भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म महोत्सव शास्त्रत्तीय मर्यादाओं एवं परंपराओं के अनुसार 19 अगस्त को मनाया जाएगा। जन्माष्टमी पर कृष्ण जन्मस्थान पर रजत कामधेनु स्वरूपा गो प्रतिमा ठाकुरजी का प्रथम अभिषेक करेंगी। जन्माष्टमी के लिए श्री कृष्ण जन्मस्थान को भव्य रूप दिया जारहा है।
इस संबंध में बुधवार को पत्रकारों को जानकारी देते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं वरिष्ठ सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के 5249 वें जन्ममहोत्सव के अवसर पर जन्मस्थान की साज-सज्जा, ठाकुरजी की पोषाक, श्रंगार नयनाभिराम होंगी। उन्होंने बताया कि 19 अगस्त को सुबह शहनाई एवं नगाड़ों के वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन सुबह 5:30 बजे से होंगे।
सुबह 8:00 बजे भगवान का दिव्य पंचामृत अभिशेक किया जायेगा एवं भगवान के पवित्र स्त्रत्तेतों का पाठ एवं पुष्पार्चन होगा। सुबह 10:00 बजे भव्य पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन लीलामंच पर किया जायेगा। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सहयोग से पुष्पांजलि कार्यक्रम के उपरान्त ब्रज एवं देश के प्रसिद्ध कलाकार अपनी भावांजलि लीलामंच पर देंगे। जन्म महाभिषेक का मुख्य एवं कार्यक्रम रात्रि 11:00 बजे श्रीगणेश-नवग्रह आदि पूजन से शुरू होगा।
तदोपरान्त 1008 कमल-पुष्प से ठाकुरजी का सहस्त्रत्तर्चन करते हुऐ आह्वान किया जाएगा। रात्रि 12:00 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ संपूर्ण मंदिर परिसर में ढोल-नगाड़े, मृदंग, झांझ-मंजीरे बज उठेंगे। साथ ही हरिबोल के साथ असंख्य भक्तजन-संत नाच उठेंगे। चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान के जन्म की महाआरती इसके साथ ही शुरू हो जाएगी, जो रात्रि 12:05 बजे तक चलेगी। ढोल एवं मृदंग अभिषेक स्थल पर तो बजेंगे ही साथ-ही-साथ सम्पूर्ण मंदिर परिसर में स्थान-स्थान पर भी इनका वादन होगा। इसके पश्चात केसर आदि सुगन्धित द्रव्यों से लिपटे हुये भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह मोर्छलासन में विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पधारेंगे।
हृषीकेश पंचांग के अनुसार 19 अगस्त को सूर्योदय 5:35 बजे होगा। अष्टमी तिथि का मान सम्पूर्ण दिन अर्धरात्रि के बाद 1:06 बजे तक रहेगा। कृतिका नक्षत्र भी संपूर्ण शेष 4:58 बजे तक है। इस दिन ध्रुव योग पूरे दिन और अर्धरात्रि के बाद 1:06 बजे तक है। छत्र नामक औदायिक योग भी बन रहा है। अर्धरात्रि के समय चन्द्रमा की स्थिति वृषभ राशिगत है।
सूर्योदय के समय अष्टमी और अर्धरात्रि को भी अष्टमी तिथि होने से कृष्ण जन्माष्टमी और व्रतोत्सव के लिए यही दिन शास्त्रत्तेक्त मान्य रहेगा। व्रत रहने वाले 20 की सुबह पारण करेंगे, उससे पहले रोहिणी नक्षत्र भी मिल जा रही है। इसलिए इस वर्ष जन्माष्टमी अत्यंत शुभकारी है। यह व्रत सर्वमान्य और पाप को नष्ट रहने वाला व्रत बाल, कुमार, प्रौढ़, युवा, वृद्ध और इसी अवस्था वाले नर नारियों के करने योग्य है। इससे उनके पापों की निवृत्ति और सुखादि की वृद्धि होती है।
साभार: हिंदुस्तान
















