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पीड़ित पक्ष का सहयोग कर उनको न्याय दिलाना मेरी प्राथमिकता : राकेश जोशी

भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस)। अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण करना, त्वरित कार्यवाही  कर पीडि़त पक्ष का सहयोग कर उनको न्याय दिलाना मेरी प्राथमिकता रही है और मैं जहां भी पदस्थ रहा हूँ वहां इन्ही उद्देश्यों के साथ काम किया हूं और आगे भी करता रहूंगा। यह सब बातें पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज कार्यालय में पदस्थ डीएसपी राकेश जोशी ने सारनाथ एक्सप्रेस  से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने अपने अब तक कार्यकाल को हमसे साझा किया। डीएसपी राकेश जोशी की प्रारंभिक और हायर सेकेंडरी तक कि शिक्षा महासमुंद जिला के बसना के शासकीय स्कूल में हुई। उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए साइंस कॉलेज रायपुर में दाखिला लिया और वर्ष 1981 में साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल किया। वर्ष 1983 के सब इंस्पेक्टर परीक्षा में सम्मिलित हुए और अपने पहले ही प्रयास में सब इंस्पेक्टर के लिए चयनित हुए और इसी वर्ष सागर (मप्र) में ट्रेनिंग पूरी की। अक्टूबर 1984 में वह पास आउट हुए और पहली पोस्टिंग बस्तर में हुए। जहा वह कोतवाली जगदलपुर और सुकमा में पदस्थ रहे। वर्ष 1985 में ही उन्हें घोरनक्सली क्षेत्र भोपालपट्टनम का थाना प्रभारी नियुक्त किया गया। नक्सली क्षेत्र में पदस्थ रहते हुए वह जगरगुड़ा, बैलाडीला, कोंडागांव और चार वर्ष तक गीदम में पदस्थ रहे। वर्ष 1992 में इनका तबादला दुर्ग जिला में हुआ जहा वह छावनी, खुर्सीपार, उतई, पाटन, गुंडरदेही, राजहरा, क्राइम ब्रांच थानों के प्रभारी रहे। वह राजनंदगावँ के छुईखदान और धमतरी में भी थाना प्रभारी रहे। वर्ष 2004 में उनका प्रमोशन हुआ और वह निरीक्षक बने साथ ही उनका तबादला मानव अधिकार आयोग में हुआ। पुन: दुर्ग तबादला के बाद वह राजहरा, क्राइम ब्रांच, सुपेला, भिलाई नगर, छावनी, विशेष शाखा में पदस्थ रहे। वर्ष 2017 में उनका प्रमोशन हुआ और वह डीएसपी बने। डीएसपी बनने के बाद इनकी पोस्टिंग एसडीओपी बालोद के पद पर हुआ और वर्ष 2018 से दुर्ग रेंज आईजी कार्यालय में पदस्थ है। अपने माता को अपना आदर्श मानने वाले एवं समाजसेवा, घूमने-फिरने, परिवार के साथ समय बिताने में विशेष रुचि रखने वाले डीएसपी राकेश जोशी को एसटीएससी, बालको-महिलाओं पर घटित अपराधों में त्वरित विवेचना के लिए, यूप-राजस्थान, दिल्ली के 14 चार पहिया वाहन चोरी करके यहां लाकर बेचने वाले आरोपी को पकडऩे, भिलाई-3 में हुए डकैती कांड के आरोपियों को मध्यप्रदेश से पकड़कर लाने, वर्ष 1992 में पारख ज्वेलर्स में हुई सोना-चांदी की चोरी के आरोपी को पकडऩे सहित अन्य कई मामलों में डीजीपी व आईजी द्वारा इन्हें पुरस्कृत किया जा चुका है।

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