रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को भक्त माता कर्मा जयंती की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने माता कर्मा से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हुए कहा कि भक्त माता कर्मा का जीवन सेवा, भक्ति, त्याग और परोपकार की अनुपम मिसाल है। वे भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं और उनका आदर्श आज भी जनमानस को प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में माता कर्मा जयंती का पर्व पूरे श्रद्धाभाव और सामाजिक समरसता के साथ मनाया जाता है। साहू तैलिक समाज की आराध्य देवी माता कर्मा की जयंती पर पूरे राज्य में शोभायात्राएँ, कलश यात्राएँ और विविध धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, जिनमें सभी समाजों की भागीदारी से एकता और भाईचारे का संदेश भी प्रसारित होता है। उन्होंने प्रार्थना की कि माता कर्मा का आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बना रहे। मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास जताया कि माता कर्मा के आदर्श हमें समाज में करुणा, समानता और समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने गणेश शंकर विद्यार्थी जी की पुण्यतिथि पर किया नमन: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निर्भीक पत्रकार, प्रबुद्ध लेखक और महान स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी की पुण्यतिथि (25 मार्च) पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जी न केवल पत्रकारिता के एक उज्ज्वल प्रतीक थे, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे योद्धा थे, जिन्होंने अपनी लेखनी से जनचेतना की क्रांति को जन्म दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विद्यार्थी जी ने ‘प्रताप’ जैसे समाचार पत्र के माध्यम से देश के पीड़ित किसानों, श्रमिकों और आम जन की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। उन्होंने निडर पत्रकारिता के माध्यम से ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी और स्वतंत्रता संग्राम को वैचारिक बल प्रदान किया। श्री साय ने कहा कि विद्यार्थी जी के जीवन से हम सभी को समाजसेवा और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा लेनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर के महान जननायक और अंतिम काकतीय राजा महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव की पुण्यतिथि (25 मार्च) के अवसर पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने कहा कि महाराजा भंजदेव न केवल बस्तर के गौरव थे, बल्कि जनजातीय अस्मिता, आत्मसम्मान और अधिकारों की आवाज़ भी थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव जी ने बस्तर की जल, जंगल और ज़मीन के साथ-साथ जनजातीय समाज के हक और सम्मान के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। श्री साय ने कहा कि उनका ग्रामीणों से गहरा आत्मीय संबंध था। वे आदिवासी समाज की आवाज़, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव का जीवन, विचार और बलिदान आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन हम सभी को परंपरा और मूल्यों की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए सतत कार्य करने की प्रेरणा देता है।
















