भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस)। मेरे पिताजी किसान थे, हमे गांव से 23 किलोमीटर दूर खरीदारी करने बस से गरियाबंद जाना पड़ता था। बस में आते-जाते समय वर्दी वालो का जलवा देखता था, बस में उनके लिए आगे की सीट रिजर्व रहती थी, वर्दीवालों का इतना मान-सम्मान देखकर दिमाग मेें था कि बनना है तो थानेदार ही बनना है। यह सब बातें दुर्ग जिले में नवपदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) कविलाश टंडन ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। इन्होंने अपने अब तक के सफर को हमसे साझा करते हुए आगे की कार्य योजना बताई।
एएसपी कविलाश टंडन का जन्मस्थान ग्राम सकरी है। यह ग्राम सकरी और जरवे, थाना पलारी जिला बलौदाबाजार के शासकीय स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। आगे की शिक्षा के लिए इन्होंने शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बलौदाबाजार में दाखिला लिया और कक्षा ग्यारहवीं तक की शिक्षा यहां पर प्राप्त किया।
बहादुर दाऊ कल्याण सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलौदाबाजार में आट्र्स विषय में दाखिल लिया और प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षा वर्ष 1981-82 उत्तीर्ण हुए उसी वर्ष हाई स्कूल के परसेंटेज के आधार पर इनका चयन शिक्षक के लिए हो गया।
प्राथमिक शाला ब्लॉक खरता, ब्लॉक गरियाबंद में इन्होंने शिक्षक के पद पर जुलाई 1983 तक अपनी सेवाएं दी साथ ही बीए फाइनल ईयर का प्राइवेट में दुर्गा कॉलेज, रायपुर से परीक्षा दिये और 1982 में ग्रैजुएट हुए। यह हिस्ट्री में स्नातकोत्तर तथा एलएलबी किए है।
ग्रेजुएशन के बाद दोस्तों से पता चला कि पुलिस में थानेदारी की भर्ती निकली है, फॉॅर्म भरे तत्कालीन डीआईजी चमनलाल (भापुसे) के अध्यक्षता की कमेटी में रिटन, फिजिकल पास होने के बाद इनका वर्ष 1983 में उप-निरीक्षक के लिए चयन हुआ। जुलाई 1983 से सितंबर 1984 तक सागर (मप्र) में ट्रेनिंग के बाद 01 अक्टूबर 1984 को ज्वाइनिंग किये। ज्वाइनिंग के बाद एपीपीसी (शस्त्र) ट्रेनिंग कॉलेज, इंदौर में दो माह का विशेष प्रशिक्षण किए।
डकैत उन्मूलन कोर्स के लिए शिवपुरी (मप्र) में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किए। 30 अक्टूबर 1984 को तत्कलीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या होने के बाद देश मे उत्पन्न हुए लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति को देखते हुए पूरे मध्यप्रदेश के राजधानी भोपाल में ड्यूटी लगी और पहली बार पुलिसिंग से रूबरू हुए।
पहली पोस्टिंग दक्षिण बस्तर में जहां इन्होंने गीदम, भानुप्रतापपुर, कांकेर, किरन्दुल, बैलाडीला, कुआकोंडा, कुटरू थानों में 1990 तक अपनी सेवाएं दी। कुआकोंडा थाना में पदस्थापना के दौरान दो बार नक्सली मुठभेड़ को लीड किए। उस वक्त बस्तर के डीआईजी आरपी मोदी थे। उस वक्त मुठभेड़ होने पर पुलिस को देखकर नक्सली भाग जाया करते थे।
जुलाई 1990 में इनका तबादला दुर्ग में हुआ जहां इन्होंने गुंडा स्कार्ट, थाना भिलाई नगर, भट्टी थाना, उतई और छावनी थानों में अपनी सेवाएं दी।
नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इन्होंने रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग, महासमुंद, रायपुर में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2004 में इनका प्रमोशन हुआ और यह उप निरीक्षक से निरीक्षक बने। प्रमोशन के बाद इनका तबादला रायगढ़ में हुआ जहां इन्होंने चक्रधरनगर सहित कई थानों के प्रभारी रहे तथा वहां वर्ष 2006 तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2006 से 07 तक पीटीएस राजनांदगांव में अध्यापन शाखा में पदस्थ रहे। नव आरक्षकों को प्रशिक्षित किया। वर्ष 2008 में पुन: दुर्ग पोस्टिंग के बाद थाना पुरानी भिलाई, सुपेला के प्रभार में रहे। इसके पश्चात पुलिस मुख्यालय में सीआईडी के पद पर रहते हुए तत्कालीन आईजी ने इन्हें मोहदपारा थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दी। वर्ष 2010 में यह रायपुर के सरस्वती नगर, गंज, राजेन्द्र नगर तथा खमतराई के थाना प्रभारी रहे।
