृह मंत्री ने आगे कहा कि- अगर 2013 में संशोधन नहीं होता तो ये बिल नहीं आता। उस दौरान संशोधन करके दिल्ली के लुटियंस की 125 संपत्तियां वक्फ को दे दीं गई।
वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद करेंगे ये काम
अमित शाह ने कहा कि, वक्फ बोर्ड में जो संपत्तियां बेच खाने वाले, सौ-सौ साल के लिए औने-पौने दाम पर किराए पर देने वाले लोग है, वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद उन्हें पकड़ने का काम करेगा। उन्होंने आगे बताया कि 1913 से 2013 तक वक्फ के पास 18 लाख एकड़ जमीन थी। 2013 से 2025 के बीच 21 लाख एकड़ भूमि बढ़ गई। अब 39 लाख एकड़ भूमि है। कई संपत्तियां बेच दी गईं, लेकिन किसकी इजाजत से?
गृह मंत्री ने कहा- वक्फ बिल वक्फ की जमीन के रख-रखाव के लिए है। अगले चार साल सभी मुस्लिम समझ जाएंगे इस बिल का क्या फायदा होगा। लेकिन विपक्ष इस बिल को लेकर अफवाह फैला रहा है। इस बिल को लेकर मुस्लिम भाइयों डराया जा रहा है। इस दौरान फिर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- अपनी संपत्ति का दान किया जाता है, सरकारी जमीन का नहीं, मंदिर या मस्जिद और चर्च सरकारी जमीन पर नहीं बन सकते हैं।
















