दुर्ग। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवम् प्रौद्योगिकी परिषद रायपुर द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जिले के 4 बाल वैज्ञानिकों राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता हेतु चयनित हुए। उन्हे बाल वैज्ञानिक का पुरस्कार व 5000/की राशि पुरस्कार के रूप में प्रदान किया गया।सीनियर वर्ग में पुरस्कार प्राप्त किया हर्षा देवांगन व रागिनी सपहा ने, उन्होंने यह सफलता गाइड टीचर सपना सोनी के मार्गदर्शन में प्राप्त किया।ये शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा सिरसा के विद्यार्थी हैं। इनके प्रोजेक्ट का शीर्षक है एल्गी बायोफ्यूल भविष्य का ईंधन।
प्रत्येक देश के आर्थिक विकास में ऊर्जा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।सभी जीवों के सतत जीवन के लिए साथ ही मानव जीवन के अस्तित्व को सतत रूप से बनाए रखने हेतु ऊर्जा आवश्यक तत्व है। पूरे विश्व में ऊर्जा उत्पादन हेतु प्रमुख रूप से जीवाश्म ईंधन कोयले का प्रयोग होता है जो कि ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित करता है, जो कि ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण है ,साथ ही यह अनवीनीकृत ऊर्जा है। अतः व्यर्थ पदार्थ के रूप में हमारे पर्यावरण में उत्पन्न शैवाल द्वारा बायोडीजल तैयार कर ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन की समस्या का वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत किया जा सकता है।
एल्गी बायोफ्यूल में 50 प्रतिशत तक एल्गी ऑयल होता है। एल्गी एक कोशिकीय से लेकर बहुकोशिकीय तक विभिन्न रूपों में पाया जाता है , इसे प्रेस कर ऑयल प्राप्त किया जाता है। एल्गी के उत्पादन हेतु कृषि हेतु अनुपयुक्त भूमि का उपयोग किया जा सकता है। इसके उत्पादन हेतु अपशिष्ट एवम् खारे जल का भी प्रयोग किया जा सकता है। अतः देश के कृषकों की सतत रूप से आथिक उन्नति हेतु उन्हे एल्गी के उत्पादन हेतु प्रोत्साहित कर ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन कम करना, भूमि को उपजाऊ बनाना व भविष्य के ईंधन के रूप में विकल्प प्रस्तुत करना इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है।
जूनियर वर्ग में चयनित हुए धैर्य कसार व गुंजन शर्मा,इनके गाइड टीचर हैं अजय शर्मा। ये डी ए वी पब्लिक स्कूल हुडको के विद्यार्थी हैं। बाल वैज्ञानिक कनिष्ठ समूह, ग्रुप लीडर – धैर्य कसार, सहायक- गुंजन शर्मा, मार्गदर्शक शिक्षक- अजय शर्मा, शाला- डी ए वी स्कूल हुडको भिलाई, शीर्षक- सतत जीवन हेतु गैर परंपरागत मोबाईल चार्जर।
संक्षिप्त वर्णन- यह एक गैर परंपरागत मोबाईल चार्जर है जिसमें मोबाईल चार्ज करने के लिए किसी विद्युत स्त्रोत की आवश्यकता नहीं पडती। इसका प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जा सकता है जहाँ विद्युत उपलब्ध नहीं है। ड्स मोबाईल चार्जर में एक सर्वो मोटर की कुंडली को यांत्रिक ऊर्जा से घुमाकर विघुत उत्पन्न की जाती है इसका प्रयोग मोबाईल चार्ज करने में किया जाता है। इस गैरपरंपरागत मोबाईल चार्जर को पैर में बांधकर चलने पर विघुत उत्पन्न होती है और मोबईल चार्ज होता जाता है। पांच मिनट सामान्य गति से चलने पर मोबाईल की आठ प्रतिशत बैटरी चार्ज हो जाती है अर्थात प्रति मिनट एक प्रतिशत मोबाईल चार्जिग होती है। यह मोबाईल चार्जर सस्ता, प्रदुषणरहित, स्वास्थय वर्धक है।

ये बाल वैज्ञानिक अब राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व दिनांक 1 से 5 फरवरी के बीच विज्ञान एवम् प्रौद्योगिकी परिषद , गुजरात द्वारा आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिता में करेंगे। बाल वैज्ञानिकों को जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल , सहायक संचालक अमित घोष, जिला शैक्षणिक समन्वयक सोमेन कुंडू व जिला समन्वयक सपना सोनी ने बधाई प्रेषित किया।















