पुराने और नए पंबन पुल का सबसे बड़ा फर्क इनकी तकनीक ही है, जो इन्हें अलग करती है। दरअसल, पुराना ब्रिज कैंटिलीवर बैसक्यूल तकनीक से बना था। तब बिजली और ऑटोमैटिक सिस्टम की कमी की वजह से जब भी पुल के नीचे से शिप गुजरता था, तब इसे मैनुअल तरीके से ही उठाया या गिराया जाता था। पुल के दोनों तरफ के आधे-आधे हिस्से को उठाने के लिए कुल 16 लोग लगते थे। इसमें 45 मिनट तक का समय लग जाता था। शिप-जहाज के गुजरने के बाद पुल को फिर से अपनी सामान्य स्थिति में पहुंचने में भी 45 मिनट का समय और लग जाता था…
रामेश्वरम (ए)। भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जल्द ही एक नया मानक स्थापित होने वाला है। दरअसल, अगले महीने ही देश में नए पंबन ब्रिज का उद्घाटन होने वाला है, जो कि भारत में मंडपम से जाने वाले रेल नेटवर्क को पंबन द्वीप पर मौजूद रामेश्वरम से जोड़ेगा। इसी के साथ मौजूदा समय में मंडपम और रामेश्वरम के बीच बने 1914 में बने पुराने पंबन ब्रिज को हटाने की प्रक्रिया को शुरू किया जा सकता है।
भारत के दक्षिण में तमिलनाडु के सबसे निचले सिरे पर मंडपम नाम का छोटा कस्बा स्थित है। इसके ठीक नीचे बीच में समुद्र का हिस्सा पड़ता है और इसके बाद पंबन द्वीप, जिस पर स्थित है रामेश्वरम, जो कि भारत में ऐतिहासिक काल से अहमियत रखता है। 1870 के करीब ब्रिटिश शासनकाल में जब अंग्रेजों ने भारत को व्यापार के केंद्र के तौर पर स्थापित करने की ठानी, तब श्रीलंका के साथ संपर्क के लिए इस पुल को बनाने के लिए पहली बार योजना तैयार हुई।
कई वर्षों की प्लानिंग के बाद मंडपम और रामेश्वरम को जोड़ने के लिए आखिरकार 1911 में पंबन ब्रिज के निर्माण का काम शुरू हुआ। 24 फरवरी 1914 को आखिरकार भारत की मुख्य जमीन से रामेश्वरम को जोड़ने वाले इस पुल का उद्घाटन कर दिया गया।
आरवीएनएल के मुताबिक, नए पंबन ब्रिज को 5800 मीट्रिक टन (58 लाख किलोग्राम) स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल कर बनाया गया है, ताकि साधारण लोहे की तरह इसमें समुद्र के पानी और हवा से जंग न लगे। इतना ही नहीं पुल को बनाने में 3 लाख 40 हजार सीमेंट की बोरियां लगी हैं।
इतना ही नहीं नए पंबन ब्रिज को चक्रवाती तूफानों और तेज हवाओं का सामना करने लायक बनाने के लिए इसकी वेल्डिंग को अलग तरह से कराया गया। निर्माण कार्य का जिम्मा तमिलनाडु के वेल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट को सौंपा गया, जिसके प्रशिक्षित वेल्डर्स को पुल को मजबूती देने के काम में लगाया गया। इसके अलावा पुल के पूरे हिस्से पर जंग रोधी कोटिंग वाले पेंट को भी लगाया गया है, ताकि इसे जंग से बचाया जा सके।
















