रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘आज मोर आवास-मोर अधिकार‘ कार्यक्रम के पश्चात प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के साथ बैठकर भोजन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने साथ में बैठकर भोजन कर रही जशपुर जिले के कुनकुरी निवासी फुलजेन्सिया एक्का और फरसाबहार की कुसुम से चर्चा करते हुए उनका एवं उनके परिवार का कुशलक्षेम जाना।
मुख्यमंत्री के साथ भोजन करने वालों में जशपुर के श्री राम, कबीरधाम के दौलतराम व लालाराम, बस्तर के लाहेन्द्र सिंह और सोनामणि, मुंगेली के महेश और समारू साहू, कांकेर की पूर्णिमा पटेल, बलौदाबाजार की हेमिन ध्रुव, रायपुर की रामबती पुरैना और जट्टासिंग शामिल थे।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक गुरु खुशवंत साहेब और अनुज शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
राज्य के प्राकृतिक आपदा पीड़ितों को 298 करोड़ 66 लाख रुपए से अधिक की अनुदान और सहायता राशि स्वीकृत: मुख्यमंत्री विष्णु देव के निर्देश पर प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को सहायता राशि स्वीकृत की जा रही है। राज्य में सूखा, बाढ, अतिवृष्टि, अग्नि, दुर्घटना, ओलावृष्टि, आधी-तूफान आदि के मामलों में अब तक 298.66 करोड़ की सहायता राशि स्वीकृत की जा चुकी है। राज्य के सभी कलेक्टरों को प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ितों को तत्काल सहायता राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अन्तर्गत राहत आयुक्त कार्यालय राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अन्तर्गत राहत आयुक्त कार्यालय मंत्रालय में स्थापित किया गया है। राज्य स्तर पर प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की जानकारी संकलित कर पीड़ितों को प्रदाय की जा रही इसकी निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।
राज्य सरकार द्वारा 298 करोड़ 66 लाख 55 हज़ार रुपए की स्वीकृत अनुदान सहायता राशि सभी 33 जिलों को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए जारी की गई है। वर्ष 2024-25 के बजट में राज्य आपदा मोचननिधि के लिए 533 करोड़ 60 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इसी तरह राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के लिए 133 करोड़ 40 लाख रूपए का प्रावधान के साथ-साथ निर्देशन व प्रशासन के लिए 3.26 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। आपदाओं का विश्लेषण एवं योजना तैयार करने के लिए 58 लाख रूपए का प्रावधान राज्य सकरार द्वारा किया गया है।
















