रायपुर। योग केवल व्यायाम नहीं है बल्कि स्वयं के साथ साथ विश्व और प्रकृति के साथ एकत्व खोजने का भाव है। योग हमारी जीवनशैली में परिवर्तन लाकर प्राकृतिक परिवर्तनों से शरीर को स्वस्थ बनाने में सहायक सिद्ध होता है। यह बात राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आज प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ‘‘योग युक्त जीवन, रोग मुक्त जीवन’’ विषय पर आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
राज्यपाल ने कहा कि योग भारत की एक प्राचीन कला है जो कि हजारों वर्षों से अस्तित्व में है। किन्तु इसे जन ख्याति तब मिली जब हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। तब से सारे विश्व में लोग न सिर्फ इसे जानने लगे हैं बल्कि लोगों में योग के प्रति रूचि भी बढ़ी है। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भारत और दुनिया के लाखों लोग स्वेच्छा से भागीदारी करते हैं, जो कि हमारे देश के लिए बड़े ही गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि योग का अभ्यास हमारे शरीर एवं मन, विचार एवं कर्म, मानव एवं प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। यह स्वास्थ्य एवं कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। सार रूप में कहें तो योग आध्यात्मिक अनुशासन एवं अत्यन्त सूक्ष्म विज्ञान पर आधारित ज्ञान है जो मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। यह स्वस्थ जीवन जीने की कला है। योग को प्रायः लोग आसन और प्राणायाम तक ही सीमित मान लेते हैं। परन्तु आसन और प्राणायाम तो प्रारम्भिक विधि मात्र हैं। योग की ध्यानावस्था में जाने की विधि को समझने के लिए राजयोग मेडिटेशन की शिक्षा अत्यन्त आवश्यक है।
सुश्री उइके ने कहा कि योगासनों से शरीर स्वस्थ हो सकता है किन्तु तनाव और काम, क्रोध आदि मनोविकारों से बचने के लिए मेडिटेशन यानि ध्यान पद्धति अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती है। मेडिटेशन शब्द लेटिन वर्ड मेडेरी से उत्पन्न हुआ है। जिसका अर्थ है- हिलिंग अर्थात क्योर करना (स्वस्थ करना)। मेडिटेशन हमारे तन और मन दोनों को क्योर करता है।
राज्यपाल ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन मन को साधने की कला है, आत्म संयम का मार्ग है। विचारों को सन्तुलित करने की विधा है। इसमें बतलाया जाता है कि मन को मारो नहीं बल्कि उसे सुधारो। उसे सकारात्मक चिन्तन दो। उसकी शक्तियों को व्यर्थ चिन्तन में न गंवाते हुए विश्व कल्याण के कार्य में लगाओ। यह मन को सुमन बनाने की कला है। यह परमात्म प्राप्ति का साधन है। उन्होंने कहा कि योग शब्द की व्याख्या करें तो इसका शाब्दिक अर्थ होता है-जोडना। ब्रह्माकुमारी संस्थान में बतलाए जाने वाले राजयोग के द्वारा अपने मन को सर्वशक्तिमान परमात्मा से जोडने की विधि सीखाई जाती है। यह हमारे मन से चिन्ता, भय और तनाव आदि विकृतियों को दूर करने में बहुत लाभदायक साबित हो रही है। इससे यह पता चलता है कि योग न सिर्फ हमें स्वस्थ रहने में मदद करता है बल्कि इसकी सहायता से हमारा आचार, विचार और व्यवहार भी परिवर्तित होकर सबको सुख देने वाला बन जाता है। यह सचमुच हमारे लिए गौरव की बात है कि हमारे देश के योग को आज वैश्विक पहचान मिल चुकी है।












