भिलाई। दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित महात्मा ज्योतिबा फूले जयंती समारोह बुद्ध विहार सेक्टर 6 भिलाई मे संपन्न हुआ। सर्वप्रथम पदाधिकारियो द्वारा महात्मा ज्योतिबा फूले के छायाचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष अनिल मेश्राम ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फूले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को हुआ था, उनके पिता का नाम गोविंद राम और माता का नाम चिमणा बाई था। 7 वर्ष की अवस्था मे चर्च आफ स्काटलैंड स्कूल मे उनकी भर्ती हुई किन्तु छुआछूत जातिवाद के कारण भारी विरोध हुआ।
उन्हे स्कूल से निकाला गया लेकिन उन्होने हिम्मत नही हारी और अत्यंत विकट व विषम परिस्थितयो मे भी संघर्ष करते हुए 1852 तक 18 विद्यालय खोलकर वाचनालय की स्थापना भी की, शिक्षा के क्षेत्र मे उनके योगदान को कभी भुलाया नही जा सकता। महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष भारती खांडेकर ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फूले ने सबसे पहली शिष्या अपनी पत्नि सावित्रीबाई फूले को बनाया।
उन्हे पढ़ा लिखाकर शिक्षिका बनाया और उनके माध्यम से महिलाओ मे शिक्षा की चिंगारी फूँकी जो आज मशाल बन गई और वंचित समाज की अनेक महिलाऐ कलेक्टर एसपी, मंत्री और मिनिस्टर तक बन गई। उन्होने बाल विवाह का विरोध कर विधवा विवाह का समर्थन कर नारी विकास मे अमूल्य व अतुलनीय योगदान प्रदान किया। समारोह मे सुधेश रामटेके महासचिव, ठानेन्द्र कामडे, युवराज गजभिऐ, अजय रामटेके, सिद्धांत साखरे, वंदना बौद्ध, निर्मला गजभिऐ, प्रीति वासनिक, लता गाडगे, प्रमिला साखरे सहित अन्य लोग उपस्थित थे।















