दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस) समाज महिलाओं का आदर करे। अपनी बेटियों को पढ़ाये, तभी वो समाज को जागरूक करेंगी। बेटियों को घर तक ही सीमित न रखे। महिला ही माँ है, बहन है, बेटी है, पत्नी है जो सब रिश्तों का ध्यान रखती है। महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढाना चाहिए, उनका सहयोग करना चाहिए। यह सब बातें दुर्ग जिले में पदस्थ उप संचालक (मछली पालन) सुधा दास से विशेष बातचीत के सारनाथ एक्सप्रेस से कही।सुधा दास की प्रारंभिक व हायरसेकंडरी तक कि शिक्षा बिलासपुर के शासकीय स्कूलों में हुई। इन्होंने वर्ष 1987 में डिग्री गल्र्स कॉलेज बिलासपुर से साइंस में स्नातक किया। वर्ष 1991 में इसी कॉलेज से इन्होंने स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान (स्पेलाइजेशन- इथयोलॉजी) की डिग्री हासिल किया। वर्ष 1992 में रोजगार कार्यालय द्वारा सहायक मत्सव अधिकारी की भर्ती निकली और इनका चयन हुआ। फिशरीज ट्रेनिंग सेंटर छतरपुर (मप्र) में ट्रेनिंग के पश्चात इनकी पहली पोस्टिंग वर्ष 1994 में सहायक मत्सव अधिकारी के पद पर अम्बिकापुर में हुई, जहां इन्होंने वर्ष 2001 तक अपनी सेवाएं दी। गरियाबंद में तीन माह सेवाएं देने के बाद वर्ष 2002 में इनका तबादला रायपुर मुख्यालय में हुआ जहां इन्होंने वर्ष 2007 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2007 में इन्हें प्रमोट कर सहायक संचालक (मछली पालन) बनाया गया। एक वर्ष ट्रेनिंग सेंटर में रहने के बाद वर्ष 2008 में इन्हें कबीरधाम जिले की जिम्मेदारी दी गई जहां इन्होंने 2012 तक अपनी सेवाएं दी। वराह 2012 में इनका पुन: प्रमोशन हुआ और इन्हें उप संचालक (मछली पालन) बनाया गया। उप संचालक का पोस्ट सिर्फ संभाग में ही होता है इसलिए इन्हें दुर्ग संभाग में पोस्ट किया गया है।परिवार के साथ समय बिताने में विशेष रुचि रखने वाली सुधा दास अपने माता पिता को अपना आदर्श मानती है। इनके परिवार में सभी प्राइवेट नौकरी वाले थे, बहुत ही सामान्य परिवार था। घर की परिस्थितियों को देखते हुए शासकीय नौकरी में जाने की इच्छा शक्ति और माता पिता का सहयोग से आज मैं यहाँ तक पहुंची हु। मैंने कभी सोचा भी नही था कि यहाँ तक आ पाऊंगी। उच्च अधिकारियों के दिशा- निर्देश पर लगातार अच्छे काम करते आई हूं और उनका सहयोग भी मिलता रहा है जो प्रोत्साहित करती है। काम पेंडिंग न रहे, काम को हरसंभव जल्दी और सही तरीके से करने के उद्देश्य से काम करती आई हूं। मछली पालन के क्षेत्र मे किसानों को लाभान्वित करना ही मेरा उद्देश्य रहा है। किसान के पास अगर जमीन है तो वह उसके कुछ हिस्से में मछली पालन कर सकते है इसके लिए सरकार की कई योजनाएं है।









