भिलाई। दवा व्यापारियों व रेमडेसीविर की कालाबाजारी पर मुकेश वर्मा ने कड़ी निंदा की और कहा है कि कोरोना महामारी से ग्रसित मरीजों के लिए रेमडेसीविर इंजेक्शन रामबाण है डाक्टरों के अनुसार ये इंजेक्शन फेफड़ों में होने वाली बीमारियों से मरीजों को बचाता है कोरोना से संक्रमित मरीजों को फेफड़े में अत्यधिक परेशानी के आधार पर ये डोज दिया जाता है शासन प्रशासन के द्वारा दवा को अधिक दामों में बेचने पर सख्त कार्यवाही करने की चेतावनी निरंतर जारी किया है साथ हि विभागों की अलग-अलग टीम भी बनाई है किन्तु कालाबाजारी बड़े पैमाने में कि जा रही है ऐसे व्यापारीयों पर शासन अंकुश लगाने में असफल है क्या इन व्यापारीयों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है जिसकी वजह दवा की कालाबाजारी करने वालों में खौफ नजर नहीं आ रहा है मानवीय संवेदना को दरकिनार कर लोगों की परेशानीयों का फायदा उठाते हुए मनमाने दाम पर दवा बेच रहे सामान्य दर 900रू का इंजेक्शन 2500 से 3000 रू में बेचा जा रहा है और ब्रांड के आधार पर इंजेक्शन की कीमत वसूला जा रहा है कई कंपनी के रेमडेसीविर इंजेक्शन 5000 से 25000 रू तक बेचे जा रहे हैं इन व्यापारीयों पर शासन प्रशासन का कोई खौफ नहीं है वर्मा ने व्यापारी संगठनों से अपिल की है कालाबाजारी करने वाले व्यापारीयों को अपने संगठन से बाइकाट करे और शासन से अंतर्राष्ट्रीय मानव-अधिकार मांग करती है कि रेमडेसीविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले व्यापारीयों पर राशुका के तहत कार्यवाही की जाये मुकेश वर्मा प्रदेश प्रवक्ता अंतर्राष्ट्रीय मानव-अधिकार संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश ने मांग की।














