रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज ग्रामीणों से भेंट मुलाकात करने और शासन की योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने जिला रायपुर के धरसींवा विधानसभा के ग्राम माठ पहुँचे। माठ पहुंचने पर हेलीपैड में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के स्वागत में धरसींवा विधायक अनिता योगेंद्र शर्मा, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, सौरभ मिश्रा, अश्वनी वर्मा, सुरेंद्र गेंद्रे, अरविंद देवांगन चंद्रशेखर शुक्ला के साथ अन्य जनप्रतिनिधियों एवं आम जनता ने हेलीपैड पर उत्साहपूर्वक आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने आम जनता का स्वागत स्वीकार करते हुए सभी का अभिवादन किया।
मुख्यमंत्री ने भेंट-मुलाकात में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा-राज्य शासन की विभिन्न योजनाएं जो आम जनता के लिए बनाई गई हैं, उसका लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं यह जानने के लिए मैं आया हूं। आज रायपुर जिले में भेंट-मुलाकात कार्यक्रम की शुरुआत धरसीवा विधानसभा से कर रहा हूं। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि सिद्धांत और व्यवहार में समानता होनी चाहिए। हमने सभी वर्गों के लिए योजनाएं बनाई हैं। सबसे पहले हमने किसानों का ऋण माफ किया है, ऋण माफी की बात पर सभी लोगों ने हाथ उठाकर अपनी सहमति जताई।
मुख्यमंत्री ने कहा-धान के साथ साथ हम कोदो, कुटकी भी समर्थन मूल्य में खरीद रहे हैं। धान खरीदी में देश में छतीसगढ़ का पंजाब के बाद दूसरा स्थान है, अब तक 103 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है। छत्तीसगढ़ में लगभग 23 लाख किसान धान बेच कर लाभांवित हुए हैं। पहले केवल 15 लाख किसान ही धान बेचते थे, पहले रकबा भी 22 लाख हेक्टेयर था, उसमे भी इजाफा हुआ है।
जीवन लाल पारधी ने बताया कि उनकी 27 एकड़ जमीन है, खेती का काम करते हैं। सभी कर्ज माफ हो गया है। उन्होंने बताया कि 900 कट्टा धान बेचा है, 3 दिन में ही पैसा आ गया है। बचे हुए पैसे से आधा एकड़ खेत खरीदा है, इसी खेत का नाम बोनस रखा हूं। इस पर खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने बिलाईगढ़ में मुख्यमंत्री बहरा खेत का भी जिक्र किया।
श्री नायक ने बताया कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसानों को बहुत फायदा हो रहा है। धान खरीदी बहुत अच्छे से संचालित हो रही है। श्री नायक ने मुख्यमंत्री श्री बघेल से धान बेचने की सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़ा कर 20 क्विंटल प्रति एकड़ करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गाड़ा-गाड़ा धान खरीदना चाहती है, धान से इथेनॉल बनाना चाहते हैं, इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति नहीं मिला है। धान से बने इथेनॉल का रेट तय नहीं हुआ है ये सभी में व्यावहारिक दिक्कत है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गन्ने से इथेनॉल बनाने का प्लांट कवर्धा में प्रारंभ होने वाला है। कोंडागांव में मक्का से इथेनॉल संयंत्र भी जून में प्रारंभ हो जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार अनुमति दे, तो एक-एक दाना धान की खरीदी करेंगे।















