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महिलाएं किसी पर भी आँख बंद करके भरोसा न करे : स्मिता सिंह

भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस): मिली है जिंदगी, तो कोई मकसद भी रखिए, सिर्फ सांसें लेकर, वक्ता गंवाना ही तो जिंदगी नहीं यह कहना समाज सेवा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का जाना-पहचाना चेहरा स्मृतिा सिंह का है। स्मृतिा सिंह पढ़ाई में शुरु से ही मेधावी रहीं। कविता और कहानी भी लिखती हैं। इस तरह बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। समाजसेवा के क्षेत्र में अनेक सम्मान से सम्मानित हो चुकी हैं। भविष्य में बुजुर्गों व अनाथों के लिए आश्रम बना रही हैं। यह बातें स्मृतिा सिंह ने सारनाथ एक्सप्रेस से बातचीत में कहीं। कोंडागांव जिला के फरसगांव के सरकारी स्कूल में अपनी प्रारंभिक व हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा पूरी करने वाली शकुंतला फाउंडेशन की संचालिका स्मिता सिंह बचपन से ही समाजसेवा से जुड़ी हुई है। इन्होंने वर्ष 1998 में साइंस कॉलेज कोंडागांव से आट्र्स में स्नातक व वर्ष 2001 में आट्र्स (हिस्ट्री) में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। इन्होंने समाजशास्त्र में भी स्नातकोत्तर किया है। पढ़ाई में शुरू से ही तेज तर्रार रहने वही स्मिता सिंह बारहवीं पास करते ही शिक्षा कर्मी वर्ग तीन के लिए चयनित हो गई थी। भूपगावँ (फरसगांव) के शासकीय स्कूल में इन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवायें दी। सरस्वती शिशु मंदिर में भी इन्होंने दो वर्ष अपनी सेवाएं दी। वहाँ के गरीब बच्चों को निशुल्क कोचिंग भी पढ़ाती थी। दरअसल स्मिता सिंह के माता पिता शुरू से ही समाजसेवा करते थे। अपने माता पिता से प्रेरित होकर ही इन्होंने समाजसेवा करते आ रही है। 20 वर्षो से समाजसेवा के क्षेत्र में कार्य करते हुए इन्होंने अब तक 30 से अधिक मन्दबुद्धि लोगो का इलाज करवा कर उन्हें आश्रम में भर्ती करवा चुकी है। 50 से अधिक लोगो को ब्लड उपलब्ध करवा चुकी है इतना ही नही इन्होंने ब्लडर में स्टोन के अनाथ दिव्यांग मरीज आदित्य वर्धन त्रिपाठी का इलाज करवाकर उन्हें मदर टेरेसा आश्रम भिलाई में भर्ती करवाया और अभी भी उसके पढ़ाई में सहयोग करती है। जशपुर के गरीब परिवार के ब्लड कैंसर के मरीज कृष सोनी का इलाज करवाया। रायपुर के गरीब परिवार मन्दबुद्धि ब्रेस्ट कैंसर की मरीज पुष्पा का इलाज करवाकर आश्रम में भर्ती करवाया। ढाई साल की गरीब बच्ची संध्या यादव जो कि गंभीर बीमारी से जूझ रही है उसका भी इलाज करवा रही है। हाल ही में इन्होंने गरीब परिवार से धमतरी की एक साल की युक्ति राजपूत व अमलेश्वर के दो साल के शौर्य ठाकुर जिन दोनो के दिल मे छेद है जो कि बहुत ही कठिन केस है उसका इलाज हैदराबाद में करवाया है। 10 से अधिक जरूरतमंदो को नकली हाथ व पैर उपलब्ध करवाया। 30 से अधिक जरूरतमन्दों को व्हील चेयर व वाकर उपलब्ध करवाया। भिलाई के कैम्प क्षेत्र के बच्चों जो नशा करते थे उस क्षेत्र के 100 से अधिक बच्चो को इस कृत्य में संलिप्त थे उनको समझाकर कर 50 बच्चो का रीएडमिशन करवाया। स्कूली छात्राओं को सेनेटरी नेफ़क़ीन के प्रति जागरूक करती है और उन्हें निशुल्क वितरित भी करती है। लोगो को अंग दान के लिए भी जागरूक करती है।अपने माता पिता और रामकृष्ण केयर मेडीकल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ संदीप दवे को अपना आदर्श मानने वाली स्मिता सिंह को संगीत व समाजसेवा में विशेष रुचि है। ये लोगो को शासन के जनकल्याणकारी योजना आयुष्मान कार्ड, स्मार्ट कार्ड बनवाने में भी जागरूक व सहायता करती है। इन्हें समाजसेवा का पाठ घर से ही मिला है। इनके माता पिता शुरू से समाजसेवा करते आ रहे है जिन्हें देखकर ये बड़ी हुई और शुरू से ही इनका आश्रम जाना लगा रहता था। आश्रम में गरीब, अनाथ, दिव्यांगों के साथ समय बिताना इन्हें अच्छा लगता था क्योंकि उनका कोई नही था। महिलाओ के लिए इनका कहना है कि महिलाओं को सिर्फ  घर तक ही सीमित नही रहना चाहिए। घर मे उनकी बराबरी की भुमिका होनी चाहिए। जब आप किसी भूमिका में नही रहेगी तो आपको कोई नोटिस नही करेगा। महिलाएं किसी से भी जिस माध्यम से भी जुड़ी है किसी पर भी आँख बन करके विश्वास ना करे। कुछ भी गलत हो उसका विरोध करे। अपने आप को ओर समाज को जगरूक कर राष्ट्र निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करे। यह अपनी सफलता का श्रेय परिवार व बहन संजना और शोभना को देती हैं। 

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