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बिहार के नए डीजीपी आलोक राज ने संभाली बागडोर: पहली ही पोस्टिंग में निपटाए थे चार खूंखार अपराधी, तीन बार राष्ट्रपति पदक से हो चुके है सम्मानित

उत्कृष्ट पुलिस करियर के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया. आलोक राज को वर्ष 1994 में पुलिस वीरता पदक, वर्ष 2008 में सराहनीय सेवा पदक और वर्ष 2016 में विशिष्ट सेवा पदक प्रदान किया गया…

 

पटना (ए)। बिहार को हाल ही में अपना नया डीजीपी मिला है. सीनियर आईपीएस अफसर आलोक राज को बिहार की कानून व्यवस्था की बागडोर संभालने की बड़ी जिम्मेदारी मिली है. उनको 35 साल से अधिक का एक्सपीरियंस है. वह वीरता पदक से भी नवाजे जा चुके हैं. लेकिन क्या आपको पता है वह कितने पढ़े-लिखे हैं और उन्होंने कहां से पढ़ाई लिखाई की है, आइए जानते हैं।

देश के सबसे चर्चित राज्यों में से एक बिहार की पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी अब आईपीएस आलोक राज संभाल रहे हैं. वह साल 1989 में आईपीएस बने थे. अफसर बनने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग पटना सिटी के सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) के तौर पर हुई थी. इस दौरान चार खतरनाक अपराधियों के साथ मुठभेड़ में उन्हें मार गिराने के लिए आईपीएस आलोक राज को पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया था।

मुजफ्फरपुर के रहने वाले आलोक राज ने अपने जीवन में अद्वितीय उपलब्धियां हासिल की हैं. पटना विश्वविद्यालय से जियोलॉजी में एमएससी की पढ़ाई करते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल जीता. उनके उत्कृष्ट पुलिस करियर के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया. आलोक राज को वर्ष 1994 में पुलिस वीरता पदक, वर्ष 2008 में सराहनीय सेवा पदक और वर्ष 2016 में विशिष्ट सेवा पदक प्रदान किया गया. उनके इस असाधारण योगदान ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित पुलिस अधिकारियों की श्रेणी में शामिल कर दिया है।

आईपीएस राज कई जिलों में बतौर एसपी काम कर चुके हैं. वह उस समय के बिहार यानी अविभाजित बिहार के रांची, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, देवघर, हजारीबाग, सीतामढ़ी आदि जनपदों में तैनात रह चुके हैं. साल 2004 से लेकर 2011 तक उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में कार्य किया. इस दौरान उन्हें 4 बार प्रशंसा डिस्क से सम्मानित किया गया था. आईपीएस आलोक राज के ससुर भी बिहार पुलिस के डीजीपी रह चुके हैं. लालू यादव की सरकार के टाइम पर उनके ससुर डी.एन.सहाय राज्य के डीजीपी थे।

इतना ही नहीं आलोक राज ने इटली में संयुक्त राष्ट्र संघ की शांति सेना के उच्च स्तरीय प्रशिक्षण में भी भाग लिया, जिससे उनकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनी. बिहार लौटने के बाद उन्होंने राज्य की विशेष शाखा, सीआईडी और विधि-व्यवस्था के एडीजी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. इसके अलावा आईपीएस राज बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, प्रशिक्षण, और बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के महानिदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली है।

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