संस्कृत को दुनिया में सबसे पुरानी भाषा माना जाता है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं. ये बात लिथुआनिया की भारत में राजदूत ने कही है. उन्होंने हिंदी में भी बात की…
नईदिल्ली (ए)। देश के साथ विश्वभर में हिंदी भाषा का बोलबाला रहा है. दुनिया के कई देशों के लोग ऐसे हैं जो हिंदी भाषा को सीखकर उसी भाषा में बात करते हैं. इसी क्रम में लिथुआनिया देश की राजदूत ने भी हिंदी के साथ-साथ संस्कृत भाषा सीखी है. डायना मिकविसीन ने सोमवार 27 मार्च को कहा कि उनका देश संस्कृत भाषा के साथ घनिष्ठ संबंध होने पर गर्व करता है. इसी के साथ उन्होंने ये आग्रह किया भी किया है कि इसको लेकर अधिक रिसर्च की जानी चाहिए।
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “लिथुआनियाई भाषा संस्कृत के बेहद करीब वाली भाषा है. इसका वैज्ञानिक तथ्य भी है. हमें नहीं पता कि ये कैसे हुआ इसलिए हम इस पर रिसर्च करने की सोच रहे हैं. हमने शुरुआत में सिर्फ अनुवाद के लिए ये भाषा सीखी थी. भारत में लोगों को इसके बारे में ज्यादा पता नहीं है, इसलिए हमारा इरादा अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का है।”
शब्दकोश भी हुआ प्रकाशित
उन्होंने ये भी बताया कि इसको लेकर एक शब्दकोश भी प्रकाशित हो चुका है जो 108 शब्दों का है जिसमें संस्कृत और लुथिआनियाई भाषा में समान हैं. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे मधु, देव, अग्नि आदि ऐसे शब्द हैं जो हमारी भाषा और संस्कृत भाषा में समान हैं. उनका मानना है कि संस्कृत और लुथिआनियाई भाषा जो हैं वो दुनिया की बेहद पुरानी भाषाओं में शुमार हैं और इनमें काफी समानताएं भी हैं।
संस्कृत पर रिसर्च
विलनियस विश्वविद्यालय और लिथुआनियाई भाषा संस्थान के सहयोग से दूतावास ने लिथुआनियाई और संस्कृत में 108 शब्दों का एक शब्दकोश प्रकाशित किया है. इन सभी शब्दों के दोनों भाषाओं में ध्वनि और अर्थ एक समान हैं. इसको लेकर उन्होंने कहा कि एक शोध की जरूरत हैं. वो कहती हैं, “मुझे लगता है कि शोध करने की आवश्यकता है और हमारा विचार वास्तव में शोध को जारी रखने का है. जैसे संस्कृत के एक भारतीय विद्वान को खोजना जो लिथुआनियाई भाषा में रुचि लेगा, उन्हें संस्कृत के लिथुआनियाई विद्वानों के साथ जोड़ना, ताकि वे एक साथ बैठ सकें. हमारे पास आसानी से 1008 शब्द और इससे भी अधिक समान शब्द हो सकते हैं जिनपर शोध हो सकता है।”









