भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस): महिला दिवस 365 दिन अहसास करना होगा कि वो समाज में समानता का अधिकार रखती हैं। समाज इनका अपना है। महिला दिवस मनाने की जरुरत इसलिए पड़ी कि महिलाओं को समाज में जो सम्मान एवं दर्जा मिलना चाहिए वह अब तक नहीं मिल पाया है। किसी विषय विशेष पर एक दिवस तय करने का मतलब होता है कि उस विषय पर समाज में पर्याप्त जागरुकता उत्पन्न करनी है। महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरे समाज को आगे आकर सहयोग करना होगा तभी महिलाओं दिवस मनाना सार्थक होगा। महिलाये आत्मनिर्भर रहे, समाज मे अपना एक अलग ही ओहदा रखे। यह बाते प्रोवेशनर उप पुलिस अधीक्षक डॉ चित्रा वर्मा ने सारनाथ एक्सप्रेस से कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया। डॉ चित्रा वर्मा की प्रारम्भिक शिक्षा ताराशिव (तिल्दा नेवरा) के शासकीय स्कूल में हुई। हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा सारागांव के शासकीय स्कूल में पूर्ण हुई। बारहवीं के उत्कृष्ठ परिणाम के आधार पर इनका चयन शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, रायपुर में हुआ। वर्ष 2011 में इन्होंने आयुर्वेद में बीएमएस की डिग्री हासिल किया। पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2016 में इनका विवाह हो गया। वर्ष 2017-18 में इनका चयन आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी के रुप में हुआ। जिसकी प्रावीण्य सूची में इनका स्थान रहा। पढ़ाई के साथ साथ इन्होंने पीएससी की तैयारी शुरू किया। वर्ष 2015 के सीजीपीएससी में इनका चयन कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर के लिए हुआ। जिसमें इन्होंने जॉइनिंग किया और इन्हें दुर्ग में पोस्टिंग मिली। नौकरी करते हुए इन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी साथ समय निकाल कर घर पर चिकित्सा सेवा कार्य भी करती रही। वर्ष 2016 सीजीपीएससी में इनका चयन डीएसपी के लिए हुआ। मई 2018 से सितंबर 2019 तक चंदखुरी में ट्रेनिंग के पश्चात जंगलवार ट्रेनिंग के लिए कांकेर गई। जनवरी 2020 में प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक के रुप में दुर्ग में इनकी पोस्टिंगग हुई है। पेंटिंग और सिंगिंग में विशेष रुचि रखने वाली डॉ चित्रा वर्मा अपने पिताजी को अपना आदर्श मानती है। इनका कहना है कि मेरे पिता जी ने जिन परिस्थितियों में हमारी पढ़ाई करवाई है और हमे आगे बढने के लिए प्रेरित किया है वह वास्तव में अतुलनीय है। चिकित्सा विभाग छोड़कर पुलिस विभाग में आने का कारण पूछने पर इनका कहना है कि मैं पुलिस विभाग में चिकित्सा क्षेत्र के ज्ञान के साथ आई हूं न कि चिकित्सा विभाग छोड़कर और रही बात कि प्रशासन में आने का तो इनका विस्तृत क्षेत्र मुझे हमेशा से ही आकर्षित करता रहा है। इनका तर्क है कि चिकित्सा क्षेत्र से प्रशासन का क्षेत्र काफी बड़ा है। यहां आने के बाद भी मैं चिकित्सा कार्य मे सेवा कर सकती हूं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रतिभागियों से इनका कहना है कि महिलाये शादी के बाद कैरियर पर फोकस नही कर पाती लेकिन पेरेंट्स और पति का सहयोग रहे और इच्छाशक्ति हों तो वह अपना कैरियर बना सकती है। जॉब और परिवार को समय देने के लिए समय को मेंटेन करना पड़ेगा। पीएससी त्रिचरणीय परीक्षा है इसमें सालभर लग जाता है। इसके लिए अनुशासन और समय प्रबन्ध का होना बहुत जरूरी है। इच्छाशक्ति होनी चाहिए, आपका विजन क्लियर होना चाहिए। आप अपने परिवार, दोस्तो और हॉबी को भी समय देवे मुड़ फ्रेश करने के लिए यह जरूरी है। हमारे सफलता में सिर्फ हमारा ही हाथ नही होता है इसमें हमारे परिवार, दोस्त और सहयोगी का भी साथ होता है। सफलता का जश्न हर किसी के साथ मिलकर मनाना चाहिए। उन्हें अपना भागीदार बनाना चाहिए। एक डॉक्टर होने के नाते मैं कहना चाहूंगी कि आयुर्वेद अपना कर आप स्वस्थ रह सकते है। इसके लिए मैं समय-समय पर कैम्प करती हूं। आयुर्वेद अपना कर कई तरह के वायरस, कीटाणु, जीवाणु से आप दूर रह सकते है।आयुर्वेद द्वारा कोरोना वायरस, कई तरह के संक्रमण, त्वचा रोग, मस्तिष्क रोग का इलाज किया जा सकता है। हाल ही में सुपेला स्थित पारख ज्वेलर्स में हुई चोरी के आरोपी को पकडऩे में इनका भी योगदान रहा जिसके लिए इन्हें इंद्रधनुष अभियान के तहत डीजीपी द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है।