वर्ष 2011 में इनका प्रमोशन हुआ और यह निरीक्षक से उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) बनाये गये। वर्ष 2011 से 2013 तक एटीएस में पदस्थ रहे। वर्ष 2013 पुन: दुर्ग तबादला हुआ और सीएसपी भिलाई नगर, डीएसपी क्राइम, सीएसपी छावनी के पद पर रहे साथ ही दुर्ग सीएसपी के पद पर अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जिसे इन्होंने बखूबी निभाया।
अक्टूबर 2016 से अगस्त 2019 तक सीआईडी, पुलिस मुख्यालय, रायपुर के विभिन्न शाखाओ में अपनी सेवाएं दी। सीआईडी में पदस्थ रहते हुए इनका प्रमोशन हुआ और डीएसपी से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) बनाये गए। सितंबर 2019 से अगस्त 2020 तक एएसपी सीआईडी के पद पर सेवाएं देने के बाद अगस्त 2020 में इन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव की जिम्मेदारी दी गई जहां इन्होंने मई 2021 तक अपनी सेवाएं दी। मई 2021 से राज्य सरकार ने इन्हें वीवीआइपी जिला दुर्ग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) की जिम्मेदारी दी है, जिसे यह बखूबी जिम्मेदारी के साथ निभा रहे है।
परिवार के साथ समय बिताना और दुखी लोगो की मदद करने में विशेष रुचि रखने वाले एएसपी कविलाश टंडन ने बताया कि जब कोई व्यक्ति दुखी होता है, सताया हुआ होता है तभी वह पुलिस के पास आता है, ऐसे व्यक्ति की मदद करने में बड़ा आनंद आता है। मुझे गुंडागर्दी और असामाजिक तत्वों से बहुत नफरत है। मैं दुखी लोगों की मदद करने के लिए ही सामाजिक संगठनो से जुड़ा हूँ, इसलिए चौबीस घंटे अपना मोबाइल चालू रखता हूँ। नौकरी के दौरान बहुत से मामले का खुलासा किये लेकिन रायपुर पोस्टिंग के दौरान तब मैं क्राइम ब्रांच में था, मोहदपारा थाना के सामने स्थित एसबीआई बैंक में डकैती हो गई थी, उसकी पतासाजी के लिए बिहार, झारखंड में विशेष भूमिका निभाई और उस मामले को ट्रेस करने में सफलता प्राप्त हुई। अपने पिताजी को अपना आदर्श मानने वाले एएसपी कविलाश टंडन ने बताया कि आज उन्हीं की बदौलत मैं यहां तक पहुंचा हूँ। पढ़ाई के दौरान मैं स्कूल भी नही जाता था, पिताजी समझाइश देकर स्कूल लेकर छोड़ आते थे। जब गांव से शहर स्कूल जाना पड़ता था तब मैं नही जाता था तब पिताजी जबरदस्ती बस में बैठा कर आते थे। जब हॉस्टल में रहता था तब हॉस्टल की छत से बस को देखकर उसके पीछे पीछे घर आ जाता था। पिताजी के बदौलत ही मैं पढ़ पाया। मेरी जिंदगी का सबसे यादगार पल जुलाई 1983 का है जब पिताजी मेरी नौकरी (उप-निरीक्षक) का ज्वाइनिंग लेटर पैरी नदी को डोंगी से पार करके लाये थे और मुझे दिए थे। मुझे शुरू से ही वर्दी पसंद थी इसलिए मैंने एनसीसी ज्वाइन किया था और खेलकूद में भी एक्टिव रहता था।
दुर्ग जिला वीवीआइपी वाला जिला है, यहां की ट्रैफिक व्यवस्था चुनौतियों वाला काम है। अभी यहां चार-चार फ्लाई ओवर निर्माणाधीन है जिसके कारण भीड-़भाड़ ज्यादा हो जाती है, लेकिन फ्लाई ओवर के पूर्ण होने पर यातायात सुगम हो जाएगा। दुर्ग ट्रैफिक पुलिस लगातार यह प्रयास कर रही है कि यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाया जाए। वीआईपी जिला होने के कारण यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखना पड़ता है। थानों से मिलकर और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में सुगम यातायात बनाने की कोशिश करेंगे और लोगों से अपील भी करेंगे कि यातायात व्यवस्था बनाने में पुलिस का सहयोग करें। ट्रैफिक के नियमो का पालन पूरी तरह करें। अभी कोरोना काल है तो यह भी जरूरी है कि मास्क लगाए और बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकले।














