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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर किया ध्वजारोहण: देश के सामने रखा 25 साल का प्लान, गिनाए ये 5 संकल्प

पीएम मोदी ने कहा, ‘साल 2014 में देश की जनता ने मुझे जिम्मेदारी दी थी, मैं आजादी के बाद जन्म लेने वाला पहला व्यक्ति हूं, जिसे लाल किले से देश को संबोधित करने का मौका मिला…

नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लाल किला पर  ध्वजारोहण करते हुए अपने संबोधन में कहा कि  आजादी के 75वर्ष पूर्ण होने पर देशवासियों को अनेक अनेक शुभकामनाएं, बहुत बहुत बधाई। न सिर्फ हिंदुस्तान का हर एक कोना, बल्कि दुनिया के हर कोने में किसी न किसी रूप में भारतीयों के द्वारा या भारत के प्रति अपार प्रेम रखने वालो के द्वारा विश्व के हर कोने में हमारा तिरंगा आन बान शान के साथ रहरा रहा है। मैं विश्व भर में फैले हुए भारत प्रेमियों को आजादी के अमृत महोत्सव की बहुत बहुत बधाई देता हूं।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की नारी का संकल्प क्या होता है। भारत की नारी त्याग की क्या पराकाष्ठा कर सकती है। उन वीरांगनाओं को याद करते हुए हर हिंदुस्तानी गर्व से भर जाता है। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, दुर्गाभाभी, बेगर हजरत महल जैसी की वीरांगनाओं को याद किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान के निर्माता बाबा साहब आंबेडकर, सुभाष चंद्र बोस समेत कई महापुरुषों को नमन किया। उन्होंने कहा कि आज महापुरुषों को याद करने का दिन है।

पीएम मोदी ने कहा कि 75 साल की यह हमारी यात्रा अनेक उतार चढ़ाव से भरी हुई है। इसके बीच भी हमारे देशवासियों ने उपलब्धियां की हैं। हार नहीं मानी है। संकल्पों को ओझल नहीं होने दिया है। इसलिए यह भी सच्चाई है कि सैकड़ों सालों की गुलामी के कालखंडों को भारत के मन को भारत की भावनाओं को गहरे घाव दिए हैं, गहरी चोटें पहुंची हैं, लेकिन उसके भीतर एक जिद भी थी, एक जुनून भी था। और उसके कारण अभावों के बीच भी और जब आजादी का रण अंतिम चरण में था, तो देश को हताश करने के लिए सभी उपाय किए गए… न जानें क्या क्या आशंकाएं व्यक्त की गईं, लेकिन इन्हें पता नहीं था कि यह हिंदुस्तान की मिट्टी है।

पीएम मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान का कोई कोना, कोई काल ऐसा नहीं था, जब देशवासियों ने सैंकड़ों सालों तक गुलामी के खिलाफ जंग न की हो, जीवन न खपाया हो, यातनाएं न झेली हो, आहुति न दी हो। आज हम सब देशवासियों के लिए ऐसे हर महापुरुष को, हर त्यागी और बलिदानी को नमन करने का अवसर है। उन्होंने कहा, ‘देश कृतज्ञ है मंगल पांडे, तात्या टोपे, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, असफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल ऐसे अनगिनत ऐसे हमारे क्रांति वीरों ने अंग्रेजों की हुकूमत की नींव हिला दी थी।’

पीएम मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान का कोई कोना, कोई काल ऐसा नहीं था, जब देशवासियों ने सैंकड़ों सालों तक गुलामी के खिलाफ जंग न की हो, जीवन न खपाया हो, यातनाएं न झेली हो, आहुति न दी हो। आज हम सब देशवासियों के लिए ऐसे हर महापुरुष को, हर त्यागी और बलिदानी को नमन करने का अवसर है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘साल 2014 में देश की जनता ने मुझे जिम्मेदारी दी थी। मैं आजादी के बाद जन्म लेने वाला पहला व्यक्ति हूं, जिसे लाल किले से देश को संबोधित करने का मौका मिला।

यह देश का सौभाग्य रहा है कि देश की आजादी की जंग के कई रूप रहे हैं। इनमें से ही एक रूप था, जिसके तहत महर्षि अरविंद, स्वामी विवेकानंद, नाराय़ण गुरु जैसे लोग देश की चेतना को जगाते रहे। देशवासियों ने बीते एक साल में देश की आजादी के अमृत महोत्सव पर बहुत से कार्यक्रम किया। देश में शायद ही कभी एक ही लक्ष्य को लेकर इतना उत्सव मनाया गया हो। हिंदुस्तान के हर कोने में उन महापुरुषों को याद करने का प्रयास किया गया, जिन्हें किसी कारण से इतिहास में जगह नहीं मिली या फिर उन्हें भुला दिया गया। देश ने इन क्रांतिकारियों और सत्याग्रहियों को नमन किया।

