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मेरे पापा का सपना था कि मेरी बेटी मेडिकल फील्ड में जाए: डॉ अंजू यादव

दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस): बीडीएस में जब मेरा चयन मंगलौर (कर्नाटक) के लिए हुआ तब मैं बहुत नर्भस थी। मेरे मम्मी-पापा ने मुझे बहुत मोटीवेट किया। मेरे पापा मुझे अक्सर लेटर लिखकर भेजते और मेरा हौसला बढ़ाते थे साथ ही मेरा मार्गदर्शन करते थे। मेरे पापा का सपना था कि मेरी बेटी मेडिकल फील्ड में जाये, उनका सपना पूरा करने के लिए मैं इस फील्ड में आई। बचपन से ही सुनते आई थी कि मेडिकल फील्ड में जाना है तो यही बात मन मे थी कि मेडिकल फील्ड में जाना है। मैं अपने काम से संतुष्ट हु की मैं डॉक्टर के साथ-साथ अपने परिवार को भी समय दे रही हु। यह सब बातें दुर्ग जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर अंजू यादव ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।डॉ अंजू यादव की प्रारंभिक और हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा माउंट कार्मेल स्कूल, पटना (बिहार) से हुई। वर्ष 1996 में इन्होंने मगध महिला महाविद्यालय ,पटना से बायलॉजी (जूलॉजी) में स्नातक की डिग्री हासिल किया। वर्ष 2000 में बीडीएस के लिए इनका चयन वायडी कॉलेज, मंगलौर (कर्नाटक) के लिए हुआ। बीडीएस करने के पश्चात रोहतक (हरियाणा) से इंटर्नशीप कर 2005 में बीडीएस की डिग्री हासिल किया। वर्ष 2006 में इनका विवाह हुआ और यह छत्तीसगढ़ आ गई। वर्ष 2008 से 2009 तक इन्होंने संविदा डॉक्टर के पद पर जिला अस्पताल, नारायणपुर में अपनी सेवाएं दी। पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए यह तीन वर्ष मेडिकल फील्ड से दूर रही और परिवार की सेवा में जुटी रही। वर्ष 2014 से अब तक यह जिला अस्पताल, दुर्ग में दंत रोग विशेषज्ञ के पद पर अपनी सेवाएं दे रही है साथ ही भिलाई में क्लीनिक भी संचालित कर रही है।गार्डनिंग, परिवार के साथ समय बिताने और कुकिंग में विशेष रुचि रखने वाली डॉ अंजू यादव अपने मम्मी-पापा को अपना आदर्श मानती है। इनके पति वरिष्ठ पुलिस अधिकारी है। इन्होंने महिला दिवस पर महिलाओ को संदेश दिया है कि महिलाएं अपने कर्तव्य और अधिकार के बीच सामंजस्य बनाकर चले ताकि कोई चीज़ एक दूसरे पर हावी न हो सके।  प्रोफेशनल होने के बाद भी अपने परिवार को समय देना चाहिए ताकि बच्चों को सही शिक्षा दी जा सके। एक डॉक्टर होने के नाते इन्होंने कहा कि हमारे यहाँ मरीज दांत के दर्द लेकर आते है, उनके दर्द को खत्म करना मेरी प्राथमिकता रहती है। उनके दर्द को  खत्म करने पर उनके चेहरे पर जो मुस्कान देखने मिलती है उससे बहूत खुशी मिलती है। जिला अस्पताल होने के नाते यहां दूर-दराज से ग्रामीण मरीज आते है उनकी समस्याओं को सुनना, समझना और उसका समाधान करना भी हमारी प्राथमिकता में रहती है। जितने संसाधन उपलब्ध है उतने में बेस्ट काम करने की कोशिश करते है और सफल भी होते है।

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