रायपुर। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों सहित पूरे देशवासियों, सेना के जवानों और स्वतंत्रता सेनानियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल सुश्री उइके ने अपने संदेश में कहा है कि 15 अगस्त 1947 को हमारा देश सदियों की गुलामी से मुक्त हुआ था और हमने स्वतंत्रता की ताजी हवा में सांस ली थी। अनेक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और अनगिनत वीरांगनाओं के समर्पण, त्याग और बलिदान से हमारे देश को परतंत्रता की जंजीरों से आजादी मिली। मैं इस अवसर पर उन समस्त महापुरूषों और वीरांगनाओं को नमन करती हूं।
राज्यपाल ने कहा कि आजादी के आंदोलन में अपना योगदान देने वाले आदिवासी वीरों के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता। स्वतंत्रता आंदोलन में छत्तीसगढ़ के वीर गुण्डाधुर, वीर गेंदसिंह और शहीद वीरनारायण सिंह जैसे जनजातीय वीरांे के नेतृत्व में कई सफल जनजाति विद्रोह हुए। इन विद्रोहोें ने अंग्रेजी शासन को हिलाकर रख दिया था। मैं उन सभी आदिवासी नायकों को भी नमन करती हूं।
इस आजादी को कायम रखने के लिए हमारी सेना के वीर जवानों और पुलिस कर्मियों ने भी अपनी शहादत दी है। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं और नमन करती हूं। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इस समय हम देश की आजादी के 75वें वर्ष को अमृत महोत्सव के रूप में मना रहे हैं। इस अवसर पर समस्त देश एवं प्रदेशवासियों से आग्रह है कि आजादी के समस्त नायकों को याद करते हुए उनसे प्रेरणा लें। हम सभी आजादी के इस पावन पर्व पर देश को विघटनकारी और असामाजिक तत्वों से मुक्ति दिलाने का संकल्प लें। मैं युवा पीढ़ी से आह्वान करती हूं कि भारत की एकता और अखण्डता को मजबूत करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभायें और राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनें।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश की आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा है कि इस साल भारत को आजादी मिले 75 साल पूरे हो रहे हैं। इस खुशी में पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। हजारों लोगों के कठिन संघर्ष, त्याग और बलिदान से हमें यह अमूल्य आजादी मिली है। अलग-अलग जाति, धर्म, खान-पान, बोली-भाषा और भौगोलिक विविधता वाले भारत की आजादी के बाद उसके स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में सफल होने की आशंका जताई गई थी। लेकिन अनेक चुनौतियों के बावजूद आज भारत पूरे विश्व में सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले सभी अनाम योद्धाओं, शहीदों और वीर जवानों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिनके बलबूते आज हम आजाद वातावरण में सांस ले रहे हैं, उन्हें याद कर मन सम्मान और गर्व से भर जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पुरखों ने आजादी के बाद जिस लोकतंत्रात्मक गणराज्य का सपना देखा था, उसे पूरा करना हम सब की जिम्मेदारी है। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार गांधीवादी सोच के साथ ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़‘ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार की प्राथमिकता समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सशक्त बनाने, गांवों को मजबूत करने और हर व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। बुनियादी स्तर पर गांवों को मजबूत करने के लिए किसानों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल की गई है। इसके लिए सुराजी गांव योजना, ’राजीव गांधी किसान न्याय योजना‘, गोधन न्याय योजना, गौ-मूत्र खरीदी, भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना जैसी कई लोक हितैषी योजनाएं शुरू की गई हैं।
आदिवासियों को वनअधिकार पट्टा और वनोपज का वाजिब दाम दिलाकर उन्हें सक्षम बनाया जा रहा है। सरकार ने परंपरागत तीज-त्यौहारों के साथ ही लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रयास भी शुरू किए हैं। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना और माटी पूजन दिवस की शुरूआत की गई है। पोषण और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी लगातार काम कर प्रदेश ने उपलब्धियां हासिल की हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की 75वीं वर्षगांठ को खास बनाने के लिए छत्तीसगढ़ में हमर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत सभी लोग अपने घरों, शासकीय कार्यालयों, संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर इस गौरवशाली अवसर पर अपनी भागीदारी निभाएं।















