बालोद (सारनाथ एक्सप्रेस)। मेरे पिताजी किसान थे और मैं एक किसान परिवार से हूं, अधिकारी बनने की इच्छा शुरू से ही थी, पीएससी मुझे सही विकल्प लगा, और मैंने लक्ष्य निर्धारित कर तैयारी किया और आज इस मुकाम तक पहुंचा हु। कार्य करते हुए इस बात का पूरा प्रयास करता हु की मुझसे जाने-अनजाने में किसी का अहित ना हो। मुझे तनिक भी अवसर मिलता है तो मैं लोगो की भला करता हूं, अपने व्यवहार से इसको साबित करता हूं। यह सब बाते अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बालोद दौलतराम पोर्ते ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
एएसपी डीआर पोर्ते का जन्म सूरजपुर में हुआ था, इनकी प्रारंभिक शिक्षा शासकीय प्राथमिक शाला नवापारा में हुई थी। कक्षा सातवी से हाईस्कूल तक कि शिक्षा नवोदय विद्यालय, बसदेई (सूरजपुर) में हुई और हाईस्कूल से हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा नवोदय विद्यालय, अमरकंटक (मप्र) में हुई। वर्ष 2002 इन्होंने शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अम्बिकापुर से बीएससी में स्नातक किया। वर्ष 2005 में इन्होने इसी कॉलेज से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल किया।
वर्ष 2002 में स्नातक की पढ़ाई पूर्ण करने साथ ही इन्होंने नौकरी की तलाश शुरू कर दिया तथा शिक्षाकर्मी वर्ग-दो के लिए चयनित हुए। इन्हें कैलाशपुर हाई स्कूल (सूरजपुर) ज्वाइन किया और तीन वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2005 में पटवारी की भर्ती निकली, जिसकी परीक्षा दी और पटवारी के लिए चयनित हुए। पटवारी में चयनित होने के बाद शिक्षाकर्मी की नौकरी से इस्तीफा देकर पटवारी की ट्रेनिंग किये और मैनपाट (मुख्यालय) में पदस्थ हुए। पटवारी रहते हुए इन्हें पीएससी एग्जाम की जानकारी मिली और इन्होंने पीएससी की तैयारी शुरु की। अपने पहले ही प्रयास में इन्हें सफलता हाथ लगी और यह डीएसपी के लिए चयनित हुए। दिसम्बर 2007 में इन्होंने प्रशिक्षु डीएसपी, जशपुर में ज्वाइन किया।
जनवरी 2008 में ट्रेनिंग का आदेश हुआ यह ट्रेनिंग के लिए चंद्रखुरी आ गए। ट्रेनिंग के पश्चात इनकी पोस्टिंग बिलासपुर हुआ जहा यह रतनपुर थाना प्रभारी भी रहे। प्रोबेशनर कंप्लीट होने के बाद जुलाई 2010 में इन्हें एसडीओपी डोंगरगढ़ (राजनांदगांव) की जिम्मेदारी दी गई। जहा इन्होंने तीन वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। अक्टूबर 2013 में इन्हें एसडीओपी अंतागढ़ की जिम्मेदारी दी गई। जनवरी 2015 में इनका तबादला सीएसपी दर्री (कोरबा) के पद पर हुआ, जहा इन्होंने डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी। जुलाई 2016 में इन्हें डीएसपी क्राइम, दुर्ग की जिम्मेदारी दी गई। जनवरी 2017 में इनका प्रमोशन हुआ हुआ और इन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) दुर्ग की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद इन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) दुर्ग की जिम्मेदारी दी गई फिर इनका तबादला डिप्टी कमांडर, प्रथम वाहिनी भिलाई के पद पर हुआ। वर्ष 2018 में इन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अपराध), रायपुर की जिम्मेदारी दी गई जहा इन्होंने मार्च 2019 तक अपनी सेवाएं दी। मार्च 2019 से सरकार ने इन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (बालोद) की जिम्मेदारी सौंपी है जिसे यह जिम्मेदारी के साथ निभा रहे है।
अंतागढ़ के नक्सल एनकाउंटर हेतु, पुलिस वीरता पदक , तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा वर्ष 2016 में प्रदाय किया गया। उससे पूर्व डोंगरगढ़ एसडीओपी के पद पर रहते हुए जिला राजनांदगांव में भी नक्सल विरोधी अभियान के दौरान, 03 बार नक्सल मुठभेड़ का सामना करना पड़ा। जहां भारी मात्रा में नक्सल साहित्य, पेनड्राइव, नक्सलियों के सामान जप्त किये गए थे।
अपने दुर्ग पदस्थापना के दौरान इन्होंने धोखाधड़ी, चिटफंड, अंधे कत्ल, अवैध शराब सहित कई बड़े मामले सुझाने में अपनी अहम भूमिका निभाई।
गाना सुनने तथा नए-नए जगहों पर घूमने में विशेष रुचि रखने वाले एएसपी डीआर पोर्ते ने बताया कि जब मैं पीएससी की तैयारी शुरू किया था तब मुझे बिल्कुल भी नही पता था कि यह क्या होता है। अपने दोस्तों से पूछकर तैयारी शुरु किया और उस वक्त पटवारी की जॉब करता था और जॉब करते हुए तैयारी करना बहुत कठिन रहा। नक्सल क्षेत्र में पदस्थ रहते हुए भी मुठभेड़ सामना किया, लीड भी किया। 12 घण्टे पैदल चलना, टीम का हिम्मत बढ़ाना, टीम को सही सलामत वापस लाना आदि बहुत ही कठिन अनुभव रहा। मैं चुनौतियो को अवसर मानता हूं, जो काम हमने नही किया है वह काम अचानक मिलता है वो अवसर होता है। मैं अपने हर कार्य को निपूणता देता हूं।
अगर आप पूरे मन से प्रयास करे तो सफलता जरूर मिलेगी, अगर हम असफल होते है तो यह मानकर चले कि हमारी तैयारी मे कुछ ना कुछ कमी है और हम उसका सुधार करें। मुझे समय के साथ वरिष्ठ अधिकारियों और लोगो का सहयोग मिला। मेरे ऐसा मानना है कि मुझे हर समय अच्छे लोग ही मिले।









