राष्ट्रपति मुर्मू ने कृषि वैज्ञानिकों से अपील की कि वह आगे आकर मृदा, पानी और पर्यावरण को जलवायु परिवर्तन से बचाने के लिए नए विचार लाएं…
नईदिल्ली (ए)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को कृषि क्षेत्र के वैज्ञानिकों से ऐसी तकनीक विकसित करने और प्रसारित करने का आह्वान किया, जो कि प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन के भयानक प्रभावों और संसाधनों के अत्याधिक दोहन की समस्याओं से निपटने में मदद करे।
राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 40वें दीक्षांत समारोह में संबोधन के दौरान की। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से अपील की कि वह आगे आकर मृदा, पानी और पर्यावरण को जलवायु परिवर्तन से बचाने के लिए नए विचार लाएं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “कृषि वैज्ञानिकों के पास ऐसे मुद्दों से निपटने की अहम जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा, “रासायनिक फर्टिलाइजर्स और कीटनाशकों ने इस क्षेत्र के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इनका मृदा, पानी और पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव हम सभी के लिए चिंता की बात है। युवा वैज्ञानिकों को इन समस्याओं का समाधान ढूंढना होगा।
इस बीच राष्ट्रपति ने पिछले एक दशक में कृषि उत्पादन और इसके दूसरे देशों में निर्यात में सफलता को लेकर संतुष्टि जताई। उन्होंने कहा, “यह हमारे कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और किसानों के कठिन परिश्रम की वजह से संभव हुआ है।”
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था कृषि क्षेत्र, मत्स्य उत्पादन और पशुधन के विकास से मजबूत होग सकती है। राष्ट्रपति ने भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए छात्रों से नवोन्मेषी विचारों और लक्षित कार्यों के जरिए योगदान देने की अपील की।