दुर्ग। ग्राम पंचायत गुजरा के आश्रित ग्राम मटिया विकासखंड पाटन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत वर्ष 2022-23 में हितग्राही खिलेश्वर/रतिराम के खेत में निजी डबरी निर्माण कार्य पूर्ण किया गया। यह कार्य ग्रामीण विकास, जल-संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है।
पूर्व में हितग्राही खिलेश्वर वर्मा अपने खेतों की सिंचाई हेतु वर्षा पर निर्भर रहते थे, परंतु डबरी निर्माण होने से अब वे किसी भी मौसम में अपने खेतों की सिंचाई सुचारू रूप से कर पा रहे हैं। कृषि के लिए सिंचाई सुविधा अत्यंत आवश्यक है, जिसकी पूर्ति मनरेगा योजना के माध्यम से प्रभावी रूप से हुई है।
मनरेगा की सफलता: डबरी निर्माण ने बदल दी किसान की आजीविका- मनरेगा अंतर्गत 0.50 एकड़ क्षेत्रफल में निर्मित इस डबरी की कुल जलधारण क्षमता 16,859 घन मीटर है। इस कार्य पर ₹3.03 लाख मजदूरी एवं ₹0.24 लाख सामग्री मद, कुल ₹3.27 लाख व्यय किए गए तथा 1371 मानव दिवस का सृजन हुआ।
पूर्व में जल-अभाव के कारण हितग्राही की लगभग 2.5 हेक्टेयर भूमि में केवल खरीफ सीजन में धान की एक ही फसल ली जाती थी, जिससे लगभग ₹70,000 की आय होती थी।
जल-संरक्षण और आय-वृद्धि का नया उदाहरण — ग्राम मटिया में निजी डबरी निर्माण ग्रामीण विकास की मिसाल: डबरी निर्माण से किसान की भूमि हुई सिंचित, आय में बढ़ोतरी
डबरी निर्माण के बाद जल उपलब्धता बढ़ने से: इस वर्ष किसान द्वारा धान के साथ-साथ डबरी की मेड़ पर अरहर की फसल भी ली गई, जिससे धान से अनुमानित ₹9,000 तथा अरहर से लगभग ₹5,000 की अतिरिक्त आय होने की संभावना है।
साथ ही मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से डबरी में ₹5,000 का मछली बीज डाला गया। एक वर्ष पश्चात मछली उत्पादन से किसान ने लगभग ₹50,000 की आय अर्जित कर अपनी आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत बनाया है।
मनरेगा के माध्यम से निर्मित यह डबरी न केवल जल-संरक्षण के लिए प्रभावी सिद्ध हुई है, बल्कि इससे कृषक की आजीविका, कृषि उत्पादन और आय-वृद्धि को नई दिशा मिली है। यह कार्य मनरेगा के सफल क्रियान्वयन का प्रेरक उदाहरण है।
















