भिलाई। विधायक देवेंद्र यादव आज एमएमएस मामले में भिलाई नगर थाना पहुंचकर अपना बयान दर्ज करवाया है। आपको बता दे की 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान एक एमएमएस जमकर वायरल हुआ था। जिसमे हुबहू उनके जैसा दिखाई देने वाला शख्स एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाया गया था।
वीडियो वायरल होने के बाद भिलाई विधायक ने विधानसभा चुनाव के पहले प्रेस कॉंफ्रेंस करके विपक्ष के द्वारा उन्हें बदनाम किए जाने की साजिश बताई थी। तत्कालीन समय में राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद अब प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस मामले में जांच करवाएं जाने की बात कही थी। जिसके चलते आज देवेंद्र यादव भिलाई नगर थाना बुलाया गया है। भिलाई नगर सीएमपी के अलावा थाना प्रभारी के द्वारा उनका बयान लिया गया और करीब दो घंटे तक पूछताछ चली।
बयान देने से पूर्व विधायक देवेंद्र यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुऐ कहा है कि सर्वप्रथम पुलिस को 2/8/ 2023 को मेरे साथी देवेश पाणिग्रही ने आवेदन देकर वायरल हो रहे आपत्तिजनक वीडियो की जानकारी दी थी एवं उच्च स्तरीय जांच और FIR की मांग की गई, इसके पश्चात विधानसभा चुनाव के दौरान 15 नवंबर 2023 को सार्वजनिक रूप से प्रेस कांफ्रेंस करके सीबीआई जांच की मांग की थी फिर विधानसभा चुनाव के पश्चात 29/1/2024 को पत्राचार किया गया था।
इसके पश्चात पुन 23 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की जानकारी दी थी एवं विधानसभा में प्रत्यक्ष रूप से विधानसभा में प्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री के समक्ष आवेदन देकर FIR एवं सीबीआई जांच की मांग की थी तत्पश्चात 22 मार्च 2024 को पुनः आवेदन देकर FIR की मांग की कुल 6 आवेदन और 7 महीने 20 दिन बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया और आज लगभग 4 महीने बाद मुझे बयान देने के लिए बुलाया।
विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि कोई भी फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, वाइस सैंपलिंग के लिए वह तैयार है वीडियो की उच्च स्तरीय जांच देश के प्रतिष्ठित फॉरेंसिक लैब चंडीगढ़ और गांधीनगर में होनी चाहिए और अगर सैंपल देने के लिए उन्हें जाना पड़े तो उक्त स्थल पर भी वो जाएंगे।
पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच होनी चाहिए और इस मामले में संलिप्त दोषियों के ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए और जल्द से जल्द इन सब की गिरफ्तारी होनी चाहिए और मुझे न्याय मिलनी चाहिए।
विधायक देवेंद्र यादव ने बताया कि एक और एक मामले में सरकार के तत्कालीन मंत्री के ऊपर आपत्तिजनक वीडियो के मामले में सीबीआई की जांच की जाती है और दूसरी तरफ विपक्ष के विधायक के सात महीने आवेदन देने पर भी सिर्फ FIR होती है और कोई जांच नहीं की जाती।
