कल 14 अगस्त को भारत ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भी बड़े भारी मन से मनाया और विभाजन के गहरे घावों को याद किया। लाखों ने बहुत कुछ सहन किया था, तिरंगे की शान और मातृभूमि की मिट्टी से मोहब्बत के कारण सहन किया था। उनका संघर्ष प्रेरणा पाने योग्य है।

आज हम जब आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो बीते 75 सालों में देश के लिए जीने-मरने वाले और संकल्पों को पूरा करने वाले सेना के जवानों, पुलिसकर्मियों, जनप्रतिनिधियों को भी याद करने का समय है। 75 साल में इन सबके योगदान को भी आज स्मरण करने का अवसर है। यह देश के कोटि-कोटि नागरिकों को भी नमन करने का वक्त है, जिन्होंने अपने सामर्थ्य के अनुसार देश के लिए काम किया। 

कभी अन्न का संकट झेला, कभी युद्ध के शिकार हो गए। आतंकवाद के शिकार रहे। छद्मयुद्ध चलते रहे। प्राकृतिक आपदाएं आती रहीं। इन पड़ावों के बीच भी भारत आगे बढ़ता रहा। भारत की विविधता जो कभी बोझ लगती थी, वह विविधता ही भारत की अमोघ शक्ति है और उसका अटूट प्रमाण है। भारत के अंदर एक संस्कार प्रवाह है। भारत लोकतंत्र की जननी है। जिनके जेहन में लोकतंत्र होता है, वे जब चल पड़ते हैं तो वह सामर्थ्य दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियों के लिए भी संकट का काल लेकर आता है।

पीएम मोदी बोले- सरकारों को भी तलवार की धार पर चलना पड़ता है

देश का हर नागरिक बदलाव देखना चाहता है, लेकिन उसे इंतजार नहीं चाहिए। अपनी ही आंखों के सामने देश का नागरिक सपनों को पूरा होते देखना चाहता है। कुछ लोगों को इसके कारण संकट हो सकता है, लेकिन जब आकांक्षी समाज होता है तो सरकारों को भी तलवार की धार पर चलना पड़ता है। चाहे केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकार हो, सभी को इस समाज की चिंता करनी होगी। उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हम इंतजार नहीं कर सकते। इस समाज ने लंबे अरसे तक इंतजार किया है, लेकिन अब वह अपनी आने वाली पीढ़ी को इंतजार करने के लिए मजबूर करने को तैयार नहीं है। इसलिए अमृत काल की पहली प्रभात आकांक्षी समाज के सपने को पूरा करने का सुनहरा अवसर देती है। हमने पिछले दिनों देखा कि भारत में कैसे सामूहिक चेतना पुनर्जागरण हुआ।

पीएम मोदी ने गिनाए अगले 25 सालों के 5 आधार

मुझे लगता है कि आने वाले 25 सालों के लिए हमें अपने संकल्पों को 5 आधारों पर केंद्रित करना होगा। हमें उन पंच प्रण को लेकर 2047 में जब आजादी के 100 साल होंगे तो आजादी के दीवानों के सपनों को पूरा करना होगा।

पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें 5 बड़े संकल्प लेकर चलना होगा। इनमें से एक संकल्प होगा, विकसित भारत।  दूसरा यह कि किसी भी कोने में गुलामी का अंश न रह जाए। अब हमें शत-प्रतिशत उन गुलामी के विचारों से पार पाना है, जिसने हमें जकड़कर रखा है। हमें गुलामी की छोटी से छोटी चीज भी नजर आती है तो हमें उससे मुक्ति पानी ही होगा।’

तीसरी प्रण शक्ति यह है कि हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए। यही विरासत है, जिसने कभी भारत को स्वर्णिम काल दिया था। यही विरासत है, जो काल बाह्य छोड़ती रही है और नूतन को स्वीकारती रही है।

चौथा प्राण यह है कि देश में एकता रहे और एकजुटता रहे। देश के 130 करोड़ देशवासियों में एकता रहे। यह हमारा चौथा प्राण है।

5वां प्रण है नागरिकों का कर्तव्य। इससे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी बाहर नहीं हैं।

करीब 19 हजार फीट की ऊंचाई पर शान से लहराता तिरंगा

 

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