BREAKING

छत्तीसगढ़फीचर्डसाक्षात्कार

पुलिस वालों का बुलेट में चलना मुझे बहुत आकर्षित किया और मैने तय की मैं भी पुलिस में जाऊंगा : अल्बर्ट कुजूर

रायपुर (सारनाथ एक्सप्रेस)। मेरे पिताजी भारतीय थल सेना में थे और राजस्थान में पदस्थ थे। सन 1962 के भारत-चीन युध्द के दौरान उनको गोली लगी और वह बुरी तरह जख्मी हो गए। तीन माह तक उनका ईलाज चला फिर उनका देहांत हो गया। मुझे पढ़ाने के लिए आर्मी ले जा रही थी परंतु मैं उस वक्त बहुत छोटा था इसलिए घरवालों ने जाने से मना कर दिया था। यह सब बातें राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर में डीएसपी के पद पर पदस्थ अल्बर्ट कुजूर ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा किया।
डीएसपी अल्बर्ट कुजूर मूलत: रायगढ़ (अब जशपुर) के ग्राम दोकडा ब्लॉक कांसाबेल के रहने वाले है। इनकी प्रारंभिक और मिडिल तक कि शिक्षा शासकीय विद्यालय, दोकडा में हुई थी। कक्षा नवमी से ग्यारहवीं तक कि शिक्षा इन्होंने लोयला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से पूरी की।
वर्ष 1981 में इन्होंने सेंट एलाइसिस महाविद्यालय, जबलपुर (मप्र) से आट्र्स में स्नातक की डिग्री किया। वर्ष 1984 में इन्होंने महाकौशल महाविद्यालय, जबलपुर से इकोनॉमिक्स में स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की।
स्नातकोत्तर के फाइनल ईयर में रहते हुए ही इन्होंने उप-निरीक्षक के परीक्षा में भाग किया और इनका चयन हो गया।
दिसम्बर 1984 में ट्रेनिंग के लिए सागर प्रशिक्षण एकेडमी गए और एक वर्ष के प्रशिक्षण और पासिंग आउट होने के उपरांत बतौर प्रशिक्षु कांकेर पोस्टिंग हुई जहां इन्होंने छह माह तक सेवाए दी। वर्ष 1986 में इनकी पहली पोस्टिंग घोर नक्सली क्षेत्र बीजापुर (बस्तर) के गंगालूर में हुई जहां इन्होंने चार माह तक अपनी सेवाएं दी। तत्कलीन डीआईजी आरपी मोदी ने नक्सली मुठभेड़ के लिए आंध्रा बॉर्डर, पामेड़ में एक वर्ष के लिए पदस्थ किया। वर्ष 1988 से 1990 तक इन्होंने भोपालपट्टनम में अपनी सेवाएं दी।
वर्ष 1990 में इनका तबादला  महासमुंद में हुआ जहां इन्होंने डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1992 में इनका तबादला रायपुर में हुआ जहां यह सिविल लाइन थाना, कोतवाली थाना, मैनपुर थाना (गरियाबंद), गंज थाना, मोहदपारा थाना (ढाई वर्ष तक), पडऱी थाना, पलारी थाना, आरंग थाना में थाना प्रभारी रहे।
वर्ष 2003 में इनका तबादला राजनांदगांव हुआ जहां इन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2004 से 2005 तक इन्होंने रायपुर में अपनी सेवाएं दी। जून 2005 में इनका प्रमोशन हुआ और यह उप निरीक्षक से निरीक्षक बने।
प्रमोशन के साथ ही इनका तबादला बिलासपुर हुआ जहां इन्होंने 2008 तक अपनी सेवाएं दी, इस दैरान यह थाना सिविल लाइन, थाना तारबाहर के थाना प्रभारी रहे।
वर्ष 2008 में इनका तबादला रायपुर हुआ जहां इन्होंने 2010 तक अपनी सेवाएं दी, इस दौरान इन्हें सिविल लाइन थाना, यूनिवर्सिटी थाना (सरस्वती नगर) तथा पुरानी बस्ती थाना के प्रभारी रहे।
इनके अनुभवों को देखते हुए वर्ष 2010 में ऑपेरशन ग्रीन हंट” के केन्द्रीय बलो के साथ इन्हें छह माह के लिए बस्तर में पोस्टिंग की गई।
वर्ष 2010 में इनका तबादला बीजापुर हुआ, जहां इन्होंने वर्ष 2013 तक अपनी सेवाएं दी। इस दौरान यह थाना मिरतुर, जंगला, कुटरू के थाना प्रभारी रहे।
सितंबर 2013 में इनका तबादला  दुर्ग जिला में यहां इन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी तथा थाना खुर्सीपार के प्रभारी रहे।
दिसम्बर 2014 में इनकी पोस्टिंग राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर के लिए हुआ। फरवरी 2018 में इनका प्रमोशन हुआ और यह निरीक्षक के उप पुलिस अधीक्षक बने और वर्तमान में राज्य आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर में पदस्थ है। एसईसीएल में कोयला कारोबारी के ब्लाइंड मर्डर के आरोपी के आरोपी को चंडीगढ़ से पकड़कर लाने, बिलासपुर में बेहतर पुलिसिंग सहित कई सराहनीय कार्यो के लिए इन्हें प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो देकर तत्कालीन एसपी और सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। गाना सुनने, मार्केटिंग करने तथा फ्री समय मे समाजिक काम मे विशेष रुचि रखने के साथ ही यह हॉकी, फुटबॉल और एथेलेटिक्स के बेहतरीन खिलाड़ी रहे है और स्कूल/कॉलेज के दिनों में इन खेलों में अग्रणी रहते हुए कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके है।
डीएसपी अल्बर्ट कुजूर ने बताया कि जब मैं पढ़ता था तब यूनिवर्सिटी चुनाव में शहर पैनल और होस्टल पैनल में जबरदस्त विवाद होने पर जबलपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी सतपाल सिंह वहां पर आए थे, उनके रुतबे और जलवे देखकर वर्दी ने मुझे अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
पुलिस वालों का बुलेट में चलना मुझे बहुत आकर्षित किया और मैंने तय किया कि मैं भी पुलिस में जाऊंगा।
मेरा चयन रेलवे में बुकिंग क्लर्क के लिए भी हुआ था मैंने वहां छह माह नौकरी भी किया। शुरू से काम करने का यही उद्देश्य रहा कि गरीबो के साथ अन्याय ना हो, कानून सबके लिए समान है चाहे वह गरीब हो या अमीर हो। अपराध नियंत्रण पर पूरा फोकस रहा है। गुंडागर्दी से से मुझे बहुत नफरत रहा और मैंने अच्छे अच्छे गुंडों को ठीक भी किया है।

Related Posts