भिलाई। जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर के नेतृत्व में सोमवार को सिविक सेंटर SBI/LIC ऑफिस के सामने केंद्र सरकार की नीतियों के विरुद्ध एक दिवसीय धरना/प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा गया। सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने कहा कि अडानी समूह में LIC ने कुल 36,474.78 करोड़ रुपए का और राष्ट्रीय बैंकों ने इसमें लगभग 80,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। मामला सामने आने के बाद से समूह को 100 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, अपने करीबी दोस्तों और चुनिंदा अरबपतियों को फायदा पहुंचाने की मोदी सरकार की नीतियों से पूरा देश खासकर मध्यम वर्ग चिंतित हैं। मोदी सरकार द्वारा अडानी समूह में एलआईसी एवं एसबीआई जैसे सरकारी संस्थानों के बेहद जोखिम भरे लेनदेन और निवेश ने भारत के निवेशक ओ एल आई सी के 29 करोड पॉलिसी धारकों और एसबीआई के 45 करोड़ खाताधारकों चिंतित कर दिया है।
पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि एलआईसी और एसबीआई जैसे पीएसयू हमारे देश का गौरव है और करोड़ों भारतीयों की गाढ़ी कमाई से बने हैं अपने सबसे अच्छे दोस्त की मदद करने के इरादे से मोदी सरकार ने जबरदस्ती एलआईसी एसबीआई और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अदानी समूह में निवेश किया है। एलआईसी ने अदानी समूह में भारी निवेश किया है ।और पिछले कुछ दिनों में एलआईसी के 29 करोड़ पॉलिसी धारकों और निवेशकों को 33060 करोड़ का नुकसान हुआ हैं।
सभा को प्रदेश महामंत्री जितेंद्र साहू, भिलाई महापौर नीरज पाल, रिसाली महापौर शशि सिन्हा, अंत्यावसायी वित्त निगम की उपाध्यक्ष नीता लोधी, MIC सदस्य सीजू एंथोनी,पार्षद सुभद्रा सिंह ने भी संबोधित किया। सभा का संचालन MIC मेंबर संदीप निरंकारी ने किया। आभार प्रकट रजा सिद्दीकी ने किया।
इस अवसर पर पूर्व साडा उपाध्यक्ष बृजमोहन सिंह, प्रदेश सचिव धर्मेंद्र यादव, इंटक के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गेश ताम्रकार, ब्लाक अध्यक्ष नंद कुमार कश्यप, रामा विश्वकर्मा, तुलसी पटेल, प्रमोद प्रभाकर, दानेश्वरी साहू, मुकुंद भाऊ, सभापति केशव बंछोर, MIC पार्षद सीजू एंथोनी, लक्षमी पति राजू,केशव चौबे, नेहा साहू, रीता सिंह गेरा, मालती ठाकुर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी उपस्थित थे।
यह है मांगे:-
1) सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या एक संयुक्त संसदीय समिति जेपीसी के तहत एक निष्पक्ष जांच हिंडोन वर्ग रिसर्च रिपोर्ट में विस्तार से जांच की जाए।
2) LIC, SBI और अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों के जबरदस्त निवेश पर संसद में चर्चा की जानी चाहिए और निवेशक भी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।















