भिलाई। कोविड-19 संक्रमण को महामारी घोषित किए हुए लगभग एक साल बीत चुका है। जब दुनिया भर में कोरोना वायरस के व्यवहार के बारे में बहुत कम जानकारी थी और हर कोई अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रहा था उस वक्त विश्व स्तर पर, मेडिकल बिरादरी ने इस अंजान मोड़ पर भी लोगों का जीवन बचाने के लिए दृढ़ता के साथ खड़ा हुआ। आज यही दृढ़ता व समर्पण बीएसपी के जेएलएन अस्पताल के कोविड टेस्टिंग टीम ने दिखाई है।
कोविड टेस्टिंग निरन्तर जारी:
भिलाई इस्पात संयंत्र के जेएलएन अस्पताल में कोविड गतिविधियों को प्रारंभ करते हुए अस्पताल में कोविड टेस्टिंग प्रारंभ की गई। भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी अनिर्बान दासगुप्ता की पहल पर और ईडी, (एम एंड एचएस) डॉ एस के इस्सर के निर्देशों के तहत और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के सहयोग से अगस्त, 2020 में जेएलएन अस्पताल व रिसर्च सेंटर में कोविड सैम्पल कलेक्शन लैब प्रयोगशाला की स्थापना की गई। तब से अब तक लगातार कोविड टेस्टिंग जारी है।
तीनों प्रकार की होती है जांच:
स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा की जाने वाली इस टेस्टिंग में कोरोना वायरस (कोविड) संक्रमण का पता लगाने के लिए नाक और गले से स्वैब लिया जाता है और इस स्वैब के माध्यम से रैपिड एंटीजन डिटेक्शन मेथड, ट्रू-नाट मेथड, आरटी-पीसीआर मेथड से जांच की जाती है।
इनडोर रोगियों के जांच की अलग व्यवस्था:
सभी कार्य दिवसों में सामान्य पाली में सभी ओपीडी रोगियों और इनडोर रोगियों को कवर करने के लिए तकनीशियनों और डेटा ऑपरेटर को शामिल करते हुए दो टीमों का गठन किया गया। संदिग्ध मामलों के इनडोर प्रवेश के बारे में पूर्व सूचना के आधार पर, इनडोर टीम प्रत्येक वार्ड में कोविड सैम्पल कलेक्शन करती है। रविवार और छुट्टियों के दिन भी आंतरिक आपातकालीन संग्रहण किया जाता है। धीरे-धीरे, संग्रह सुविधा को इनडोर और ओपीडी में कोविड प्रभावित रोगियों के सभी संपर्कों तक बढ़ा दिया गया। फरवरी से सैम्पल कलेक्शन की सुविधा का विस्तार करते हुए बीएसपी कर्मचारियों को उनकी नियमित वार्षिक चिकित्सा परीक्षण से पहले कोविड जांच किया जाने लगा है।
अब तक 33000 से अधिक जांच:
इस प्रकार जेएलएन अस्पताल व रिसर्च सेंटर के कोविड लैब द्वारा अब तक कुल 33,093 सैम्पल कलेक्षन किए गए हैं, जिसमें रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए 9325 सैम्पल कलेक्षन, आरटी-पीसीआर के तहत 8360 और ट्रू-नाट के तहत 6984 सैम्पल कलेक्षन किया जा चुका है।
सेक्टर-6 में ट्रू-नाट लैब स्थापित:
इस क्रम में जेएलएन अस्पताल व रिसर्च सेंटर के टेक्नीषियनस् और डेटा ऑपरेटरों की एक टीम को सेक्टर-6, स्वास्थ्य केंद्र में ट्रू-नाट परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया। जेएलएन अस्पताल ने मरीज के वार्ड में भर्ती होने से पहले कैजुअल्टी में तेजी से एंटीजन परीक्षण के लिए नाक के स्वैब का संग्रह शुरू किया गया। विशेष रूप से बुजुर्ग आबादी को लक्षित करके 1 मार्च, 2021 से विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से सैम्पल एकत्र करके परीक्षण सुविधा को और बढ़ाया गया।
योगदान देने वाली टीम:
डॉ मनीषा कांगो के नेतृत्व में डॉ नीली कुजूर, डॉ गुरमीत सिंह, डॉ प्रिया साहू की टीम ने पैथोलॉजी के डीएनबी छात्रों की सक्रिय भागीदारी के साथ विकसित एकीकृत प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया और कोविड टेस्टिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। इसके अतिरिक्त पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी के तकनीकी कर्मचारियों, इंटर्न तकनीशियनों, नर्सिंग स्टाफ और छात्रों, एमटीए और अस्पताल परिचारकों के सहयोग से इस सैम्पलिंग कार्य को बखूबी अंजाम दिया गया। पूरे वर्ष भर जीतेंद्र अजमीरा, अर्चना पांडे और विवेक रंजन ने कोविड परीक्षण के लिए उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान की हैं। जेएलएन अस्पताल व रिसर्च सेंटर के कर्मचारियों ने अपने जीवन को जोखिम में डालते हुए बड़े साहस के साथ इस कार्य को सम्पन्न किया है। ट्रू-नेट लैब में डाटा ऑपरेटर के रूप में कार्यरत स्वर्गीय कन्हैया लाल के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता, जिनका निधन कोविड संक्रमण से हो गया।
कोविड-संक्रमण के हालिया उछाल के दौरान परीक्षण टीम पर भारी दबाव पड़ा। लेकिन इस प्रतिबद्ध टीम ने अपना फौलादी संकल्प दिखाते हुए इस दबाव का डटकर मुकाबला किया और इन विपरित परिस्थितियों में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया है। इस टीम की समर्पित सेवा के लिए डॉ एस के इस्सर, ईडी (मेडिकल एंड हेल्थ सर्विसेज), सीएमओ द्वय डॉ रवींद्रनाथ एम और डॉ प्रमोद बिनायके ने उन सभी कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। जिन्होंने कोविड-19 सैम्पल कलेक्शन और परीक्षण प्रणाली स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।















