बालोद (सारनाथ एक्सप्रेस): भारतीय संस्कृति ने सदैव ही महिलाओ को पूज्यनीय माना है, महिलाओं का रूप चाहे मां के रूप में हो, बहन हो, बेटी हो अथवा पत्नी के रूप में हो। महिलाओं की सम्मान की बाते युगों से ही हमारे पौराणिक कथाओं में विद्यमान है। महिला प्रेम, स्नेह, करूणा एवं मातृत्व की प्रतिमूर्ति है। महिलाओं के बिना पुरुष की कल्पना भी नहीं की जा सकती। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में और उसे सम्बल देने के लिए हमारा समाज एकजुट हो, महिलाओं के सम्मान एवं उसकी सुरक्षा का संकल्प लें तभी महिलाओं का समग्र विकास होगा। महिलाओं के बिना सृष्टि सृजन की हम कल्पना भी नहीं कर सकते। हम महिलाओं को भयमुक्त वातावरण देने और आत्मसम्मान के साथ खड़ा करने में सहयोगी बन सके, तो यह समाज के लिए गौरव की बात होगी। यह सब बातें महिला दिवस के अवसर पर सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में बालोद कलेक्टर श्रीमती रानू साहू ने कही। विशेष बातचीत में इन्होंने अपने कलेक्टर बनने तक के सफर को हमसे साझा किया। इनकी प्रारंभिक और हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा गरियाबंद जिले के पांडुका के शासकीय स्कूल में हुई। वर्ष 2004 में इन्होंने डिग्री गल्र्स कॉलेज, रायपुर से बायोलॉजी में स्नातक किया। वर्ष 2005 के सीजीपीएससी में हिस्सा लिया और डीएसपी के लिए चयनित हुई। वर्ष 2007 में डीएसपी ज्वाइनिंग के साथ ही साथ आईएएस की तैयारियों में जुटी रही। वर्ष 2008 के यूपीएससी में इन्होंने हिस्सा लिया और प्री एग्जाम क्वालीफाई कर मेंस में पहुंची लेकिन मेंस में असफल रही। इन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और वर्ष 2009 के यूपीएससी एग्जाम में ऑल इंडिया 88वां रैंक लाकर वर्ष 2010 बैच के आईएएस के लिए चयनित हुई। ट्रेनिंग के पश्चात इनकी पहली पोस्टिंग दुर्ग जिले में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर हुआ। यहां पदस्थ रहते हुए इन्हें पाटन एसडीएम और भिलाई नगर एसडीएम की जिम्मेदारी दी गई। इनका स्थानांतरण रायगढ़ जिले में हुआ जहां इन्होंने सारंगढ़ एसडीएम की जिम्मेदारी दी गई। फिर इनका तबादला कोरिया जिला के बैकुंठपुर जिला पंचायत सीईओ के पद पर हुआ। वर्ष 2014 में इनका तबादला नगर पालिक निगम आयुक्त बिलासपुर के लिए हुए जहां इन्होंने वर्ष 2016 तक अपनी सेवाएं दी। छ: माह तक एडीएम सरगुजा, डायरेक्टेड हेल्थ सर्विसेज में एक वर्ष और छ: माह कांकेर कलेक्टर के पद पर भी इन्होंने अपनी सेवाएं दी है। फरवरी 2019 से इन्हें बालोद कलेक्टर की अहम जिम्मेदारी दी गई है जिसे यह जिम्मेदारी से निभा रही है।बैकुंठपुर जिला पंचायत सीईओ रहते हुए साक्षर भारत अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने लिए लिए इन्हें राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया था। चुनाव के लिए मतदाताओं को जागरूक करने संबंधित एक वीडियो के लिए चुनाव आयोग ने इनकी प्रशंसा किया और उस वीडियो को पूरे देश मे दिखाया गया। हाल ही बालोद नरेगा के उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। महिला दिवस पर महिलाओ को इनका संदेश है कि महिलाये अपने आप को कभी कमजोर न समझे, खुद पर आत्मविश्वास रखे, वो हर कार्य को कर सकती है। हर चीज़ के लिए परिवार पर ही निर्भर न रहे, खुद को आत्मनिर्भर बनाये ताकि स्वयं के साथ साथ परिवार, समाज और देश का भी विकास कर सके। आत्मनिर्भर होने के लिए प्रयास करना चाहिए। समाज भी महिलाओ का सहयोग और सम्मना करे ताकि उनका समग्र विकास हो सके









